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ख़ास खबर
- सीधे तौर पर देखें तो शिक्षक संघ के पदाधिकारी अभी शिक्षकों से जुड़ी समस्याओं को हल करने के लिए कारगर कदम नहीं उठा पा रहे हैं और ना ही शिक्षकों से मेल मुलाकात कर उनकी समस्याएं जानने की कोशिश की जा रही है.
- शोध अध्यादेश के मसले पर लुआक्टा के अध्यक्ष प्रोफेसर मनोज पांडेय और महामंत्री प्रोफेसर अंशु केडिया आंदोलन को आगे बढ़ाने के लिए लगातार में न केवल कुलपति से वार्ता और पत्र व्यवहार कर रहे हैं बल्कि लखनऊ के जनप्रतिनिधियों से भी मुलाकात कर उन्हें ज्ञापन सौंप रहे हैं.
लखनऊ, 26 अगस्त, लखनऊ विश्वविद्यालय शिक्षक संघ (LUTA ) के कुलपति रहे प्रोफेसर आलोक कुमार राय के समर्थक होने का ठप्पा अब शिक्षक संघ के पदाधिकारी को भारी पड़ने लगा है . हालांकि शिक्षक संघ के दो महत्वपूर्ण पदों अध्यक्ष और महामंत्री पद पर निर्वाचित हुए क्रमशः प्रोफ़ेसर अनित्य गौरव और प्रोफेसर राम मिलन में आपसी तालमेल और बेहतर संबंध में होने के कारण अभी : आपदा “जैसी स्थिति तो नहीं है, लेकिन नए कुलपति के आने के बाद संगठन चलाना आसान नहीं होगा.
पहले ही मिल चुके हैं संकेत
इस बात के संकेत प्रोफेसर आलोक कुमार राय की विदाई के लिए आयोजित बैठक और विदाई समारोह से मिल चुके हैं . अब वर्तमान स्थिति पर गौर करें तो आलोक कुमार राय यहां से जा चुके हैं और उनके साथ प्रतिकुलपति रही प्रोफेसर मनुका खन्ना अब प्रभारी कुलपति के रूप में कुर्सी संभाल रही है. LUTA लिए अच्छी बात यह है कि वर्तमान प्रभारी कुलपति भी प्रोफेसर आलोक कुमार राय द्वारा प्रति कुलपति के रूप में नामित की गई थी . इसलिए LUTA के नेतृत्वकर्ता पदाधिकारियों के प्रति उनका रवैया सकारात्मक और सहानभूतिपूर्ण है लेकिन यह कितने दिन रहेगा ? जब तक प्रोफेसर मनुका खन्ना प्रभारी कुलपति के रूप में कुर्सी पर विराजमान है .
शिक्षकों का हुआ उत्पीडन
इसके बाद LUTA के पदाधिकारी के खिलाफ विश्वविद्यालय परिसर में माहौल बना और संगठन चलाना दोनों मुश्किल पड़ जाएगा. उसकी वजह LUTA के उपाध्यक्ष और संकाय प्रतिनिधियों में प्रोफेसर आलोक कुमार राय के विरोधियों का बोलबाला है और राय के कार्यकाल में इन सभी शिक्षकों का उत्पीड़न किसी न किसी रूप में हुआ है और यही उत्पीड़न के खिलाफ उनका आक्रोश नजर आ रहा है. सीधे तौर पर देखें तो शिक्षक संघ के पदाधिकारी अभी शिक्षकों से जुड़ी समस्याओं को हल करने के लिए कारगर कदम नहीं उठा पा रहे हैं और ना ही शिक्षकों से मेल मुलाकात कर उनकी समस्याएं जानने की कोशिश की जा रही है.
अभी प्रोफेसर आलोक कुमार के कार्यकाल वाला ही माहौल चल रहा है इसकी वजह यह है की प्रमुख पदों पर आलोक कुमार राय के समर्थक ही प्रशासनिक पदों पर काबिज हैं और इन्हें प्रोफेसर मनुका खन्ना द्वारा हटाए जाने का कोई उचित कारण नजर नहीं आ रहा है. इसलिए प्रशासनिक स्तर पर फेरबदल नए कुलपति के आने के बाद ही संभावित माना जा रहा है .
नए कुलपति का इंतज़ार
विश्वविद्यालय में नए कुलपति का इंतजार करने वालों की संख्या काफी अधिक है . इसकी वजह प्रोफेसर आलोक कुमार राय का लंबा कार्यकाल और एक विशेष शिक्षक समूह का सत्ता पर अपनी पकड़ बनाए रखकर मन मुताबिक कार्य करना है . इससे विश्वविद्यालय परिसर में शिक्षकों का एक बड़ा तबका न केवल समस्याओं से घिरा रहा बल्कि उनकी शिक्षक के रूप में निर्धारित सुविधा भी समय से प्राप्त नहीं हुई . कई शिकायते राजभवन तक की गई . जाहिर सी बात है अब यह सभी शिक्षक अपने पुराने रुतबे को वापस पाना चाहते हैं और इसके लिए अभी से तत्पर हैं ताकि नए कुलपति के आने के साथ ही उन्हें खोया हुआ सम्मान वापस मिल सके . अभी विश्वविद्यालय में रूटीन कार्य ही संचालित किये जा रहे हैं पर इन रूटीन कार्यों में भी कुछ ऐसे फैसले हुए हैं जींस डिग्री कॉलेज शिक्षक संघ काफी आक्रोशित है .
लुआक्टा भी विरोध में
लखनऊ विश्वविद्यालय संयुक्त महाविद्यालय शिक्षक संघ ने वर्तमान प्रभारी कुलपति के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है. विश्वविद्यालय अकेडमिक काउन्सिल के फैसले के विरोध में आयोजित धरना प्रदर्शन से लेकर अब गिरफ्तारी, राज भवन मार्च और परीक्षा बहिष्कार जैसे फैसले भी लेने के लिए तैयार हैं . शोध अध्यादेश 2025 के विरोध में शिक्षक संघ का आंदोलन लखनऊ विश्वविद्यालय के वर्तमान प्रभारी कुलपति के खिलाफ माहौल बना रहा है यह दीगर बात है कि उनकी कुर्सी भले नहीं हिले लेकिन शिक्षक संघ के आंदोलन के विस्तार को देखते हुए यह तय माना जा रहा है कि ऐसे हालातो में प्रभारी कुलपति के लिए रूटीन कार्य करना भी आसान नहीं होगा . खास तौर पर जब कॉलेज शिक्षक विरोध में खड़े हों . लुआक्टा के अध्यक्ष प्रोफेसर मनोज पांडेय और महामंत्री प्रोफेसर अंशु केडिया आंदोलन को आगे बढ़ाने के लिए लगातार में न केवल कुलपति से वार्ता और पत्र व्यवहार कर रहे हैं बल्कि लखनऊ के जनप्रतिनिधियों से भी मुलाकात कर उन्हें ज्ञापन सौंप रहे हैं.
