Indira Gandhi National Tribal University, Anuppur

अनूपपुर. इन्दिरा गांधी राष्ट्रीय जनजातीय विश्वविद्यालय, अमरकंटक के पर्यटन प्रबंध विभाग के द्वारा ‘अनुसंधान और प्रकाशन नैतिकता’ विषय पर शोद्यार्थियों एवं शिक्षकों हेतु कैपीसिटी बिल्डिंग प्रोग्राम का शुभारंभ 15 जून 2021 को हुआ। यह कार्यक्रम 28 जून 2021 तक ऑनलाइन माध्यम से संचालित होगा, जिसमें देश के प्रख्यात एवं विषय विशेषज्ञ अपना व्यक्तव्य देंगे। इसमें भारत के कई प्रमुख प्रदेशों के विभिन्न विश्वविद्यालयों, महाविद्यालयों और शोध संस्थाओं से 110 से अधिक शोद्यार्थी एवं 50 से अधिक अध्यापक सिसको वेबेक्स एप्लीकेशन के माध्यम से जुड़ेंगे तथा प्रमुख वक्तओं के विचारों से लाभान्वित होंगे।
इस अवसर पर उद्घाटन कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. श्री प्रकाश मणि त्रिपाठी ने कहा कि शोध गतिविधियों में गुणवत्ता लाने के लिए इस तरह के कार्यक्रम की आवश्यकता प्रत्येक विश्वविद्यालय एवं महाविद्यालयों में है। अनुसंधान कार्य को प्रभावकारी बनाने, वस्तुनिष्ठता और वैधता लाने के लिए शोधार्थियों के साथ-साथ शिक्षकों को भी प्रशिक्षित किया जाना अतिआवश्यक है और यह कार्यक्रम इसी दिशा में किया गया एक प्रयास है। उन्होंने उम्मीद जताई कि इस कार्यक्रम से शोधकर्ता शोध के सन्दर्भ में नैतिक मूल्यों से अवगत होंगे और अपने अनुसंधान को प्रभावकारी के साथ-साथ जनकल्याणकारी बनायेंगे।
शोध नैतिक मूल्यों के प्रति प्रतिबद्ध हो: प्रो.बागरी
शुभारम्भ कार्यक्रम के मुख्य अतिथि प्रो.एस.सी.बागरी,सेन्टर फॉर माऊंटेन टूरिजम एण्ड होस्पीटेलिटि स्ट्डीज, हेमवती नंदन बहुगुणा विश्वविद्यालय, गढ़वाल ने प्रतिभागियों को सम्बोधित करते हुए कहा कि शोधार्थी को शोध की यात्रा के प्रारम्भ से अन्त शोध के नैतिक मूल्यों के प्रति प्रतिबद्ध होना चाहिए। शोध के नैतिक मूल्यों की एक लम्बी सूची है जिसका सम्मान व पालन शोधार्थी को शोध के प्रत्येक चरण में करना चाहिए। शोध के नैतिक मूल्यों से शोधार्थी को अवगत कराने का केवल यही लक्ष्य नहीं है कि इससे मौलिक एवं गुणात्मक अनुसंधान को बढ़ावा मिलेगा। यह एक विस्तृत प्रक्रिया है जो शोधार्थी के अन्तर्मन में शोध के प्रति लगाव, ईमानदारी तथा जनकल्याण के प्रति चेतना को जाग्रत करेगी। शोध के नैतिक मूल्यों का अध्ययन उन प्रभावशाली संबंधों के विषय में भी जागरूक करता जो प्रत्यक्ष एवं गुप्त रूप से अनुसंधान प्रक्रिया में व्याप्त होते है। इनका अध्ययन शोधार्थी को कई मुद्दों जैसे प्रतिभागियों की सहमति, एकांतता, परिणाम, हानि, गोपनीयता एवं गुमनामी आदि विषयों के सन्दर्भ में विस्तृत ज्ञान प्रदान करेगा।
कार्यक्रम के शुभारम्भ सत्र में सम्मिलित सभी अतिथियों एवं प्रतिभागियों का स्वागत, कार्यक्रम के निदेशक डॉ. प्रशान्त कुमार सिंह ने किया तथा आगामी 14 दिनों तक चलने वाले इस सम्पूर्ण कार्यक्रम की रूपरेखा को प्रस्तुत किया। पर्यटन प्रबंध विभाग के विभागाध्यक्ष प्रो. जी.बी.एस. जोहरी ने कार्यक्रम के विषय के महत्व एवं इसकी उपयोगिता पर प्रकाश डाला। इस अवसर पर विभाग के वरिष्ठ आचार्य प्रो. जितेन्द्र मोहन मिश्रा ने शोध के नैतिक मूल्यों की आवश्यकता के साथ ही इसके विभिन्न पहलुओं पर प्रकाश डाला। शुभारम्भ कार्यक्रम के अन्त में विभाग के सहायक प्राध्यापक डॉ. अनिल कुमार टमटा ने आभार प्रस्तुत किया तथा इस सम्पूर्ण कार्यक्रम का संचालन विभाग के सहायक प्राध्यापक एवं कार्यक्रम के सह-निदेशक डॉ. रोहित बोरलीकर ने किया।
