
- उन्हें समाज सेवा और शिक्षा के क्षेत्र में उनके विशिष्ट योगदान के लिए हमेशा याद किया जाएगा .
- उन्हें दर्जनों पुरस्कार मिले . सम्मान मिले और एक दानदाता के रूप में सभी के लिए उपलब्ध रहे .
लखनऊ , 2 नवम्बर , डीएवी डिग्री कॉलेज लखनऊ सहित लखनऊकी कई नामचीन शिक्षण संस्थानों के प्रबंधक मनमोहन तिवारी जी का एक नवंबर 2025 का आकस्मिक निधन हो गया . उनके निधन ने शिक्षा जगत को अपूर्णीय क्षति पहुंचाई है . उन्हें समाज सेवा और शिक्षा के क्षेत्र में उनके विशिष्ट योगदान करने के लिए हमेशा याद किया जाएगा .
शिक्षा जगत में दशकों से विभिन्न आयामों को प्रगति देने वाले मनमोहन तिवारी के चले जाने से अब एक ऐसे शख्स की कमी हो गई है, जो शिक्षा , शिक्षक , शिक्षार्थियों और विद्यालय के प्रबंधकों के लिए एक ढाल बनाकर लड़ाई लड़ते थे , अभी ज्यादा दिन नहीं हुए जब उन्होंने प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी जी से मुलाकात कर शिक्षा जगत की विभिन्न समस्याओं से उन्हें अवगत कराते हुए कई महत्वपूर्ण सुझाव भी दिए थे .
डीएवी शिक्षण संस्थान का इतिहास बहुत पुराना है और इस संस्थान की स्थापना में तिवारी परिवार का बहुत बड़ा योगदान है . यही कारण है कि बाबा, दादा के बाद मनमोहन तिवारी जी अब इस शिक्षण संस्थान को संभाल रहे थे. शिक्षण संस्थान , डीएवी डिग्री कालेज, डीएवी इंटर कॉलेज, बालिका विद्यालय इंटर कॉलेज सहित कई शिक्षण संस्थानों में उन्होंने न केवल प्रगति के नए इतिहास रचे बल्कि इन विद्यालय में होने वाले तरह-तरह के विवादों को भी विराम दिया. उन्होंने राजनीतिक पारी भी खेलने की कोशिश की और इसके तहत चुनाव भी लड़ा , लेकिन राजनीतिक परिस्थितियों ऐसी नहीं थी कि वे जीत दर्ज कर पाते .
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इस हार के बावजूद उनके मन में किसी तरह का मलाल नहीं था और वह उसी भाव से उन्हीं लोगों के बीच उनके हितेषी के रूप में कार्य करते रहे जिन्होंने उन्हें चुनाव में मदद नहीं की थी . महत्वपूर्ण बात यह है कि वह उन्होंने शिक्षण संस्थान में महत्वपूर्ण पदों पर रहते हुए शिक्षक, शिक्षा और विद्यार्थियों का हमेशा सम्मान किया . वे वैसे प्रबंधकों में नहीं थे जो शिक्षक और प्रधानाचार्य को नौकर समझते हों , वे ऐसे भी नहीं थे जो शिक्षण संस्थानों को ही राजनीति का अड्डा या फिर उसे राजनीतिक सीढ़ी के रूप में इस्तेमाल करना चाहते हो.

वे एक ऐसे भी प्रबंधक नहीं थे जो आपसी विवादों को बढ़ाकर राज करने करते और वैसे भी प्रबंधक नहीं थे जो शोषणकारी हो. लखनऊ में कई प्रबंधक हैं जो समाज सेवा के नाम पर राजनीति में हैं, टीचर्स व स्कूल के संसाधनों को अपनी राजीनीति चमकाने में उपयोग कर रहे हैं. ऐसे समय में मनमोहन तिवारी एक ऐसे सेवा कुंज के रूप में लखनऊ में अपनी पताका फहरा रहे थे जो निर्विकार भाव से शिक्षा के माध्यम से समाज को बदलने का जज्बा रखते थे , उन्हें दर्जनों पुरस्कार मिले . सम्मान मिले और एक दानदाता के रूप में सभी के लिए उपलब्ध रहे .उन्हें आपसी पारिवारिक कलह भी कमजोर नहीं कर सके. मनमोहन तिवारी ने अपना जीवन , अपना धन और अपना मान सम्मान को शिक्षा के साथ जोड़ रखा था. मनमोहन तिवारी जी स्वर्ग सिधार गए उनके लिए सच्ची श्रद्धांजलि यही होगी कि उनके आदर्शों को सहारे यह संस्थान अधिक मजबूती के साथ बढ़ेंगे.
