
लखनऊ. तिब्बत की आजादी को लेकर लंबे समय से विभिन्न समूहों द्वारा आंदोलन लोकतांत्रिक तरीके से आंदोलन चल रहा है। इनमें कई संगठन तिब्बत की निर्वासित सरकार और पूज्य दलाई लामा के मार्गदर्शन प्राप्त करने के बाद अपनी रणनीति बनाते हैं। भारत में भारत तिब्बत संवाद मंच (बीटीएसएम) देशभर में व्यापक जनाधार खड़ा करने में लगा हुआ है। हाल ही में संवाद मंच की राष्ट्रीय कार्यसमिति की बैठक में भी तय हुआ है देश के विभिन्न राज्यों जिलों में संगठन को स्थापित किया जाए। हम आने वाले दिनों में और अधिक मजबूती से इस आंदोलन को चलाएंगे।
यह जानकारी भारत तिब्बत संवाद मंच (बीटीएसएम) के संयोजक डॉ संजय शुक्ला ने दी। उन्होंने बताया की बैठक में सभी प्रमुख राज्यों में पदाधिकारी नियुक्त करने के फैसले के बाद इस दिशा में काम शुरू हो गया है। दक्षिण भारत के प्रमुख राज्यों कर्नाटक, आध्रप्रदेश, तेलंगाना,केरल समेत नार्थ-ईस्ट के कई राज्यों में पदाधिकारियों की नियुक्ति का काम भी पूरा हो चुका है। उन्होंने कहा कि भारत की स्वतंत्रता और सुरक्षा के लिए तिब्बत एक अहम पड़ोसी देश है और भारत तिब्बत के रिश्ते आज से नहीं बल्कि शताब्दियों से रहे है।ं इन दोनों देशों की सांस्कृतिक विरासत एक दूसरे के पूरक हैं, लेकिन लेकिन चीन की विस्तार वाली नीति ने तिब्बत के अस्तित्व को खतरे में डाल दिया है। डॉ. शुक्ला का कहना है कि वर्तमान में तिब्बत की सांस्कृतिक और धार्मिक धरोहर को नष्ट करने की सुनियोजित साजिश चल रही है। चीन की विस्तार वादी नीति तिब्बत को पूरी तरह से निगलने के लिए आतुर है और इस इस विस्तार वादी नीति का लोकतांत्रिक तरीके से विरोध करने वालों को तरह-तरह से प्रताडि़त और दंडित किया जा रहा है।
समान विचाराधारा वाले संगठनों के साथ
डॉ. शुक्ला ने बताया कि बीटीएसएम दुनिया भर के ऐसे जन सरोकार संगठनों लोकतांत्रिक मूल्यों के पक्षधर लोगों को लोगों से जुड़ कर तिब्बत की स्वायत्तता उसकी पूरी आजादी उसकी धार्मिक मान्यताओं को यथावत रखने के लिए प्रयासरत हैं डॉक्टर शुक्ला ने बताया कि तिब्बत की निर्वासित सरकार के पदाधिकारी मंच के साथ अपने विचारों को साझा करते हैं और मंच के कार्यक्रमों पर भी अपने विचार रखते हैं संजय शुक्ला ने बताया कि संगठन को अधिक प्रभावी और मजबूत बनाने के लिए वर्तमान में देश के विभिन्न हिस्सों में लोगों को जोडऩे के लिए काम चल रहा है राज्यों में जरूरत के हिसाब से पदाधिकारियों की नियुक्तियां की जा रही हैं और कार्यक्रमों के माध्यम से तिब्बत की स्वच्छता को लेकर अपना अपने विचार लोगों के सामने रखे जा रहे हैं उन्होंने कहा खुशी की बात है कि मंच के कार्यक्रमों में मंच से जुडऩे के लिए अधिक से अधिक लोग उत्सुक हैं और माना जाना चाहिए कि तिब्बत को आजादी दिलाने में लोग सहायक होंगे
जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल से कर चुके हैं भेंट
डॉ.संजय शुक्ला बीटीएसएम पदाधिकारियों के साथ जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा से भेंट कर उन्हें प्रधानमंत्री को संबोधित चार सूत्रीय ज्ञापन भी सौंपा। इसमें कैलाश मानसरोवर की मुक्ति, तिब्बत की आजादी और भारत की सुरक्षा का संकल्प के साथ 2021 में पूरे वर्ष चलने वाले देशव्यापी जागरूकता अभियान की भी उन्हें जानकारी दी। सौंपे गये ज्ञापन में केन्द्र सरकार द्वारा तिब्बत नीति घोषित करने व तिब्बत को पूर्ण गणराज्य की मान्यता देनें, कैलाश मानसरोवर, आक्साई चीन व पीओके को मुक्त कराने के संबंध संसद में लिये गये संकल्प को पूर्ण करने के लिए निर्णायक कदम उठाने, पूर्व माध्यमिक एवं माध्यमिक कक्षाओं की पाठ्यपुस्तकों में दक्षिण एशिया व चीन गणराज्य के नक्शे में तिब्बत को स्वतंत्र देश दर्शाने के साथ ही उस पर चीन द्वारा कब्जे के वास्तविक इतिहास से छात्रों को अवगत कराने, तिब्बत की आजादी के आन्दोलन को पूर्ण समर्थन देने एवं चीनी उत्पादों पर पूर्णतया प्रतिबन्ध लगाने की मांग की गयी। उप-राज्यपाल से मिलने वाले पदाधिकारियों में भारत तिब्बत संवाद मंच के संयोजक डॉ. संजय शुक्ला, केन्द्रीय कोर-ग्रुप के सदस्य व प्रदेश प्रभारी सुशपाल सिंह, सह-प्रदेश प्रभारी वीना गुप्ता, जम्मू-कश्मीर प्रदेश के अध्यक्ष एडवोकेट रघुवीर सिंह, महिला विभाग की प्रदेश अध्यक्षा कुन्ती जरसोटिया आदि प्रमुख थे।
