प्रदर्शन का नेतृत्व कर रहे उत्तर प्रदेश प्राथमिक शिक्षक संघ के प्रांतीय उपाध्यक्ष और लखनऊ जिला अध्यक्ष सुधांशु मोहन ने कहा कि यह विरोध केवल स्कूलों के विलय तक सीमित नहीं है।
लखनऊ , 08 जुलाई , उत्तर प्रदेश में प्राथमिक स्कूलों के विलय के खिलाफ शिक्षकों का विरोध तेज हो गया है। मंगलवार को लखनऊ में पूरे प्रदेश से बड़ी संख्या में शिक्षक एकत्र हुए और शिक्षा भवन पर जोरदार प्रदर्शन किया। ये प्रदर्शन उत्तर प्रदेश प्राथमिक शिक्षक संघ के बैनर तले आयोजित किया गया, जिसमें परिषदीय स्कूलों के हजारों शिक्षकों ने हिस्सा लिया। इंकलाब जिंदाबाद और संविलयन वापस लो जैसे नारों से राजधानी की सड़कों पर गूंज सुनाई दी। प्रदर्शन कर रहे शिक्षकों ने स्कूलों के मर्जर के साथ-साथ सरकार की नीतियों और न्यायिक प्रक्रिया पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि विलय से जुड़े मामलों की सुनवाई उन जजों द्वारा न की जाए, जिनके घर से नोटों के बोरे मिले हों। हमें निष्पक्ष और निर्भीक न्याय चाहिए।
10 सूत्री मांगों के साथ उठी मर्जर के खिलाफ आवाज
Merger Of Schools With Low Student Numbers : प्रदर्शन का नेतृत्व कर रहे उत्तर प्रदेश प्राथमिक शिक्षक संघ के प्रांतीय उपाध्यक्ष और लखनऊ जिला अध्यक्ष सुधांशु मोहन ने कहा कि यह विरोध केवल स्कूलों के विलय तक सीमित नहीं है। शिक्षक कुल 10 सूत्री मांगों को लेकर आंदोलन कर रहे हैं, जिसमें संविलियन नीति की वापसी, पद समाप्त करने की प्रक्रिया को रोकना और शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता लाना प्रमुख मांगें हैं। उन्होंने कहा कि जब विद्यालयों को मिलाया गया, तब हेडमास्टर के पद खत्म कर दिए गए। अब सहायक अध्यापकों के पद भी धीरे-धीरे समाप्त किए जा रहे हैं। यह शिक्षा व्यवस्था को कमजोर करने की साजिश है। हाई कोर्ट का निर्णय सरकार के दबाव में लिया गया है।
NEP लागू करने पर भी उठे सवाल
संघ के जिला मंत्री वीरेंद्र सिंह ने कहा कि सरकार स्कूलों के विलय के पीछे नई शिक्षा नीति (NEP) का हवाला दे रही है। उन्होंने पूछा, क्या पूरे देश में NEP लागू हो चुका है? जब बाकी जगहों पर इसे अभी लागू नहीं किया गया, तो बेसिक शिक्षा में जल्दबाजी क्यों?
बच्चों और अभिभावकों में भी नाराजगी
उत्तर प्रदेश शिक्षक संघ के लखनऊ नगर अध्यक्ष प्रदीप सिंह ने सरकार की मर्जर नीति को अनैतिक करार दिया। उन्होंने कहा कि सरकार ग्रामीण बच्चों को स्कूल से दूर कर रही है। उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि रामखेड़ा गांव के स्कूल को चिल्लावन में मर्ज कर दिया गया है, जहां ढाई किलोमीटर की दूरी है। बच्चे वहां नहीं जा रहे हैं और अब अभिभावक भी धरने में शामिल हो गए हैं। प्रदर्शनकारियों ने चेतावनी दी कि अगर सरकार ने उनकी मांगें नहीं मानीं, तो यह आंदोलन और तेज होगा और पूरे प्रदेश में व्यापक असर डालेगा। शिक्षक नेताओं ने दोहराया कि वे किसी भी हालत में बच्चों और शिक्षा के अधिकार से समझौता नहीं करेंगे।
