
अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और संवाद का बदलता परिदृश्य” विषय पर संगोष्ठी एवं ‘पंडित दीन दयाल उपाध्याय अवध सांस्कृतिक क्लब’ का उद्घाटन समारोह संपन्न
लखनऊ, 28 अप्रैल 2025,campussamachar.com, उत्तर प्रदेश भाषा संस्थान एवं पं. दीन दयाल उपाध्याय राजकीय महिला महाविद्यालय, राजाजीपुरम, लखनऊ ( Pt. Deen Dayal Upadhyay Govt. Girl’s P G College Lucknow) के संयुक्त तत्वावधान में “अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और संवाद का बदलता परिदृश्य” विषय पर एक विचार संगोष्ठी का आयोजन किया गया। साथ ही, महाविद्यालय में नवगठित “पंडित दीन दयाल उपाध्याय अवध सांस्कृतिक क्लब” का भव्य उद्घाटन समारोह भी संपन्न हुआ। कार्यक्रम की अध्यक्षता महाविद्यालय के प्राचार्य प्रो. रमेश चंद्र वर्मा ने की। कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्वलन एवं माँ सरस्वती को पुष्प अर्पित करते हुए नमन करते हुए किया गया| संगोष्ठी का मुख्य बिंदु रहा कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता एक महत्वपूर्ण लोकतांत्रिक अधिकार है, किंतु इसके साथ राष्ट्रहित, राष्ट्रीय पहचान, तथा संप्रभुता के प्रति जिम्मेदारी निभाना भी आवश्यक है।
मुख्य वक्ता आशुतोष शुक्ल, राज्य संपादक दैनिक जागरण, उत्तर प्रदेश ने अभिव्यक्ति की ऐतिहासिक यात्रा का उल्लेख करते हुए कहा कि संवाद ने भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन में जनचेतना को जाग्रत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। आज भी अभिव्यक्ति का सही उपयोग लोकतांत्रिक परिपक्वता और राष्ट्र निर्माण के लिए किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय एकता, संप्रभुता और धर्मनिरपेक्षता जैसे संवैधानिक मूल्यों का सम्मान संवाद की आत्मा होनी चाहिए। उन्होंने पौराणिक कथाओं के अंतर्गत यम -नचिकेता तथा मैत्रेयी- याज्ञवल्क संवाद का वर्णन करते हुए सकारात्मक संवाद एवं अभिव्यक्ति को रेखांकित किया। उनका उद्बोधन इतना सशक्त था कि सम्पूर्ण दर्शक दीर्घा में अत्यंत एकाग्रचित्त होकर एवं गंभीरता पूर्वक सुना गया।

विशिष्ट अतिथि प्रो. पवन अग्रवाल, हिंदी विभागाध्यक्ष, लखनऊ विश्व विद्यालय, लखनऊ ने सोशल मीडिया के युग में संवाद की चुनौतियों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि अभिव्यक्ति के नए मंचों ने स्वतंत्रता को व्यापक तो किया है, परंतु उनके दुरुपयोग से राष्ट्र की प्रतिष्ठा को क्षति पहुँचने की संभावना भी बढ़ गई है। उन्होंने जोर दिया कि हमें अपने संवादों में भारतीय सांस्कृतिक मूल्यों और राष्ट्रहित को सर्वोपरि रखना चाहिए।
मुख्य अतिथि प्रो. उषा सिन्हा, पूर्व अध्यक्ष,भाषाविज्ञान विभाग, लखनऊ विश्विद्यालय, लखनऊ ने अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि आज के बदलते वैश्विक और तकनीकी परिदृश्य में, जहां संवाद के साधनों में क्रांतिकारी परिवर्तन आया है, वहाँ आवश्यक है कि अभिव्यक्ति में उत्तरदायित्व और राष्ट्रप्रेम का संतुलन बना रहे। उन्होंने कहा कि स्वतंत्रता तभी सार्थक है जब वह राष्ट्रीय अस्मिता और सामाजिक मर्यादाओं का सम्मान करती है। उन्होंने अपने वक्तव्य में साहित्य के महत्व को रेखांकित करते हुए कहा कि भारत में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का सबसे सशक्त माध्यम साहित्य रहा है।

उन्होंने कहा कि प्राचीन ग्रंथों से लेकर आधुनिक साहित्य तक, भारतीय लेखकों और कवियों ने विचारों की स्वतंत्रता, सामाजिक चेतना, और राष्ट्रप्रेम को प्रखरता से अभिव्यक्त किया है। उन्होंने बल दिया कि साहित्यिक अभिव्यक्ति न केवल व्यक्ति की भावनाओं और विचारों को स्वर देती है, बल्कि वह राष्ट्र की चेतना, संस्कृतिक अस्मिता, और लोकतांत्रिक मूल्यों को भी सुदृढ़ करती है। आज के युग में भी साहित्य के माध्यम से उत्तरदायित्वपूर्ण अभिव्यक्ति करना आवश्यक है, ताकि समाज में सकारात्मक विमर्श, संवेदनशील संवाद, और रचनात्मक आलोचना को बढ़ावा मिल सके।
डॉ. सुरंगमा यादव, हिंदी विभागाध्यक्ष, पंडित दीन दयाल उपाध्याय महा विद्यालय लखनऊ कहा कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का अधिकार संविधान द्वारा हमें प्रदान किया गया है, इसका हमारी संस्कृति में पहले से महत्व रहा है। पर ये निर्बाध नहीं है।प्रौद्योगिकी के विकास ने संवाद दायरा और गति दोनों को बढ़ाया है,साथ ही नई चुनौतियाँ भी उत्पन्न की हैं। संवाद में संयम, मर्यादा, और संवैधानिक आदर्शों का पालन अनिवार्य है। प्रो. रमेश चंद्र वर्मा ने अध्यक्षीय उद्बोधन में कहा कि भारतीय संविधान ने अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता प्रदान की है, परंतु यह स्वतंत्रता राष्ट्र की एकता और अखंडता की रक्षा करने के दायित्व के साथ जुड़ी हुई है।
उन्होंने छात्राओं से आग्रह किया कि वे संवाद करते समय राष्ट्र गौरव, संवैधानिक आदर्शों, और समाजिक सद्भावना का विशेष ध्यान रखें। कहा कि आज के समय में जिम्मेदार अभिव्यक्ति राष्ट्र निर्माण का महत्वपूर्ण साधन है। उन्होंने छात्राओं से राष्ट्रहित में संवाद और सांस्कृतिक मूल्यों को बढ़ावा देने का आह्वान किया। इस संगोष्ठी की संयोजक के रूप में डॉ. रश्मि शील ने आयोजन को सफलतापूर्वक समन्वित किया। उन्होंने अपने विचार रखते हुए कहा कि संवाद तभी सार्थक है जब वह विचारशील, विवेकपूर्ण और राष्ट्रहित से प्रेरित हो।

‘पंडित दीन दयाल उपाध्याय अवध सांस्कृतिक क्लब’ के उद्घाटन समारोह के अवसर पर अर्थशास्त्र विभाग की प्राध्यापिका डॉ. निशी मिश्रा एवं महाविद्यालय की छात्रा ने सांस्कृतिक क्लब के गौरव गीत के सुन्दर प्रस्तुति दी महाविद्यालय की छात्राओं ने भारतीय सांस्कृतिक विविधता को दर्शाते हुए आकर्षक प्रस्तुतियाँ दीं।
उद्घाटन समारोह की संयोजक एवं संचालक डॉ. प्रीति वाजपेयी ने क्लब की स्थापना के उद्देश्यों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि इस क्लब के माध्यम से छात्राओं में भारतीय लोक कला, साहित्य, और सांस्कृतिक चेतना का विकास किया जाएगा। इस अवसर पर मुख्य वक्ता के रूप में इतिहास विभाग से प्रोफ़ेसर प्रियंका शर्मा एवं रसायन विज्ञान विभाग से डॉ. मिशू सिंह ने भारतीय संस्कृति एवं इसके विविध कलाओं जैसे संगीत, नाट्य, नृत्य इत्यादि के ऊपर प्रकाश डाला एवं छात्राओं को इन सांस्कृतिक कलाओं के विषय में जागरुकता बढ़ाने के लिए प्रोत्साहित किया
कार्यक्रम का सफल संचालन महाविद्यालय की प्राध्यापिकाओं के सहयोग से हुआ। संगोष्ठी और उद्घाटन समारोह में महाविद्यालय के प्राध्यापकगण, छात्राएँ, एवं आमंत्रित विद्वान गणमान्य अतिथि बड़ी संख्या में उपस्थित रहे। कार्यक्रम का समापन राष्ट्रगान के साथ हुआ।
