

- देववाणी के प्रति नई पीढ़ी में बढ़ा आकर्षण : डॉ लीना मिश्र
- संस्कृत गीत प्रतियोगिता में बालिका विद्यालय इंटरमीडिएट कॉलेज, मोती नगर, लखनऊ की छात्रा इलमा प्रथम स्थान पर रही। उसने बहुत खूबसूरती से गीत का प्रस्तुतीकरण किया और सभी निर्णायकों को मंत्रमुग्ध कर लिया।
- बालिका विद्यालय की इल्मा को मिला मंडल स्तर का संस्कृत संस्थान पुरस्कार
- विद्यालय के प्रबंधक एवं प्रख्यात समाजसेवी मनमोहन तिवारी एवं प्रधानाचार्य डॉ लीना मिश्र ने विजयी छात्रा एवं उनकी शिक्षिकाओं को बधाई दी और उज्ज्वल भविष्य की कामना की
लखनऊ , 07 अगस्त , संस्कृत को देव वाणी कहा जाता है। वैज्ञानिक दृष्टि से भी संस्कृत को सर्वोत्तम भाषा माना गया है। हालांकि पश्चिमी संस्कृति के बढ़ते प्रभाव के कारण एक दौर में देववाणी की तरफ उदासीनता अवश्य देखी जा रही थी पर उसके महत्त्व और उपयोगिता को समझते हुए नई पीढ़ी संस्कृत को अपने स्वाभिमान और असीम ज्ञान के भंडार के रूप में अपना रही है। यह उत्तर प्रदेश संस्कृत संस्थान द्वारा आयोजित प्रतियोगिताओं के परिणाम से स्पष्ट देखा जा सकता है।

उत्तर प्रदेश संस्कृत संस्थान, लखनऊ द्वारा मंडल स्तरीय संस्कृत प्रतिभा खोज 2025 कार्यक्रम का आयोजन हुआ। संस्कृत भाषा के प्रचार प्रसार एवं शास्त्रीय अध्ययन को बढ़ावा देने के लिए कक्षा 6 से लेकर स्नातकोत्तर स्तर तक के विद्यार्थियों के लिए त्रिस्तरीय प्रतियोगिता का आयोजन किया जाता है। सभी प्रतियोगिताएं मौखिक आयोजित होती हैं। इन प्रतियोगिताओं की सहायता से विद्यार्थियों के ज्ञान, स्मृति, भाषा कौशल एवं शास्त्र विषयक समझ का मूल्यांकन किया जाता है।

मंडल स्तर पर चार प्रतियोगिताएं आयोजित हुईं- संस्कृत सामान्य ज्ञान प्रतियोगिता (बाल वर्ग), संस्कृत सामान्य ज्ञान प्रतियोगिता (युवा वर्ग), श्लोकअंताक्षरी प्रतियोगिता, एवं गीत प्रतियोगिता। कुल 68 प्रतिभागी थे। गीत एवं संस्कृत ज्ञान प्रतियोगिता में लखनऊ मंडल के 6 जनपदों के प्रथम, द्वितीय एवं तृतीय स्थान प्राप्त छात्रों ने प्रतिभाग़ किया था। इस कार्यक्रम का कुशल संचालन अनिल एवं जगदानंद झा ने किया। लखनऊ मंडल संयोजिका डॉ सरिता श्रीवास्तव एवं लखनऊ जनपद संयोजिका मंतशा जहां थीं।

