लखनऊ.उत्तर प्रदेश में अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव के मद्देनजर शिक्षकों-कर्मचारियों के संगठन पुरानी पेंशन की मांग को लेकर आंदोलित होने लगे हैं। संगठन के पदाधिकारी अब अपनी मांग को विभिन्न राजनीतिक दलों के चुनावी घोषणापत्र में शामिल कराने के लिए दबाव बना रहे हैं। वे अपील भी कर रहे हैं और अपनी ताकत का अंदाज भी बता रहे हैं। संगठन के मीडिया प्रभारी डॉ. राजेश कुमार का कहना है कि आने वाले दिनों में इस मुहिम को और तेज किया जाएगा। अटेवा/ एनएमओपीएस में देश के राजनीतिक दलों भाजपा, कांग्रेस, सपा, बसपा,आप ,टीमसी सहित तमाम राजनीतिक दलों को रजिस्टर्ड पत्र भेज करके पुरानी पेंशन व निजीकरण पर अपना मत स्पष्ट करने की बात की गयी । भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा व प्रदेश अध्यक्ष स्वतंत्र देव सिंह से पुरानी पेंशन बहाल करने की मांग जिसमें मुख्यमंत्री योगी आदित्य नाथ के पुराने पत्र का हवाला दिया गया है जब सांसद के रूप में तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को पुरानी पेन्शन बहाली के लिए पत्र लिखा था । संगठन की ओर से जिन राजनीतिक दलों को पत्र भेजे गए हैं, उनमें मुख्य रूप से कांग्रेस की अध्यक्षा सोनिया गांधी, प्रदेश अध्यक्ष अजय कुमार लल्लू, समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव, प्रदेश अध्यक्ष नरेश उत्तम, बसपा की राष्ट्रीय अध्यक्ष मायावती, आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अरविंद केजरीवाल, यूपी प्रभारी संजय सिंह, तृणमूल कांग्रेस की राष्ट्रीय अध्यक्ष मता बनर्जी, प्रदेश अध्यक्ष नीरज राय, प्रसपा के शिवपाल सिंह यादव, सुभासपा के ओमप्रकाश राजभर व वामदलों सहित विभिन्न राजनीतिक दलों को डाक से रजिस्टर्ड पत्र भेजे गये ।
इस संबंध में अटेवा/ एनएमओपीएस के अध्यक्ष विजय कुमार बन्धु ने बताया अपने पत्र में लिखा कि उत्तर प्रदेश में 13.37 लाख व देश भर में 70 लाख से ज्यादा शिक्षक कर्मी एनपीएस की शोषणकारी व्यवस्था के अन्तर्गत आते हैं। और यह एक बड़ी संख्या है आगामी जिन राज्यों में विधानसभा चुनाव हैं यह चुनाव को बहुत कुछ प्रभावित करेगा। और यदि सरकारों ने अनसुना किया उसका परिणाम भी भुगतना पड़ेगा। साथ ही विपक्षी दलों के उनके नेताओं से भी अपील की कि पुरानी पेंशन बहाली को अपने मुख्य एजेण्डें मे रखें और शिक्षकों कर्मचारियों की लड़ाई को लड़े । क्योंकि पुरानी पेंशन आगामी विधानसभा चुनाव में टर्निंग प्वाइंट साबित होगा।
अटेवा के प्रदेश सलाहकार आंनदवीर सिंह ने बताया कि उत्तर प्रदेश में 13.37 लाख विभिन्न विभागों के एनपीएस शिक्षक कर्मी का 10% व सरकार का पैसे प्राइवेट कंपनियां प्रति वर्ष 12835.2 करोड़ ले जा रहे हैं यदि सरकार इस पैसे को अपने पास लेकर के कार्य करती तो सरकार और प्रदेश दोनों फायदे में रहता। सरकार ने कभी भी इस तरह के आंकड़ों पर गंभीरता नहीं दिखाई । यदि एक बार इस पर मंथन कर ले तो एनपीएस को खुद व खुद वापस करने को मजबूर होंगे ।
अटेवा के प्रदेश मीडिया प्रभारी डॉ राजेश कुमार बताया कि 13.37 लाख शिक्षक- कर्मचारियो को 5 से गुणा करे तो 80 लाख से ज्यादा लोग इससे सीधे प्रभावित हैं जो आगामी विधानसभा चुनाव में निर्णायक भूमिका निभाएंगे।
