

- पंडित दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय कर्मचारी संध के अध्यक्ष महेंद्र नाथ सिंह ने कहा कि प्रदेश में दो-दो समानान्तर महासंघ होने के कारण भ्रम की स्थिति उत्पन्न हो गयी है जिसके कारण प्रदेश स्तर पर विश्वविद्यालयो के कर्मचारी नेतृत्व विहीन हो गये है।
- लखनऊ विश्वविद्यालय, कर्मचारी परिषद के अध्यक्ष राकेश कुमार यादव ने बैठक का संचालन एवं महामंत्री संजय शुक्ला ने आभार ज्ञापन किया।
लखनऊ , 19 अप्रैल 2025 , campussamachar.com, उत्तर प्रदेश राज्य विश्वविद्यालय कर्मचारी महासंघ की आवश्यक बैठक आज 19 अप्रैल 2025 को लखनऊ विश्वविद्यालय के एपी सेन सभागार में सम्पन्न हुयी। बैठक में महासंघ के पदाधिकारियों के साथ ही प्रदेश के सभी विश्वविद्यालयों के वर्तमान अध्यक्ष एवं महामंत्री षामिल हुए। बैठक में वर्तमान परिस्थिति में राज्य विश्वविद्यालयों के शिक्षणेत्तर कर्मचारियों की समस्याओं के समाधान में राज्य विश्वविद्यालय कर्मचारी महासंघ की भूमिका पर व्यापक चर्चा कर आगामी कार्य योजना तैयार की गयी। बैठक में महासंघ के संविधान के विपरीत चल रहे समानान्तर महासंघो द्वारा कर्मचारी हितो की अनदेखी के विरूद्ध निन्दा प्रस्ताव पारित करते सभी पदाधिकारिणें ने सर्वसम्मति से मई माह में महासंध का अधिवेशन बुलाने और नवीन कार्यकारिणी के चुनाव कराने का निर्णय लिया।
इन्डियन पब्लिक इम्पलाई फेडरेशन के राष्ट्रीय अध्यक्ष वी0पी0 मिश्रा के साथ ही राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद के अध्यक्ष सुरेष रावत एवं महामंत्री अतुल मिश्राा बैठक में विशेष रूप से शामिल हुए। लखनऊ विश्वविद्यालय, कर्मचारी परिषद के अध्यक्ष राकेश कुमार यादव ने बैठक का संचालन एवं महामंत्री संजय शुक्ला आभार ज्ञापन किया। आज की बैठक में कतिपय कर्मचारी नेताओं द्वारा अपनी स्वार्थ सिद्धि के लिए समानान्तर दो-दो महासंघ गठित करने और संविधान के विपरीत पदाधिकारी बनाये जाने के विरूद्ध सर्वसम्मति से निन्दा प्रस्ताव पारित किया गया।
बैठक को सम्बोधित करते हुये वीर बहादुर सिंह पूर्वांचल विश्वविद्यालय जौनपुर के अध्यक्ष नन्द किशोर सिंह ने चिन्ता व्यक्त करते हुए कहा कि महासंध के संविधान की प्रस्तावना में स्पष्ट उल्लेख है कि सभी राज्य विश्वविद्यालयों के निर्वाचित पदाधिकारी आपस में बैठकर महासंघ का निर्माण करेंगे और इनको ही मतदान में प्रतिभाग करने का अधिकार होगा जबकि वर्तमान में ऐसा नहीं है। छत्रपति शाहूजी महाराज कानपुर विश्वविद्यालय कर्मचारी संध के अध्यक्ष आलोक कुमार ने अपने उद्बोधन में कहा कि उ0प्र0 राज्य विश्वविद्यालय कर्मचारी महासंघ के वर्तमान पदाधिकारियों में अधिकांष सेवानिवृत हो चुके है अथवा किसी भी विश्वविद्यालय के निर्वाचित पदाधिकारी नहीं है, जिसके कारण उनका विश्वविद्यालयों के वर्तमान कर्मचारी संधों के साथ सामन्जस्य नहीं है, जो कर्मचारी नेता स्वयं सेवा में नहीं है अथवा किसी विश्वविद्यालय के कर्मचारी संघ में निर्वाचित पदाधिकारी नहीं है वह महासंध का नेतृत्व कैसे कर सकता है।

पंडित दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय कर्मचारी संध के अध्यक्ष महेंद्र नाथ सिंह ने कहा कि प्रदेश में दो-दो समानान्तर महासंघ होने के कारण भ्रम की स्थिति उत्पन्न हो गयी है जिसके कारण प्रदेश स्तर पर विश्वविद्यालयो के कर्मचारी नेतृत्व विहीन हो गये है। बाबा साहब भीमराव अंबेडकर विश्वविद्यालय आगरा के अध्यक्ष अखिलेश चैधरी ने कहा कि वर्तमान परिस्थितियों में महासंध के संविधान के अनुरूप नवीन कार्यकारिणी का गठन किया जाना आवश्यक हो गया है जिसमें सभी विश्वविद्यालयों के निर्वाचित पदाधिकारी शामिल हों। इससे भ्रम की स्थिति समाप्त होने के साथ ही प्रदेष के नेतृत्व के साथ समन्वय व संवाद स्थापित होगा और महासंध सशक्त होगा। इससे कर्मचारी समस्याओं के समाधान का मार्ग प्रशस्त होगा।

बैठक को सम्बोधित करने वालों में पूर्वांचल विश्वविद्यालय जौनपुर के अध्यक्ष नन्द किशोर सिंह, महामंत्री रमेश चन्द्र यादव, गोरखपुर विश्वविद्यालय के अध्यक्ष महेंद्र नाथ सिंह जी, आगरा के अध्यक्ष अखिलेश चैधरी जी, कानपुर विश्वविद्यालय के अध्यक्ष आलोक कुमार व महामंत्री अभिषेक त्रिवेदी एवं अवध विश्वविद्यालय फैजाबाद के पूर्व अध्यक्ष डाॅ0 राजेश सिंह प्रमुख रूप से षामिल थे।
