
- 01 व 02 मार्च को विलुप्त होती ग्रामीण सामाजिक- सांस्कृतिक प्रणाली पर राष्ट्रीय वेबिनार शुरू
लखनऊ , 01 मार्च 2025 , campussamachar.com, भारतीय समाजशास्त्र के अग्रणी विचारक प्रो. बृज राज चौहान के सम्मान में जो कि लखनऊ विश्वविद्यालय के पुरा छात्र भी रहे हैं, भारतीय समाजशास्त्रीय परिषद, नई दिल्ली की शोध समिति 08 (असमानताएं, स्तरीकरण और बहिष्कार अध्ययन) एवं 15 (कृषि तथा ग्रामीण अध्ययन) व खुन खुन जी गर्ल्स पी. जी. कॉलेज लखनऊ प्रिंसिपल- प्रो. अंशु केडिया के संयुक्त तत्वाधान एवं डॉ. सुप्रिया सिंह के संयोजन तथा डॉ. ए. चंद्रशेखर रेड्डी, डॉ. अविनाश एवं डॉ. वी. श्रीमन्नारायण मूर्ति के सह संयोजन में राष्ट्रीय वेबिनार आयोजित की जा रही है .
राष्ट्रीय वेबिनार के आज प्रथम दिन के उद्घाटन भाषण में प्रो. मैत्रेई चौधरी (अध्यक्ष, भारतीय समाजशास्त्र परिषद, नई दिल्ली) ने वेबिनार के विषय का महत्व बतलाया एवं शोध समितियों के संयुक्त संयोजन को सराहा। वेबिनार के मुख्य वक्ता के रूप में प्रो. सुरिंदर जोधका (जेएनयू, नई दिल्ली) ने भारतीय गांवों के औपनिवेशिक विचार पर प्रश्नचिह्न खड़ा किया, जहां पर गांवों को एक स्थैतिक तथा परंपरागत इकाई के रूप में एक लंबे समय से देखा, समझा गया, तथा इसके उलट उन्होंने भारतीय गांवों को एक गतिशील इकाई के रूप में समझने की वकालत की l
वेबिनार के उद्घाटन सत्र के बाद भारत के गांव विलुप्त हो रहे हैं नामक विषय पर एक संगोष्ठी का आयोजन भी किया गया जिसकी अध्यक्षता प्रो. खजान सिंह सांगवान (रोहतक) द्वारा की गई। इसमें भारत के विभिन्न समाजशास्त्रियों जैसे प्रो. आभा चौहान (धर्मशाला, हिमाचल प्रदेश), प्रो. श्रुति तांबे (पुणे) तथा प्रो. राजेश मिश्रा (लखनऊ) द्वारा शिरकत की गई तथा अपने-अपने विचार प्रस्तुत किए गए।
प्रो. आभा चौहान ने प्रो. बृज राज चौहान के अध्ययनों का संस्मरण करते हुए गांवों और शहरों के अंतर्संबंधों की बात की जिसमें परिवार, वैवाहिक, नातेदारी इत्यादि संस्थाएं संबंधित हैं, जो नगर और गांवों को जोड़ती और गतिशील करती हैं। प्रो. श्रुति तांबे ने ग्रामीण शहरी स्पेक्ट्रम की चर्चा की और अपने महाराष्ट्रीयन समाज के अध्ययन द्वारा गांवों में हो रहे परिवर्तनों की चर्चा की जो नगरीय प्रक्रियाओं और प्रणालियों से प्रभावित हैं। प्रो. राजेश मिश्रा ने भी ग्रामीण नगरीय संबंधों को अवलोकित करते हुए ग्रामीणता की आत्मा (Ethos)अर्थात ग्रामीण जीवन शैली पर चर्चा की। उनके अनुसार नगर का शरीर गांवों में प्रवेश कर गया है, और गांव की आत्मा/स्वभाव शहरों में।
lucknow news today : इसके बाद प्रो. अरविंद चौहान (भोपाल) की अध्यक्षता तथा यू. बी. सिंह (रायबरेली) की उपा-अध्यक्षता में प्रो. जया पाण्डेय (लखनऊ), डॉ. श्रबंती चौधरी (कोलकाता), डॉ. विनय सिंह चौहान (बरेली), आर. कन्नन (तमिलनाडु), डॉ. श्वेता शुक्ला (लखनऊ) इत्यादि ने अपने शोध पत्र प्रस्तुत किए।
