
- संगठन ने सवाल किया है कि जब एक बार यू जी सी रेगुलेशन 2022 के आधार पर स्नातक स्तर के शिक्षकों को शोध अधिकार प्राप्त हो गया है तो उसी रेगुलेशन के आधार पर दुबारा किस आधार पर स्नातक स्तर के शिक्षकों को शोध अधिकार से वंचित किया जा रहा है l
- विश्वविद्यालय की इस तानशाही का पूरा विरोध किया जायेगा.
लखनऊ, 07 अगस्त , लखनऊ विश्वविद्यालय की कल 08 अगस्त को होने वाली एकेडमिक काउंसिल की बैठक के एजेंडे में पी एच डी अध्यादेश 2025 को पारित कराने के प्रस्तुत किया जा रहा है, तथा पुन: महाविद्यालय के स्नातक स्तर के शिक्षकों को शोध अधिकार से वंचित किये जाने का प्रयास किया जा रहा है l
यह आरोप लगते हुए आज लखनऊ विश्वविद्यालय सहयुक्त महाविद्यालय शिक्षक संघ (#लुआक्टा ) के अध्यक्ष प्रोफ़ेसर मनोज पाण्डेय और महामंत्री प्रोफ़ेसर अंशु केडिया ने स्पष्ट शब्दों में आगाह किया है कि संगठन विश्वविद्यालय प्रशासन के ऐसे किसी भी निर्णय का विरोध करता है और यदि कल एकेडमिक काउंसिल द्वारा ऐसा कोई निर्णय लिया जाता है तो आंदोलन किया जायेगा l सुच्य है कि यू जी सी द्वारा शोध के संबंध में 2022 मे रेगुलेशन पारित किया गया था, जिसके आधार पर विश्वविद्यालय द्वारा पिछला शोध अध्यादेश लाया गया था, जिसमे स्नातक स्तर के शिक्षकों को शोध अधिकार से वंचित करने का प्रयास किया गया था, संगठन द्वारा अवगत कराया गया था कि महाविद्यालय के शिक्षकों को शोध का अधिकार राज्य सरकार द्वारा दिया गया है और विश्वविद्यालय के अधिकार क्षेत्र से परे है विश्वविद्यालय द्वारा विगत वर्ष 31-07-24 को एकेडमिक काउंसिल आहूत बैठक में महाविद्यालय के शिक्षकों को शासन के निर्णय के आधार पर स्नातक स्तर के शिक्षकों का शोध अधिकार यथावत रहा l लेकिन पुन: नया अध्यादेश 2025 लाकर विश्वविद्यालय द्वारा महाविद्यालयो के शिक्षकों को उनके अधिकार से वंचित करने की साजिश किया जा रहा, एवं उनके साथ सौतेला व्यवहार कर रहा है lसंगठन इसका विरोध करता है और यदि यह अध्यादेश कल पारित किया जाता है तो लुआक्टा द्वारा तत्काल आंदोलन शुरु कर दिया जायेगा lसंगठन द्वारा अपने इस निर्णय से मा कुलपति को अवगत करा दिया गया है l
संगठन ने सवाल किया है कि जब एक बार यू जी सी रेगुलेशन 2022 के आधार पर स्नातक स्तर के शिक्षकों को शोध अधिकार प्राप्त हो गया है तो उसी रेगुलेशन के आधार पर दुबारा किस आधार पर स्नातक स्तर के शिक्षकों को शोध अधिकार से वंचित किया जा रहा है l विश्वविद्यालय की इस तानशाही का पूरा विरोध किया जायेगा
