प्रदेश के दो हजार से अधिक तदर्थ वेतन न मिलने से भुखमरी के कगार पर , मुख्य मंत्रीजी से की हस्तक्षेप की माँग – पांडेय गुट- शिक्षक नेताओ ने इस मामले को अब आरपार की लड़ाई का प्रमुख ज्वलंत मुद्दा बना कर संगठन की शीघ्र् बैठक बुलाने जा रहा है, जिसमे अधिकारियों की इस मनमाने रवैये के खिलाफ निर्णायक रणनीति तैयार करने जा रहा है। जिसके लिए शिक्षा अधिकारी सीधे जिम्मेदार होंगे।
लखनऊ, 03 अगस्त , प्रदेश के गैर सरकारी माध्यमिक विद्यालय में विगत सात अगस्त 1993 से 30 दिसंबर 2000 के मध्य तत्समय विद्यमान शिक्षकों की भर्ती प्रक्रिया के तहत नियुक्त कार्यरत तदर्थ शिक्षकों का पिछले छ महीने से वेतन रोक कर लगभग दो हजार को भुखमरी के कगार पर पहुचाये जाने पर उप्र माध्यमिक शिक्षक संघ पांडेय गुट ने गहरी नाराजगी जाहिर की है। संघ के प्रादेशिक अध्यक्ष डॉ जितेंद्र कुमार सिंह पटेल एवं उपाध्यक्ष व संगठन प्रवक्ता ओम प्रकाश त्रिपाठी ने शिक्षकों की रोजी रोटी से जुड़ें इस मामले की ओर सूबे के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी का व्यक्तिगत ध्यान आकर्षित कर शिक्षकों को तत्काल वेतन भुगतान करने की माँग की है।

शिक्षक नेताओ ने बताया कि शिक्षा अधिकारियों की उपेक्षात्मक एवं लचर कार्य प्रणाली के चलते अट्ठाईस से तीस वर्ष सेवा के बाद भी तदर्थ शिक्षकों को रेगुलर न कर वेतन तक रोक कर उत्पीड़न किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि सर्वोच्य एवं उच्च न्यायालय तक के आदेशों को नजंदाज व अवहेलना कर शिक्षकों का उत्पीड़न किया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि न्यायालय ने साफ तौर पर अपने पारित आदेशों मे दो हजार के पहले कठिनाई निवारण अध्यादेश द्वितीय एवं धारा अठारह के अंतर्गत नियुक्त तदर्थ शिक्षकों को विनियमित कर कार्य लिए जाने व वेतन दिये जाने का स्पष्ट आदेश जारी किया गया है। जिसका अधिकारियों द्वारा अनुपालन नही हो रहा है। जब अवमानना याचिकाओ मे पर्सनल अपीयरेंस होती है तब जाकर भुगतान की कार्यवाही होती हैं। यह स्थिति न तो सरकार और न ही विभाग के लिए भी अच्छी है।
शिक्षक नेताओ ने इस मामले को अब आरपार की लड़ाई का प्रमुख ज्वलंत मुद्दा बना कर संगठन की शीघ्र् बैठक बुलाने जा रहा है, जिसमे अधिकारियों की इस मनमाने रवैये के खिलाफ निर्णायक रणनीति तैयार करने जा रहा है। जिसके लिए शिक्षा अधिकारी सीधे जिम्मेदार होंगे।
