
बिलासपुर. ईमानदारी सर्वोत्तम नीति है. स्कूलों में शिक्षक यह आदर्श बच्चों को नैतिक शिक्षा में सिखाते हैं. सरस्वती शिशु मंदिर तिलक नगर में मोरल व्यवहारिक रूप में फलीभूत हुआ. हाफ टाइम के समय दसवीं में पढ़ने वाले छात्र मिथिलेश साहू का सौ रूपए स्कूल कैंपस में गुम हो गया. मिथिलेश ने हाफ रिसेस के बाद चौथे पीरियड में यह सूचना क्लास में इंग्लिश पढ़ा रहे शिक्षक संस्कार श्रीवास्तव को दी और स्कूल कैंपस में जाकर गुमे हुए पैसे को तलाश करने की इजाजत मांगी. इससे पहले कि शिक्षक उसे इसकी अनुमति देते , वहीं उसी कक्षा के छात्र सुमित मनचंदा ईमानदारी का परिचय देते हुए खड़े हो गया. उसने बताया कि उसे स्कूल की पानी टंकी के पास 100 रुपए मिला है. वह बहुत देर से इसके मालिक यानि दावेदार की खोज कर रहा है. अब जब उसे यह पता चल गया है कि यह राशि उसके ही कक्षा में पढ़ने वाले मिथिलेश की है तो वह इस राशि को मिथलेश साहू को वापस कर रहा है.
शिक्षक श्री श्रीवास्तव सुमित की इस बात से गदगद हो गए. उन्होंने सुमित की सराहना की. आगे भी ऐसा आदर्श अपनाने की प्रेरणा दी. दूसरे बच्चों से भी ऐसी ही ईमानदारी को अपनाने प्रेरित होने की समझाइश भी दी. जीवन भर अपनाऊंगा आनेस्टी- पैसे वापस लौटाने वाले छात्र सुमित मनचंदा ने कहा यदि उसे हजारों रुपए भी पड़े हुए मिलते तो वह अपने साथी को तलाश कर उसे वापस कर देता. ईमानदारी का पाठ उसे उसके माता पिता शिक्षकों ने सिखाया है जिसका पालन वह आजीवन करेगा.
