
लखनऊ. अपनी मेहनत के बल पर लोग कभी सिविल सर्विसेज तो कभी बैंकिंग परीक्षाओं में पास करते हैं, कुछ ऐसे ही मेधा के धनी कमल किशोर ने बिहार के तिलकामांझी भागलपुर विवि में राजनीति विभाग में असिस्टेंट प्रोफेसर की नौकरी हासिल की है लेकिन विवि प्रशासन ने उनकी ज्वायनिंग पर फिलहाल यह कहकर जांच बैठा दी है कि वे जब सिक्योरिटी गार्ड थे तो पढ़ाई के लिए किसकी अनुमति ली और कब पढ़ाई की ?
यह पूरा मामला तिलका मांझी भागलपुर विवि बिहार से जुड़ा हुआ है। यहां हाल ही में विभिन्न पदों के लिए नियुक्तियां हुई हैं। इनमें एक नियुक्ति डॉ.कमल किशोर की है, जिस पर अब विवि प्रशासन ने जांच बिठा दी है। जानकारी मिली है कि डॉ.कमल किशोर इसी विवि के अंबेडकर विचार विभाग गार्ड के रूप में पदस्थ थे और उन्होंने ड्यूटी के समय ही पढ़ाई की। पढ़ाई के बाद नेट क्वालीफाई की और असिस्टेंट प्रोफेसर के लिए आवेदन किया। पात्र होने के बाद उन्हें इंटरव्यू कॉल लेटर गया और वे इंटरव्यू में पास हो गए। विवि प्रशासन ने उन्हें असिस्टेंट प्रोफेसर के रूप में चयनित कर लिया।
अब विवि प्रशासन ने इसे पूरे प्रकरण की जांच कराने का फैसला किया है। विवि प्रशासन का कहना है कि डॉ.कमल किशोर से अपनी पढ़ाई के लिए किसकी अनुमति ली ? कब पढ़ाई आदि कई सवालों की जांच हो रही है। विवि प्रशासन का कहना है कि जांच के बाद ही आगे की कार्यवाही होगी। उधर मीडिया से चर्चा में डॉ कमल किशोर मंडल का कहना है कि उन्होंने पढ़ाई के लिए विवि से नियमानुसार अनुमति ली है।
भागलपुर के ही रहने वाले हैं
सोशल मीडिया में हो रही चर्चा के अनुसार डॉ कमल किशोर ने भागलपुर के मुंदीचक के निवासी हैं। उनके पिता का नाम गोपाल मंडल है। डॉ. कमल किशोर मंडल अंबेडकर विचार विभाग में गार्ड की नौकरी करते थे। डॉ मंडल ने मीडिया को बताया कि उन्होंने अपनी पढ़ाई यूनिवर्सिटी प्रशासन के अधिकारियों के लिखित आदेश पर की है। ड्यूटी के समय ही उन्होंने एमए राजनीति शास्त्र किया और फिर पीएचडी कर 2018 में यूजीसी नेट क्वालीफाई किया। इसके बाद साल 2020 में सहायक प्रोफेसर के तौर पर इंटरव्यू दिया और साल 2022 में सहायक प्रोफेसर पद के लिए चयनित किए गए।
