

लखनऊ , 07 फरवरी , campussamachar.com, श्री जय नारायन मिश्र महाविद्यालय ( Shri Jai Narain Misra Post Graduate College) मे आज विधि संकाय एवं उत्तर प्रदेश भाषा संस्थान, लखनऊ के संयुक्त तत्वावधान मे “हमारा संविधान–हमारा स्वभिमान” विषय पर राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन किया गया।
इस अवसर पर मुख्य अतिथि, पद्मश्री हृदय नारायण दीक्षित, पूर्व अध्यक्ष, विधान सभा, उत्तर प्रदे, ने दीप प्रज्ज्वलित कर संगोष्ठी का उद्घाटन किया। इस अवसर पर उन्होंने महाविद्यालय के छात्र- छात्राओ को संबोधित करते हुए कहा कि, हमारा संविधान एक श्रेष्ठतम संविधान है और हम सभी को अपने संविधान पर गर्व है। किसी भी राष्ट्र का संविधान उसका धारक होता है। इसके निर्माण में अनेक विद्वानों एवं मनीषियो ने अपना योगदान दिया है। आज संविधान के प्रति जन जागरुकता का प्रसार होना आवश्यक हो गया है, क्योकि संविधान के प्रति जैसी जारुकता होनी चाहिए, वैसी प्रतीत नही होती। हम मे से अधिकांश लोग संविधान को लेकर बड़ी बड़ी बाते तो करते हैं किंतु उसमे लिखी बहुत सारी बातो को या तो भूल जाते है या अनिभिज्ञ होते है। लेकिन यह सच है कि बड़े बड़े जिम्मेदार लोगो से भी संविधान की प्रक्रियागत त्रुटि हो जाती है।

उन्होंने एक उदाहरण भी दिया कि कैसे 1999 मे हुए संविधान संशोधन को उच्चतम न्यायालय द्वारा मान्यता नही मिली थी। उन्होंने बाबा साहब अंबेडकर जी की उस बात को भी दुहराया जिसमे उन्होंने कहा था कि संविधान मे मान्यता के साथ-साथ संवैधानिक नैतिकता भी होनी चाहिए। उन्होंने ने कहा कि समय एवं परिस्थितियों के अनुसार लोग संविधान से सहमत या असहमत हो सकते है, इसीलिए आवश्यकता पड़ने पर इसमें दो तिहाई बहुमत से संशोधन किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि, राजनितिक लाभ के लिए संविधान के प्रति भ्रम फैलाना उचित नहीं है। इसे कोई भी छू नही सकता। हमारा संविधान अजर अमर है। इसे कोई खतरा नही है। इस अवसर पर महाविद्यालय प्राचार्य प्रो विनोद चन्द्रा ने संगोष्ठी की अध्यक्षता करते हुए कहा कि, संविधान जन जन का प्रतिनिधित्व करता है तथा सबको समानता का अधिकार देता है।

इस अवसर पर विधि संकाय प्रभारी, प्रो मनोज पांडेय ने सभी अतिथियोे का स्वागत करते हुए कहा कि, संविधान से संवंधित विषय पर छात्र छात्राओ को व्यवहारिक जानकारी देने के लिए इस संगोष्ठी का आयोजन किया गया। उन्होंने कहा कि संविधान को लेकर अभी भी बहुत कुछ होना शेष है, जैसे कि संविधान के लागू होने के 75 वर्ष बीत जाने पर भी जन साधारण की भाषा- हिंदी, उच्चतम न्यायालय के कार्य प्रणाली का हिस्सा नहीं बन पायी है। इस अवसर पर संगोष्ठी का संचालन डा अतुल बाजपेयी द्वारा किया गया। संगोष्ठी के सफल समापन पर उप प्राचार्य, प्रो के के शुक्ला ने सभी के प्रति आभार व्यक्त किया।
इस अवसर पर विधि संकाय शिक्षक सन्निवेश मिश्रा, प्रो ताज मोहमद, प्रो संतोष सिंह, प्रो एससी हजेला, डा अंशुमाली शर्मा, प्रो पायल गुप्ता, प्रो प्रवीण कुमार, डा दिवाकर यादव, डा दिलीप कुमार, डा सुनीता राठौर, डा महेंद् वैश्य, डा विपिन यादव, डा प्रमोद यादव, डा सना सिद्दीकी, सीजी एन महाविद्यालय गोला, लखीमपुर प्राचार्य, प्रो पंकज सिंह, इस्लामिया महाविद्यालय प्राचार्य डा दिलशाद अहमद, डा गणेश यादव, डा विनय यादव, डा राजेंद्र चौरसिया, समाजवादी चिंतक, दीपक मिश्रा डी ए वी महाविद्यालय लखनऊ छात्र संघ पूर्व अध्यक्ष सुनील मिश्रा एवम मनोज राय सहित बड़ी संख्या में छात्र- छात्राएं उपस्थित रहे।
