
लखनऊ. अंग्रेजी भाषा कार देती है तो हिंदी हमें संस्कार देती है। यह महत्वपूर्ण विचार लखनऊ विश्वविद्यालय से अवकाश प्राप्त हिन्दी विभागाध्यक्ष प्रो सूर्य प्रसाद दीक्षित ने व्यक्त किए। हिंदी के प्रख्यात प्रोफेसर दीक्षित ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती भाषा विश्वविद्यालय लखनऊ में हिंदी दिवस के उद्घाटन समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में बोल रहे थे। उन्होंने कहा कि कोई भी भाषा केवल साहित्य बनकर नहीं रह सकती उसको जीविका से जोडऩे की कोशिश होगी तभी वह टिकेगी।
समारोह को संबोधित करते हुए विशिष्ट अतिथि नालंदा विश्वविद्यालय के संस्कृत विभागाध्यक्ष प्रोफेसर विजय कुमार कर्ण ने कहा कि हिंदी का प्रयोग बढ़ा है, यह सुखद है परन्तु नई पीढ़ी को इसके ज्ञान देने के लिए अभिभावकों और शिक्षकों को बहुत कुछ करने की जरूरत है। हमें इसके गुणात्मक प्रसार पर भी ध्यान देने की आवश्यकता है। प्रो कर्ण ने कहा कि भाषायी आत्मनिर्भरता देश प्रेम की महत्वपूर्ण कड़ी है।
कुलपति प्रोफेसर शुक्ल ने कहा-
समारोह को संबोधित करते हुए विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो अनिल शुक्ला ने हिंदी की व्यापकता और एवं सार्थकता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि भारत की सभी भाषाएं आपस में बहनों की तरह है। कार्यक्रम का संचालन डा रुचिता चौधरी ने संयोजन डा जहां आरा ज़ैदी ने किया। इस अवसर पर विश्वविद्यालय के सभी शिक्षक गण एवं सैकड़ों विद्यार्थियों ने प्रतिभाग किया। कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्ज्वलित कर तथा समापन राष्ट्र गान से हुआ।


