
- उत्तर प्रदेश महिला शिक्षक संघ ने एक ज्ञापन महामहिम राज्यपाल, मुख्यमंत्री एवं बेसिक शिक्षा मंत्री को प्रेषित किया है.
- बच्चों को इन खतरों से बचाने और उन्हें सशक्त बनाने के लिए प्राथमिक स्तर से ही साइबर सुरक्षा और साइबर अपराधों के प्रति जागरूकता प्रदान करना अनिवार्य हो गया है।
लखनऊ, 12 अक्तूबर , उत्तर प्रदेश महिला शिक्षक संघ ने बेसिक स्कूलों के पाठ्यक्रम में मोबाइल से जुड़े साइबर अपराध एवं सुरक्षा संबंधी विषय को शामिल करने के संदर्भ में एक ज्ञापन महामहिम राज्यपाल, मुख्यमंत्री एवं बेसिक शिक्षा मंत्री को प्रेषित किया है. ज्ञापन में प्राथमिक स्तर की शिक्षा में साइबर अपराध और सुरक्षा जागरूकता को अनिवार्य रूप से शामिल करने करने हेतु आवश्यक कार्रवाई करने का अनुरोध किया गया है .
वर्तमान युग डिजिटल क्रांति का युग है, जहां तकनीकी प्रगति और मोबाइल प्रौद्योगिकी ने जीवन को अभूतपूर्व रूप से सुगम और सशक्त बनाया है। किंतु, इस प्रगति के समानांतर साइबर अपराधों का खतरा भी उत्तरोत्तर बढ़ रहा है। विशेष रूप से, सोशल मीडिया, ऑनलाइन गेमिंग और अन्य डिजिटल मंचों पर असामाजिक तत्व सक्रिय हैं, जो मासूम बच्चों को अपना निशाना बनाते हैं। ये तत्व बच्चों को ऑनलाइन जाल में फंसाकर आर्थिक ठगी, ब्लैकमेलिंग, निजी तस्वीरों का दुरुपयोग और मानसिक उत्पीड़न जैसे जघन्य अपराधों को अंजाम दे रहे हैं। परिणामस्वरूप, बच्चे अवसाद, तनाव और यहाँ तक कि आत्महत्या जैसे गंभीर कदमों की ओर अग्रसर हो रहे हैं। यह स्थिति अत्यंत चिंताजनक है और समाज के भविष्य के लिए गंभीर खतरा उत्पन्न करती है।
बच्चों को इन खतरों से बचाने और उन्हें सशक्त बनाने के लिए प्राथमिक स्तर से ही साइबर सुरक्षा और साइबर अपराधों के प्रति जागरूकता प्रदान करना अनिवार्य हो गया है। यदि बेसिक शिक्षा के पाठ्यक्रम में साइबर सुरक्षा से संबंधित विषयों को रोचक, सरल और आयु-अनुकूल तरीके से शामिल किया जाए, तो बच्चे इन खतरों को समझकर स्वयं को सुरक्षित रखने में सक्षम होंगे। यह कदम न केवल उनकी व्यक्तिगत सुरक्षा सुनिश्चित करेगा, बल्कि एक जागरूक, सशक्त और डिजिटल रूप से साक्षर पीढ़ी के निर्माण में भी महत्वपूर्ण योगदान देगा।
उत्तर प्रदेश महिला शिक्षक संघ ने निवेदन किया है कि प्रदेश के सभी स्कूलों में बेसिक शिक्षा पाठ्यक्रम में साइबर अपराध और साइबर सुरक्षा से संबंधित शिक्षा को अनिवार्य रूप से शामिल किया जाए। इस दिशा में त्वरित और प्रभावी कदम उठाने से न केवल बच्चों का भविष्य सुरक्षित होगा, बल्कि यह समाज में डिजिटल साक्षरता और नैतिकता को बढ़ावा देने में भी मील का पत्थर साबित होगा।
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