पांडेय गुट ने की मुख्य मंत्री योगी आदित्यनाथ जी से इन सवेदन शील मामलों में तत्काल हस्तक्षेप की मांग- पद के दायित्व के निर्वहन के बाद विगत तीन सालों से अथवा उसके बाद के भी वर्षो का पद का वेतन भुगतान न होंना घोर अन्याय : डॉ जितेंद्र सिंह पटेल
- पद के दायित्व के सापेक्ष संस्था प्रधानों का वेतन न दिया जाना समान कार्य के लिए समान वेतन के सिद्धांन्तों का खुला उल्लंघन: ओम प्रकाश त्रिपाठी
लखनऊ , 12 सितम्बर। प्रदेश के सहायता प्राप्त अशास् की य कालेजों के कार्यवाहक संस्था प्रधानों को नियमित संस्था प्रधानों के समान ही कार्य एवं पद के सारे दायित्वों का निर्वहन कराये जाने के बाद भी पद का वेतन शैक्षिक सत्र २०२३ से नहीं हो रहा है। इस प्रकार बिना पद के वेतन प्राप्त किये उन्हें संस्था प्रधान के पद का समस्त कार्य कराये जाने पर मजबूर किया जा रहा है। यह उनके साथ घोर अन्याय ही नहीं नैसर्गिक न्याय के भी सर्वथा विपरीत है। इस अति संवेदन शील मामले में उ प्र माध्य मिक शिक्षक संघ पांडेय गुट ने गहरा आक्रोश व्यक्त किया है।

संघ के प्रादेशिक अध्यक्ष डॉ जितेंद्र सिंह पटेल एवं उपा ध्यक्ष व संगठन प्रवक्ता ओंम प्रकाश त्रिपाठी ने आज यहाँ जारी अपनी एक प्रेस विज्ञप्ति में बताया कि वर्ष २०२३ मे शिक्षा सेवा आयोग गठन के बाद से ही इस अति गंभीर समस्या से संस्था प्रधानों को भुगतना पड़ रहा है। इस से पहले वर्ष १९८२ से उ प्र माध्य मिक शिक्षा सेवा आयोग की धारा १८ क के अंतर्गत तदर्थ पदोन्नति कर पद का अनुमोदन एवं वेतन भुगतान किया जा ता रहा है। अब इस मामले पर बार बार सरकार एवं शासन का ध्यान आकर्षित करने के बाद भी संस्था प्रधानों का शोषण किया जा रहा है, जो उनके साथ घोर अन्याय है।
शिक्षक नेताओ ने बताया कि शासन द्वारा अभी तक आयोग की नियमावाली तक न बनाया जाना अपंनी ही व्यवस्था का खुला मखौल उड़ाना नहीं तो और क्या है। नये आयोग में केवल भर्ती प्रक्रिया के अलावा अन्य शिक्षकों से जुड़े मुद्दे चाहे पदोंन्नतियो का हो अथवा सेवा सुरक्षा का हो या संस्था प्रधानों के वेतन भुगतान का हो सारे मामलों में कोई भी कार्य वही न होने से सूबे के जहाँ एक ओर लगभग दो हजार संस्था प्रधानों को विना वेतन के पद के दायित्व का निर्वहन करना पड़ रहा है वही सेवा सुरक्षा के बिना शिक्षकों को उत्पीड़न का शिकार होना पड़ रहा है। शिक्षक नेताओ ने इस मामले में मुख्यमंत्री जी से शिक्षकों की पदों न्नतिया, संस्था प्रधानों को पद का वेतन भुगतान एवं सेवा सुरक्षा के प्रविधा नों को पूर्व व् त धारा १२,१८ क तथा धारा २१ को शिक्षा सेवा आयोग मे यथावत प्रविधा नित कराये जाने की मांग की है।
