
- विनियमितीकरण मामले में मंडलीय समितियों द्वारा शासन एवं सरकार को गुमराह किया जा रहा है -ओम प्रकाश त्रिपाठी
लखनऊ , 02 मई , campussamachar.com, प्रदेश के गैर सरकारी माध्यमिक शिक्षण संस्थानों में विगत पच्चीस जनवरी 1999 व तीस दिसंबर दो हजार तक क्रमश कठिनाई निवारण अधिनियम व चयन बोर्ड अधिनियम की धारा 18 के अंतर्गत नियुक्त तदर्थ शिक्षकों को विनियमित किये जाने मे मंडलीय समितियों द्वारा मनमानी ढंग से व्याख्या कर मामले मे शासन को गुमराह किया जा रहा ह। उ प्र माध्यमिक शिक्षक संघ पांडेय गुट ने इस रोजी रोटी से जुड़े मामले की ओर सरकार का ध्यान आकर्षित किया है और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी ( Uttar Pradesh Chief Minister Yogi Adityanath) से तत्काल हस्तक्षेप करने की माँग को दोहराया है।

संघ के प्रादेशिक अध्यक्ष डॉ जितेंद्र कुमार सिंह पटेल एवं सगठन प्रवक्ता ओम प्रकाश त्रिपाठी ने आज यहाँ जारी अपने बयान मे कहा कि मंडलीय अधिकारीगण नियमानुसार वर्ष 2000 तक के नियुक्त शिक्षकों को विनियमित करने के बजाय 2000 के पश्चात प्रबंध समितियों द्वारा की गयी नियुक्ति यो को एक साथ जोड़ कर देखा जा रहा है। यह सरासर गलत है। इसके चलते ही अधिकारी गण कोर्ट को भी गलत तथ्यों को प्रस्तुत कर गुमराह किया जा रहा है। इस मामले में कोर्ट का साफ तौर पर स्पष्ट रूप से मानना है कि दो हजार के बाद की नियुक्तियों पर केवल रोक लगाई गई है और वेतन दिये जाने से मना किया गया है। इसे 2000 के पूर्व के तदर्थ शिक्षकों पर लागू किया जाना जहा एक ओर उनके साथ अन्याय तो है ही वही दूसरी ओर कोर्ट के आदेशों की खुली अवहेलना के साथ साथ अवमान ना भी है।
शिक्षक नेताओ ने इस मामले मे अपर मुख्य सचिव दीपक कुमार एवं महानिदेशक स्कूल शिक्षा कंचन वर्मा जी का व्यक्तिगत ध्यान आकर्षित किया है और उनसे मामलो की समीक्षा कर सरकार एवं शासन की मंशा के अनुसार वर्ष 2000 तक के नियमनुसा र नियुक्त सभी तदर्थ शिक्षकों को विना भेद भाव के विनियमित करने व अवरुद्ध वेतन भुगतान कर प्रदेश के माध्यमिक शिक्षा जगत से तदर्थवाद को समाप्त करने की माँग की हैं।
