पांडेय गुट ने की मुख्यमंत्री जी से तत्काल हस्तक्षेप करने की माँग.
लखनऊ , 5 दिसम्बर , campussamachar.com, प्रदेश के आशासकीय सहायता प्राप्त माध्यमिक शिक्षण संस्थानों में विगत दो वर्षों से नियमो के अंतर्गत शिक्षको की पचास प्रतिशत कोटे में की जाने वाली पदोन्नतियां न किये जाने पर उ प्र माध्यमिक शिक्षक संघ पांडेय गुट ने गहरी नाराजगी जाहिर की है। संघ के वरिष्ठ शिक्षक नेता ओम प्रकाश त्रिपाठी ने इस मामले मे मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी ( Uttar Pradesh Chief Minister Yogi Adityanath,) का व्यक्तिगत ध्यान आकर्षित किया है और उनसे हस्तक्षेप करने की माँग की है।
UP Teachers News : शिक्षक नेता श्री त्रिपाठी ने बताया कि उ प्र शिक्षा सेवा आयोग ( UPESSC News: UP Education Service Commission (UPESSC) के गठन के बाद से ही इस अधिनियम में कोई व्यवस्था न होने का खामियाजा शिक्षक एवं दो वर्षो से कार्यरत कार्य वाहक संस्था प्रधानो को भुगतना पड़ रहा है। अभी इस मुद्दे पर प्रदेश की शिक्षामंत्री गुलाबो देवी जी ने विधान परिषद में दिये अपने लिखित वक्तव्य में विगत 21 नवंबर को शिक्षा निदेशक से विभागीय प्रस्ताव मागने का निर्देश जारी किया है। जो अपने आप मे इस संवेदनशील मामले में विभागीय अधिकारियों की उपेक्षात्मक रवैये को साफ तौर पर स्पष्ट करता है। नियमों के अंतर्गत पचास प्रतिशत सीधी भर्ती से और पचास प्रतिशत पदोन्नति कोटे से रिक्त पदों को भरे जाने का प्रावधान है। विगत दो वर्षो मे ये दोनो प्रकार की भर्ती नही हो पा रही हैं। इस प्रकार शिक्षक एवं कार्य वाहक संस्था प्रधानों को अपने निम्न स्तर के पद के वेतन से उच्च पद के दायित्व के निर्वहन के लिए विवश होना पड़ रहा है। यह उनके साथ जहा एक ओर घोर अन्याय तो है ही वही दूसरी ओर समान कार्य के लिए समान वेतन के सामान्य अधिकारों व सिद्धांतों का भी खुला उल्लंघन भी है।
Teachers News : श्री त्रिपाठी ने बताया कि नियमो के तहत पदोन्नतियां अनुमोदन के बाद कार्य भार ग्रहण करने की तिथि से मान्य होने का प्रावधान है। अब प्रश्न उठता है कि उनसे बिना अनुमोदन व वेतन के उच्च पद के सापेक्ष पूरे दायित्व का निर्वहन दो साल से कराया जारहा है और वेतन के लिए तकनीकी बात को आगे कर उनका आर्थिक शोषण किया जा रहा है।
UP Teachers News today : शिक्षक नेता श्री त्रिपाठी ने इस मामले में योगी सरकार से शिक्षक एवं संस्था प्रधानों को उनसे कार्य लिए जाने की तिथि से ही अनुमोदन एवं वेतन नियमानुसार भुगतान करने की दिशा में शीघ्र प्रभावी कार्य वाही किये जाने की माँग की है उन्होंने कहा कि अधिकारियों की मनमानी एवं गलती का खामियाजा शिक्षकों को भुगतने पर विवश किया जाना उनके साथ नैसर्गिक न्याय के सर्वथा विपरीत है.
