

भिलाई , 12 अगस्त , हर वर्ष की भाँति इस वर्ष भी साईं झूलेलाल धाम ,32 एकड़,हाउसिंग बोर्ड,औद्योगिक क्षेत्र भिलाई में आज दिनाँक 12/08/25 मंगलवार को ट्रीजड़ी (तीजा)पर्व की धूम मची रही।कार्यक्रम की शुरुआत सुबह के आयोजनों से हुई।सर्वप्रथम समाज की संगठन सचिव श्रीमती कमला भगत जी द्वारा काले तिल,हरे मूंग और जव से ट्रीजड़ी माता की स्थापना की गईऔर सदस्यों को यह भी जानकारी दी कि काला तिल ट्रीजड़ी माता का,और हरा मूंग हरियाली का और जव जो है दीर्घायु एवं उन्नति का प्रतीक है।फिर स्थापित की हुई ट्रीजड़ी माता को झूले में विराजित किया गया।और समाज की सभी महिलाओं द्वारा बारी बारी से मंदिर आकर मंत्रोच्चार के द्वारा माता पर मीठा जल चढ़ाकर झूला झुलाया गया। और सारा दिन महिलाओं ने अपने पति की दीर्घायु के लिए उपवास रखा।
फिर संध्याकाल के आयोजनों में ट्रीजड़ी माता को झूले से उतारकर भक्तों के बीच में स्थापित करके इसके महत्व से जुड़ी पौराणिक एवं ऐतिहासिक कथा सुनाई गई।जिसमें यह बताया गया ।कि एक बार एक महिला ने ट्रीजड़ी का व्रत रखा था।तो उसके कष्ट से व्यथित उसके भाई ने नकली चाँद के दर्शन को अर्ध्य दिलाकर अपनी बहन का व्रत तोड़ दिया था।जिससे उसके पति की मृत्यु हो गयी थी।फिर उस महिला ने अपने पति के शव को एक साल तक घर में रखकर उसकी सेवा की।और अगले वर्ष पुनः विधि विधान से व्रत रखा।चन्द्रमा को दिये गये अर्ध्य के जल को अपने पति के मुंह में डाला तो वह जीवित हो उठा।और इस तरह तब से ही सिंधी समाज की महिलायें अपने पति की दीर्घायु और उन्नति के लिये शीतला माता की आराधना कर इस व्रत को परंपरा अनुसार रखती हैं।
इन सभी कार्यक्रमों में साईं झूलेलाल धाम महिला मंडली के सभी सदस्यों का विशेष योगदान रहा।
