
- पच्चीस वर्षों से भी अधिक समय से सेवारत तेईस सौ तदर्थ शिक्षकों ने लगायी मुख्य मंत्री से गुहार- डॉ जितेंद्र सिंह पटेल
- शिक्षा अधिकारियों की गलतियों का खामिया जा भुगत रहे तदर्थ शिक्षक – ओम प्रकाश त्रिपाठी
लखनऊ 03 दिसम्बर , प्रदेश के सहाय ता प्राप्त गैर सरकारी माध्य मिक शिक्षण संस्थानों में विगत तीस दिसम्बर २००० तक तत्समय लागू नियुक्ति प्रक्रिया के तहत नियुक्त किये गए तदर्थ शिक्षकों को पिछले दस महीने से वेतन भुगतान अवरुद्ध कर उनका उत्पीड़न किये जाने पर पांडे गुट ने अत्यंत गहरा आक्रोश व्यक्त करते हुए इस अति संवेदनशील मामले में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी एवं अपर मुख्य सचिव पार्थ सारथी सेन शर्मा जी का ध्यान आकर्षित कर हस्तक्षेप किये जाने की मांग की है।

शिक्षक नेताओ ने कहा कि शिक्षा विभाग के सक्षम अधिकारियों द्वारा सरकार को गुमराह कर शिक्षकों का उत्पीड़न किया जा रहा है। गौरतलब हो कि ये सभी शिक्षक शिक्षि काएं तत् समय लागू नियुक्ति प्रक्रिया के अंतर्गत कठि नाई निवारण अधि नियमित व्यवस्था में नियुक्त किये गए थे। वे अट्ठाइस से तीस वर्ष तक सेवा करने मे अपना योगदा न किया। अब उन्हें सेवा से हटाया जाना जहाँ एक ओर अधिनि यम के प्रावधानों के सर्वथा विपरीत तो है ही मानवी य संवेद नाओं की भी परा काष्ठा है।
सूबे की योगी आदित्यनाथ जी की सरकार जहाँ एक ओर प्रदेश में नये नये रोज गार की दिशा में प्रयास रत है और रोजगार मेले तक आयोजित कार्यक्रम कर लोगो को रोजगार देने मै जुटी है वही पर माध्य मिक शिक्षा विभाग द्वारा एक लंबी उम्र में इतनी लंबी सेवा करने के बाद भी सेवा से हटाये जाने की बात सोचना भी सरकार के खिलाफ छवि धूमिल करने की साजिस सी प्रतीत होती है। यह आज शिक्षा जगत के सामने सबसे बड़ी चुनौती है।
शिक्षक नेताओ ने आज इस मामले मे फिर से मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी का ध्यान आकृष्ट किया है और उनसे सभी विगत ढाई दशक वर्षो से सेवारत तदर्थ शिक्षकों को उ प्र माध्य मिक शिक्षा सेवा आयोग अधिनि यम की धारा 33- छ के अंतर्गत निर्धरित समय सीम तीस दिसंबर 2000 तक की सेवा को विनियमि त कर उनके छ महीने से रोके गए वेतन तत्काल भुगतान किये जाने की पुरजोर मांग की है। ऐसा किये जाने से प्रदेश की माध्य मिक शिक्षा जगत से हमेशा के लिए तदर्थ वाद समाप्त भी हो सकेगा।
