
- लखनऊ के तदर्थ शिक्षकों को भी हाई कोर्ट के आदेश से हुआ एक साल से अवरुद्ध वेतन भुगतान ओ पी त्रिपाठी
- तदर्थ शिक्षकों के मामले में सुप्रीम कोर्ट सख्त, सरकार की पुनर्विचार याचिका की खारिज
- तदर्थ शिक्षकों को नियमित कर सभी परि नामी लाभ प्रदान करने के दिये जाने का सुप्रीम कोर्ट का आदेश
लखनऊ , 13 जनवरी , तीस दिसंबर 2000 के पहले से नियुक्त तदर्थ शिक्षकों को विनियमित कर उन्हें सभी परिणामी लाभों से लाभ प्रदान करने के सुप्रीम कोर्ट के आदेश के खिलाफ उ प्र सरकार की रिव्यु पटीशन सर्वोच्च न्यायालय की डबल बेंच ने डिमेरिट के आधार पर डिस्मिस कर दी है। सुप्रीम कोर्ट के आदेश का उ प्र माध्यमिक शिक्षक संघ पांडेय गुट के प्रदेश अध्यक्ष डॉ जितेंद्र कुमार सिंह पटेल एवं संगठन प्रवक्ता ओम प्रकाश त्रिपाठी ने हार्दिक स्वागत किया है। शिक्षक नेताओ ने बताया कि ये शिक्षक विगत २८- से ३० वर्षो से आशासकीय सहायता प्राप्त माध्यमिक विद्यालयों में वर्ष २००० से पूर्व की लागू नियुक्ति प्रक्रिया के अंतर्गत नियुक्त होकर कार्य कर रहे थे। जिन्हे अब तक नियमित नहीं किया गया था। बार बार हाई कोर्ट एवं सुप्रीम कोर्ट के आदेशों की भी शिक्षा अधिकारियों द्वारा अवहैलना कर उनका लगातार उत्पीड़न किया जा रहा था।
उन्होंने बताया कि यह निर्णय राज्य सरकार / शिव कुमार शुक्ला रिव्यू पिटीशन ४५९२३/२०२५-१० -१००१-६५७८५ मे विगत १२ नवम्बर २०२५ को ही साफ तौर पर जारी कर सरकार को स्पष्ट रूप से ऑर्डर देते हुए सरकार की याचिका ही खारिज कर दी है। शिक्षक नेताओ ने सूबे की योगी आदित्यनाथ जी की सरकार का ध्यान आकृष्ट कर विना किसी भेद भाव के २००० तक के नियुक्त सभी शेष तदर्थ शिक्षकों को नियमित कर उन्हें सभी परि नामी लाभ प्रदान करने की पुर जोर मांग की है।
