
- योगी सरकार ने सहायता प्राप्त अशासकीय महाविद्यालयों में कार्यरत मृतक शिक्षकों के परिजनों को दी बड़ी राहत
- सेवाकाल में निधन पर परिजनों को आर्थिक सहायता, शासनादेश जारी
- विकल्प न भरने या विकल्प अवधि से पहले निधन होने वालों को मिलेगा लाभ
लखनऊ, 26 मई, campussamachar.com, । प्रदेश की योगी सरकार ( Uttar Pradesh Chief Minister Yogi Adityanath) ने सहायता प्राप्त अशासकीय महाविद्यालयों में कार्यरत मृतक शिक्षकों के परिजनों को बड़ी राहत दी है। सेवाकाल में मृत्यु होने की स्थिति में शिक्षकों के परिजनों को मृत्यु उपदान (डेथ ग्रेच्युटी) का भुगतान शासनादेश के अनुरूप किया जाएगा। इस संबंध में शासन ने 24.12.1983, 30.03.1983 और 04.02.2004 के शासनादेशों के सन्दर्भ में नवीन आदेश जारी कर दिए हैं।
योगी सरकार का यह कदम न केवल मृतक शिक्षकों के परिजनों को आर्थिक सहायता प्रदान करेगा, बल्कि राज्य सरकार की मानवीय और सहयोगी सोच का भी परिचायक है।
प्रदेश के उच्च शिक्षा मंत्री योगेन्द्र उपाध्याय ने बताया कि प्रदेश के सहायता प्राप्त अशासकीय महाविद्यालयों में कार्यरत ऐसे शिक्षक, जिन्होंने सेवानिवृत्ति का विकल्प नहीं दिया था और जिनकी मृत्यु 58 वर्ष की आयु से पूर्व हो गई, तथा वे शिक्षक जिन्होंने 60 वर्ष पर सेवानिवृत्ति का विकल्प भरा था, परंतु विकल्प परिवर्तन की निर्धारित अवधि से पहले ही उनका निधन हो गया, इन सभी मामलों में उनके परिजनों को मृत्यु उपदान (डेथ ग्रेच्युटी) दिए जाने का निर्णय लिया गया है।
इसी प्रकार, 03 फरवरी 2004 के पश्चात के उन मामलों में भी, जहां शिक्षकों ने सेवानिवृत्ति का विकल्प नहीं चुना और 60 वर्ष की आयु से पहले निधन हो गया,
तथा ऐसे शिक्षक जिन्होंने 62 वर्ष पर सेवानिवृत्ति का विकल्प भरा, मगर विकल्प परिवर्तन की निर्धारित अवधि से पहले ही उनका निधन हुआ, उनके परिजनों को भी मृत्यु उपदान (डेथ ग्रेच्युटी) का भुगतान किया जाएगा।
उच्च शिक्षा मंत्री ने कहा कि यह निर्णय शासन की संवेदनशीलता और जनकल्याणकारी दृष्टिकोण को दर्शाता है। उन्होंने बताया कि निदेशक, उच्च शिक्षा को इस आदेश के अनुपालन हेतु आवश्यक कार्यवाही सुनिश्चित करने के निर्देश दे दिए गए हैं। जाने का निर्णय लिया गया है।
लुआक्टा दिया धन्यवाद ज्ञापित एवं राज्य सरकार का आभार
उधर लुआक्टा के अध्यक्ष प्रोफ़ेसर मनोज पाण्डेय ने बताया कि लम्बे समय से लुआक्टा द्वारा किसी भी शिक्षक की सेवा काल में मृत्यु हो जाने पर डेथ-कम-ग्रेच्युटी की मांग की जा रही थी, एवं प्रत्येक आंदोलन मे इस मांग को जोरदार तरीके से उठाया जाता था। सूच्य है कि करोना काल में बहुत से साथियो का असमय निधन हो गया था, लेकिन यदि शिक्षक साथी द्वारा 60 वर्ष के विकल्प का चयन नही किया गया है तो ग्रेच्युटी का लाभ प्राप्त नही होता था अर्थात ऐसे साथी जिन्होंने अपने सेवा काल में सेवानिवृति हेतु 60 वर्ष का विकल्प दिया है तो उसकी मृत्यु हो जाने पर ग्रेच्युटी का लाभ मिलता था, लेकिन जिन साथियो द्वारा सेवा काल में विकल्प नहीं दिया गया है और उनकी यदि मृत्यु हो गयी तो उन्हे ग्रेच्युटी का लाभ प्राप्त नही होता था। आज दिनांक 24 अप्रैल 25 को परिचालन विधि द्वारा कैबिनेट से सभी शिक्षकों को सेवा काल मे निधन हो जाने पर ग्रेच्युटी का लाभ दिये जाने का निर्णय लिया गया है,अब सभी साथियो को सेवानिवृति से पूर्व मृत्यु हो जाने पर ग्रेच्युटी का लाभ प्राप्त होगा। लुआक्टा अपने सभी साथियो को इस मांग के लिए संघर्ष करने पर धन्यवाद ज्ञापित करती है, एवं राज्य सरकार का आभार प्रकट करती है, एवं सरकार से मांग करती है कि 62 वर्ष पर सेवानिवृत होने के पश्चात सभी साथियो को ग्रेच्युटी का लाभ प्रदान किया जाय।
