
टी पी एस कॉलेज पटना में आयोजित “भारतीय ज्ञान परम्परा के आलोक में देवनागरी लिपि में व्यवहृत भाषा दर्शन ” विषय पर आयोजित एक दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी में मुख्य वक्ता के रूप में बोलते हुए प्रो. विजय कुमार कर्ण, अधिष्ठाता, छात्र कल्याण, नव नालन्दा महाविहार नालंदा ने अपने विचार व्यक्त किये।
पटना, 23 जुलाई 2025, भारतीय मुख्यत: मूल्यों पर आधारित है और आज के दौर में भारतीय ज्ञान परम्परा को इन्हीं मूल्यों के आधार पर पुनर्जीवित किया जा सकता है। ये बातें टी पी एस कॉलेज पटना ( TPS COLLEGE PATNA) में आयोजित “भारतीय ज्ञान परम्परा के आलोक में देवनागरी लिपि में व्यवहृत भाषा दर्शन ” विषय पर आयोजित एक दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी में मुख्य वक्ता के रूप में बोलते हुए प्रो. विजय कुमार कर्ण, अधिष्ठाता, छात्र कल्याण, नव नालन्दा महाविहार नालंदा ने कहीं।

उन्होंने कहा कि भारतीय ज्ञान परम्परा में लिपियों का बड़ा महत्त्व रहा है। उन्होंने देवनागरी लिपि का उल्लेख करते हुए उन्होंने ये बताने की कोशिश की कि ये लिपि पूर्णतः वैज्ञानिक है। इस लिपि की विशेषता यह है कि इसे हम जैसे बोलते हैं वैसे हीं लिखते भी हैं। ये लिपि भारतीय जान परम्परा को पुनर्जीवित करने में एक महत्वपूर्ण भूमिका अदा कर सकती है।

समारोह की अध्यक्षता करते हुए पूर्व कुलपति एवं टी पी एस कॉलेज के प्रधानाचार्य प्रो. तपन कुमार शांडिल्य ने कहा कि भारतीय ज्ञान परम्परा में समरसता का जो भाव है वो विश्व के किसी भी ज्ञान परम्परा में नज़र नहीं आता। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि आज छात्रों के एक हाथ में वेद और दूसरे हाथ में कंप्यूटर देकर हीं हम विश्व गुरु बनने के सपने को साकार कर सकते हैं। उन्होंने कृत्रिम मेधा को वैदिक काल से जोड़ते हुए कई उदाहरण दिए और ये साबित करने की कोशिश की कि कृत्रिम मेधा की परम्परा बहुत पुरानी रही है।

इससे पूर्व विषय प्रवेश करते हुए जाने माने दार्शनिक प्रो. श्यामल किशोर ने कहा कि नई शिक्षा नीति के तहत भारतीय ज्ञान परम्परा को पढ़ना आवश्यक है इसी के मध्य नजर आज के इस राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन किया गया है। इस अवसर पर मुख्य अतिथि पद्म श्री विमल जैन ने कहा कि भारतीय ज्ञान परम्परा के ज़रिए हीं हम अपने खोए हुए स्वाभिमान को पुनः प्राप्त कर सकते हैं। इसके लिए उन्होंने देवनागरी लिपि को ज्यादे से ज्यादा व्यवहार में लाने की आवश्यकता पर बल दिया।

समारोह का सफल संचालन डॉ. मनीष कुमार चौधरी ने किया जबकि धन्यवाद ज्ञापन विभागाध्यक्ष डॉ. विजय कुमार सिन्हा ने किया। इस अवसर पर कुलानुशासक प्रो. अबू बकर रिज़वी; प्रो. अंजली प्रसाद; प्रो. वीणा अमृत; प्रो. कृष्णनंदन प्रसाद; प्रो. धर्मराज राम; डॉ. नूपुर; डॉ. प्रशांत कुमार; डॉ. मुकुंद कुमार; डॉ. दीपिका शर्मा; प्रो. शशि भूषण चौधरी; डॉ. शशि प्रभा दुबे ; डॉ. सुशोभन पिलादी ; छात्र नेता अंकित तिवारी ; शिवम् पाराशर के अलावे बड़ी संख्या में गैर शैक्षिक कर्मचारी एवं छात्र छात्राएं उपस्थित थे।

