
- बाल शिक्षा अधिकार अधिनियम 2009 को शिक्षकों की नियुक्तियों के लिए निर्धारित शैक्षिक योग्यता उसके पूर्व की नियुक्तियों पर लागू किया जाना घोर अन्याय डॉ जितेंद्र सिंह पटेल
- सुप्रीम कोर्ट के निर्णय से प्रभावित पूर्व निर्धारित शैक्षिक योग्यता से नियुक्त इंटर्मीडिये ट पास शिक्षक चाह कर भी नहीं कर सकते टी ई टी, उसके लिए पहले उन्हें करना होगा ग्रेजुएशन-ओम प्रकाश त्रिपाठी
लखनऊ, 9 सितंबर। उ प्र माध्यमिक शिक्षक संघ ( पांडेय गुट ) ने देश के बेसिक शिक्षकों के संबंध में सुप्रीम कोर्ट के विगत दिनों के निर्णय से प्रभावित होने वाले के लिए टी ई टी की अनिवार्य ता पर भारत व राज्य सरकारों का ध्यान आकर्षित किया है और हस्तक्षेप करने की माँग की है।
संघ के प्रादेशिक अध्यक्ष डॉ जितेंद्र सिंह पटेल एवं सगठन प्रवक्ता ओम प्रकाश त्रिपाठी ने कहा कि इस निर्णय से आने वाले आगामी दो वर्षो में लाखों शिक्षक शिक्षिकाओं को अपनी आजीविका से हाँथ धोना पड़ेगा। यदि समय रहते अपना पक्ष कोर्ट के समक्ष प्रस्तुत नहीं किया गया।
बाल शिक्षा अधिकार अधिनियम 2009
शिक्षक नेताओ ने कहा कि बेसिक शिक्षकों के लिए पच्चीस अगस्त 2010 को बाल शिक्षा अधिकार अधिनियम,,, 2009 विधिवत कानून के अस्तित्व में ही आया। इसके तहत ही बेसिक शिक्षकों की नियुक्ति के लिए टी ई टी की अनिवार्य ता के साथ शैक्षिक योग्यता को ग्रेजुएट होने तथा शिक्षक पात्रता परीक्षा उत्तीर्ण होना निर्धारित किया गया। इसके पूर्व इंटर तक की योग्यता निर्धारित थी और बेसिक शिक्षा से संबंधित प्रशिक्षण होना जरूरी था। इस प्रकार जब वर्तमान शैक्षिक योग्यता तत् समय थी ही नहीं निर्धारित योग्यता के आधार पर देश में लाखों शिक्षकों की नियुक्तियां की गयी और वे सभी शिक्षक शिक्षिका यें कार्य कर रहें हैं।
बाद की नियुक्तियों पर ही लागू किया जाना विधि सम्मत
इस प्रकार जिन शिक्षकों की नियुक्तियां बाल शिक्षा अधिकार अधिनियम 2009 को अमलीजामा पहनाने के पूर्व की निर्धारित योग्यता के मुताबिक हुयी है उनपर यह निर्णय लागू किया जाना उनके साथ अत्यंत ही घोर अन्याय के साथ साथ मानवीय संवेदना ओ के सर्वथा विपरीत है। संगठन का स्पष्ट अभिमत है कि माननीय सुप्रीम कोर्ट का जारी आदेश बाल शिक्षा अधिकार अधिनियम 2009 के द्वारा लागू शैक्षिक योग्यता उसके बाद की नियुक्तियों पर ही लागू किया जाना विधि सम्मत है।
शिक्षक नेताओ ने भारत सरकार के साथ साथ राज्य की सरकारों का शिक्षकों की रोजी रोटी से जुड़े इस अति संवेदन शील मामले मे मानं नीय सर्वोच्च न्यायालय के समक्ष शिक्षकों की वैधानिक स्थिति को स्पष्ट करते हुए शिक्षकों को न्याय दिलाने में राहत प्रदान करें।
