

- कार्यक्रम की मुख्य अतिथि वक्ता, अंजली सिंह, प्रोग्राम ऑफिसर, मिलान फाउंडेशन ने कहा कि, बालिकाओं के साथ भेदभाव कई स्तरो पर होता है। उन्हें भरपूर पोषण तथा संतुलित आहार समान रूप से न मिलना एक प्राथमिक मुद्दा है। अधिकांश परिवारों में बालिकाएं, बालकों की तुलना में ज्यादा कुपोषित है।
- काव्या श्रीवास्तव, एक्जीक्यूटिव, मिलान फाउंडेशन, ने छात्राओं से संवाद करते हुए बताया कि, किस तरह से महिला रोल मॉडल, बालिकाओं में जागरूकता पैदा कर सकती हैं।
- कार्यक्रम का संचालन रुना एवं शुभम ने किया। सत्र के समापन पर कार्यक्रम के संयोजक, डॉ अंशुमाली शर्मा ने सभी के प्रति आभार व्यक्त किया।
लखनऊ, 9 अक्टूबर , campussamachar.com, श्री जय नारायण मिश्र महाविद्यालय, लखनऊ ( Shri Jai Narain Misra Post Graduate College) में आज “विश्व बालिका दिवस” की पूर्व संध्या पर छात्र-छात्राओं के लिए ब्रेन स्टॉर्मिंग सत्र का आयोजन मिलान फाउंडेशन के सहयोग से किया गया। सत्र मे “जेंडर बेस्ड इनइक्वेलिटी एण्ड डिस्क्रिमिनेशन” विषय पर विशेषज्ञो ने अपनी बात रखते हुए छात्र-छात्राओं के साथ संवाद किया।
ब्रेन स्टॉर्मिंग सत्र का का उद्घाटन, महाविद्यालय ( Shri Jai Narain Misra Post Graduate College) प्राचार्य, प्रो विनोद चंद्रा ने किया। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि, लिंग आधारित असमानता और भेदभाव के साथ कोई भी समाज परिपक्वता एवं संपूर्णता के साथ विकास नहीं कर सकता। किंतु यह बहुत अच्छी बात है कि छात्राओं और बालिकाओं में पहले से अधिक जागरूकता बढ़ी है। अपने प्रति हो रहे अत्याचारों को लेकर के बालिकाएं अब पहले से ज्यादा सतर्क हैं। सजग रूप से वह इन प्रतिक्रियाओं का विरोध भी करती है। हालांकि बालिकाओं में जागरूकता का अधिक विस्तार होना अभी बाकी है, जिस पर हम सभी को मिलकर काम करने की जरूरत है।
कार्यक्रम की मुख्य अतिथि वक्ता, अंजली सिंह, प्रोग्राम ऑफिसर, मिलान फाउंडेशन ने कहा कि, बालिकाओं के साथ भेदभाव कई स्तरो पर होता है। उन्हें भरपूर पोषण तथा संतुलित आहार समान रूप से न मिलना एक प्राथमिक मुद्दा है। अधिकांश परिवारों में बालिकाएं, बालकों की तुलना में ज्यादा कुपोषित है। उन्होंने बालक व बालिका चाहे वह गांव के हो या शहर के, दोनों के पोषण और स्वास्थ्य में समानता लाने पर जोर दिया। इस अवसर पर विशिष्ट अतिथि वक्ता, आलोक पांडेय, कार्यक्रम अधिकारी, मिलान फाउंडेशन ने कहा कि, लिंग आधारित भेदभाव हमारे समाज में बच्चों के बचपन से ही आरंभ हो जाते है। यह भेदभाव आर्थिक, सामाजिक एवं सांस्कृतिक वातावरण के कारण भी होता है। उन्होंने उदाहरण दिया कि हममें से ज्यादा लोग बच्चियों को खेलने के लिए किचन सेट या गुड़िया देते हैं। वहीं बालकों को बंदूक और मोटर कार जैसे खिलौने ला कर देते हैं। इस प्रकार हम बच्चों के कोमल मन में लिंग भेद का संकेत आरोपित कर देते हैं। उन्होंने कहा कि, लिंग आधारित भेदभाव और असमानता का विरोध करें।
सत्र मे काव्या श्रीवास्तव, एक्जीक्यूटिव, मिलान फाउंडेशन, ने छात्राओं से संवाद करते हुए बताया कि, किस तरह से महिला रोल मॉडल, बालिकाओं में जागरूकता पैदा कर सकती हैं। उन्होंने छात्राओं से उनके रोल मॉडल पूछे। जवाब में छात्राओं ने इंदिरा गांधी, किरण बेदी और रानी लक्ष्मीबाई के नाम लिए। कुछ बालिकाओं ने कहा कि कई प्रिय शिक्षक या शिक्षिकाएं भी उनके रोल मॉडल होते हैं। और वे उन्हीं की तरह इंडीपेंडेंट बनना चाहती है। उन्होंने बताया कि, महिलाओं और बालिकाओं को स्कूल, कॉलेज और ऑफिस आने जाने और काम करने में अनेकों लिंग आधारित भेदभाव का सामना करना पड़ता है। उन्होंने कहा कि भेदभाव से जनित परेशानियां उन्हें बुरी तरह से हतोत्साहित करती हैं, जो कि ठीक नहीं है।

kkc news today : महिलाओं के साथ और भी कई व्यावहारिक समस्याएं उन्हें कामकाजी बनने में बाधा उत्पन्न करती है, जैसे घर के लोगों से अनुमति न मिलना, उन पर अविश्वास व्यक्त करना, बच्चों को कौन देखेगा आदि, इस तरह की समस्याएं उनके वास्तविक विकास को अवरुद्ध करती हैं। छात्र-छात्राओं से चर्चा के दौरान छात्रों ने भी अपने विचार व्यक्त किये। उन्होंने कहा कि, बालिकाओं के संरक्षण के लिए कानून तो हमारे बहुत सारे बने हैं, किंतु उनका इंप्लीमेंटेशन कहीं ने कही अप्रभावी रह जाता है और समस्या जहां की तहाॅ बनी रहती है। सत्र के अंत में विशिष्ट वक्ता, प्रो रश्मि सोनी ने छात्र-छात्राओं को लाइफ स्किल्स के टिप्स दिए। उन्होंने कहा कि, हमें अपनी सोच के साथ-साथ दूसरों की सोच को भी समझना और उसका सही अर्थ लगाने की क्षमता होनी चाहिए।
Shri Jai Narain Misra Post Graduate College : उन्होंने कहा कि, हमें पता होना चाहिए कि हमें अपने जीवन में अब क्या नहीं करना है और क्या आरंभ करना है। और साथ ही साथ यह भी पता होना चाहिए कि हमें अपने जीवन में क्या जारी रखना चाहिए। उन्होंने कहा कि, आज लोग वास्तविक दुनिया से दूर होते जा रहे हैं और वर्चुअल दुनिया की तरफ ज्यादा आकर्षित हो रहे हैं। खास करके युवा वर्ग में यह रुझान ज्यादा है। हमें यह बात अच्छी तरह से समझनी होगी कि हमारे वास्तविक जीवन की खुशियां वर्चुअल जीवन में नहीं मिल सकती। उन्होंने कहा कि आज महिलाओं की स्थिति में सुधार लाने के लिए अपने अंदर झांकने की जरूरत है। ईश्वर ने हमें विवेक दिया है और हमें इस विवेक को ही अपना गुरु बनाना होगा।
कार्यक्रम के अंत में गर्ल आइकॉन प्रिया राजपूत और ऋचा गुप्ता ने छात्र-छात्राओं को अपने अनुभव बताएं। उन्होंने बताया कि किस तरह से उन्होंने ऐसी बच्चियों को स्कूल से जोड़ा जिनके मां-बाप आर्थिक अभाव में उनसे दूसरों के घरों में झाड़ू पोछा करवाते थे और उनको स्कूल भेजने से कतराते थे। उन्होंने जोर दिया कि बालिकाओं के विकास के लिए उनकी शिक्षा और उचित समय पर ही उनका विवाह प्रभावकारी होता है।

latest lucknow college news, : कार्यक्रम का संचालन रुना एवं शुभम ने किया। सत्र के समापन पर कार्यक्रम के संयोजक, डॉ अंशुमाली शर्मा ने सभी के प्रति आभार व्यक्त किया। इस अवसर पर प्रो मनोज पांडेय, प्रो अनीता वाजपेई, प्रो शमामा मिर्जा, प्रो ब्रिजेश मिश्रा, डॉ अभिषेक सिंह डॉ सुनीता राठौर, डॉ विजय राज श्रीवास्तव, डॉ सन्निवेश मिश्रा, डॉ दिवाकर यादव, डॉ दिलीप कुमार, डॉ महेंद्र भैष्य, डॉ सना सिद्दीकी, एसके त्रिपाठी, कमल पांडेय सहित बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे।
