
- बिना पद का वेतन दिये कार्य वाहक संस्था प्रधानों से सभी दायित्वों का निर्वहन कराया जाना उनके साथ घोर अन्याय : डॉ जितेंद्र सिंह पटेल
- बिना उच्च पद का वेतन भुगतान, समान कार्य के लिए समान वेतन के सिद्धांत का खुला उल्लंघन : ओम प्रकाश त्रिपाठी
लखनऊ, 16 जनवरी। सूबे के राज्य निधि से सहायता प्राप्त आशासकीय माध्यमिक विद्यालयों के कार्यवाहक संस्था प्रधानों को विगत तीन शैक्षिक सत्रों से उनके कार्य सापेक्ष पद का वेतन भुग तान नही हो रहा है। इस मामले पर उ प्र माध्य मिक शिक्षक संघ पांडेय गुट ने गहरी नाराजगी व्यक्त की है। संघ के प्रदेश अध्यक्ष डॉ जितेंद्र सिंह पटेल एवं संगठन प्रवक्ता ओंम प्रकाश त्रिपाठी ने अपर मुख्य सचिव शिक्षा पार्थसारथी सेन शर्मा का व्यक्ति गत ध्यान आकृष्ट किया है। साथ ही उनसे तत्काल हस्तक्षेप किये जाने की मांग दोहराई है।

शिक्षक नेताओ ने बताया कि पिछले सत्र २०२३ मे उ प्र शिक्षा सेवा आयोग के गठन के बाद से शिक्षा जगत में अनेक विसंगतियां पैदा हो गयी है । गौरतलब हो कि सक्षम शिक्षा अधिकरियो द्वारा १ अप्रैल २०२३ से जो संस्था प्रधान कार्य कर रहे हैं उन्हें भी पद का वेतन भुगतान न किया जाना उनके असंवेदन शीलता और अधिकारियों के दायित्व पर प्रश्न चिन्ह खड़ा करता है। विदित हो कि शिक्षा आयोग अगस्त २०२३ में बना उसके पहले पाँच माह तक अप्रैल से पद भार संभल कर कार्यवाहक संस्था प्राधनो का वेतन भुगतान नही किया जाना अत्यंत ही आपत्ति जनक स्थिति है। इसके बाद तीन साल से लगातार इस मामले पर अत्यंत ही खेद जनक व्यवहार किया जा रहा है।
संगठन शासन का ध्यान आकृष्ट करता चला आ रहा है। अभी तक कोई कार्यवाई न किया जाना और उनसे वे सभी दायित्व निर्वहन नियमित संस्था प्रधानों का कराया जा रहा है। यह समान कार्य के लिए समान वेतन के सिद्धाँ तो का भी खुला उल्लं घन है. शिक्षक नेताओ ने इस मामले मे तत्काल हस्त क्षेप कर संस्था प्राधनो को पूर्व की तरह नियमित चयन होने तक उन्हें कार्य के सापेक्ष पद का वेतन भुगतान सुनिश्च त किये जाने की मांग की है। नेताओं का कहना है कि पहले उ प्र माध्यमिक शिक्षा सेवा आयोग अधिनि यम २००० की धारा १८ ए में यह व्यवस्था थी कि रिक्ति के ६० दिन बाद अनुमोदन एवं पद का वेतन भुगता न किये जाने का प्रावधा न था। यह शिक्षा अधिनियम अभी तक प्राविधा नित न होने से अब बडी समस्या बन चुकी है। नये उ प्र शिक्षा सेवा अधिनि यम २०२३ में अभी तक कोई व्यवस्था नहीं की गयी है।
