

- आयोजन की गरिमा बढ़ाने हेतु ग्राम जलसों के सरपंच संजय करने एवं भूतपूर्व सरपंच सुरेश साहू , उपसरपंच श्री विकास वर्मा विशेष रूप से उपस्थित हुए। अधिकारियों द्वारा सभी स्टालों का सूक्ष्म निरीक्षण किया गया।
- सभी आगंतुकों ने उल्लास मेला का अवलोकन किया और इस पहल की भूरि-भूरि प्रशंसा की।
बिलासपुर , 26 जनवरी , जनपद प्राथमिक शाला जलसों, संकुल -पौसरा में गणतंत्र दिवस की 77वी वर्षगांठ एवं उल्लास मेला’ का भव्य और हर्षोल्लासपूर्ण आयोजन संपन्न हुआ। यह आयोजन शासन की मंशानुरूप नव-साक्षरों को शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ने और उनमें सीखने के प्रति उत्साह जागृत करने के उद्देश्य से किया गया था। मेले का मुख्य आकर्षण नव-साक्षरों द्वारा स्वयं के लिए लगाए गए विभिन्न स्टॉल थे, जिसमें उन्होंने अपनी दक्षता और कौशल का प्रदर्शन किया।

इस मेले में विभिन्न स्टॉल लगाए गए थे, जो मुख्य रूप से उपभोक्ता अधिकार, जीवन कौशल, भाषा ज्ञान और गणितीय अवधारणाओं पर आधारित थे। इन स्टालों के माध्यम से शिक्षा को व्यावहारिक रूप में प्रस्तुत किया गया। स्टालों के सफल संचालन में स्थानीय प्रेरकों और विद्यालय के छात्रों ने सक्रिय भूमिका निभाई, जिससे वातावरण अत्यंत उत्साहवर्धक रहा।
आयोजन की गरिमा बढ़ाने हेतु ग्राम जलसों के सरपंच संजय करने एवं भूतपूर्व सरपंच सुरेश साहू , उपसरपंच श्री विकास वर्मा विशेष रूप से उपस्थित हुए। अधिकारियों द्वारा सभी स्टालों का सूक्ष्म निरीक्षण किया गया। उन्होंने नव-साक्षरों के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि उल्लास मेला जैसे नवाचार शिक्षा को समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुँचाने का एक सशक्त माध्यम हैं। उन्होंने इस सफल आयोजन के लिए शाला परिवार को बधाई और उज्जवल भविष्य की शुभकामनाएँ प्रेषित कीं एवं सांस्कृतिक कार्यक्रम काभी आयोजन किया गया। सभी छात्र-छात्राओं ने बढ़-चढ़कर भाग लिया.

कार्यक्रम के समापन सत्र में विद्यालय के प्रधानपाठिका श्रीमती निशा अवस्थी ने उपस्थित सभी नव-साक्षरों, प्रेरकों और सम्मानित नागरिकों के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने अपने संबोधन में शिक्षा के महत्व पर प्रकाश डालते हुए सभी को निरंतर सीखने की प्रक्रिया से जुड़े रहने के लिए प्रेरित किया। कार्यक्रम के अंत में प्रेरकों को उनकी भविष्य की जिम्मेदारियाँ और दायित्व सौंपे गए। इस उल्लास मेले को सफल बनाने में शिक्षक सुनील बंजारे श्रीमती सरिता सायशेरा , बसंत पांडेय प्रेम बल्लभ शुक्ला, श्रीमती संध्या चतुर्वेदी कौशिक, श्रीमती गनेशिया, श्रीमती रमीन बाई और श्रीमती श्यामा बाई केवट का सहयोग रहा।मेले के दौरान सामुदायिक सहभागिता भी देखने को मिली। बड़ी संख्या में अभिभावक उपस्थित रहे। सभी आगंतुकों ने उल्लास मेला का अवलोकन किया और इस पहल की भूरि-भूरि प्रशंसा की।

