
- उद्घाटन सत्र के दौरान मुख्य वक्ता के रूप में लखनऊ क्षेत्रीय अधिकारी के पद पर कार्यरत प्रो. अश्वनी मिश्रा जी, विशिष्ट वक्ता के रूप में गोरखपुर विश्वविद्यालय शिक्षक संघ (गुआक्टा) के अध्यक्ष प्रो.लोकेश त्रिपाठी जी उपस्थित रहे।
- आज की राष्ट्रीय संगोष्ठी के अध्यक्षता लुआक्टा अध्यक्ष प्रो. मनोज पांडे जी द्वारा की गयी I तथा कार्यक्रम की संयोजिका एवं खुन खुन जी गर्ल्स पी जी कॉलेज की प्राचार्य प्रो.अंशु केडिया जी के साथ विभिन्न महाविद्यालय के प्राचार्य शिक्षक गण एवं प्रतिभागियों ने संगोष्ठी में अपनी उपस्थिति दर्ज कराई।
लखनऊ, 18 जुलाई , लखनऊ विश्वविद्यालय सहयुक्त महाविद्यालय शिक्षक संघ (लुआक्टा )एवं लखनऊ विश्वविद्यालय से सहयुक्त महाविद्यालयों के संयुक्त तत्वावधान में दिनांक 18 जुलाई 2025 को एक ऑनलाइन मोड पर एक दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी जिसका शीर्षक “महाविद्यालय उच्च शिक्षा में नवाचार, चुनौतियां, संभावनाएं एवं भविष्य” है का आयोजन किया गया। उद्घाटन सत्र के दौरान मुख्य वक्ता के रूप में लखनऊ क्षेत्रीय अधिकारी के पद पर कार्यरत प्रो. अश्वनी मिश्रा जी, विशिष्ट वक्ता के रूप में गोरखपुर विश्वविद्यालय शिक्षक संघ (गुआक्टा) के अध्यक्ष प्रो.लोकेश त्रिपाठी जी उपस्थित रहे।

आज की राष्ट्रीय संगोष्ठी के अध्यक्षता लुआक्टा अध्यक्ष प्रो. मनोज पांडे जी द्वारा की गयी I तथा कार्यक्रम की संयोजिका एवं खुन खुन जी गर्ल्स पी जी कॉलेज की प्राचार्य प्रो.अंशु केडिया जी के साथ विभिन्न महाविद्यालय के प्राचार्य शिक्षक गण एवं प्रतिभागियों ने संगोष्ठी में अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। उद्घाटन सत्र के दौरान सर्वप्रथम लुआक्टा के कोषाध्यक्ष एवं शिया पी जी कॉलेज, लखनऊ।के प्रो. कीर्ति प्रकाश तिवारी जी ने सभी का स्वागत किया। उद्घाटन सत्र के संचालन का दायित्व डॉ.अनामिका सिंह के द्वारा किया गया।

संगोष्ठी के उद्घाटन सत्र में सर्वप्रथम क्षेत्रीय उच्च शिक्षा अधिकारी प्रो. अश्वनी मिश्रा जी ने अपने विचारों को सभी प्रतिभागियों के साथ साझा किया उन्होंने बताया कि महाविद्यालयी शिक्षा को उन्नत बनाने के लिए हमें सर्वप्रथम उसमें संख्यात्मक सुधार करना होगा जिसके लिए गुणात्मक सुधार की तरफ बढ़ना जरूरी है। वर्तमान समय में महाविद्यालय स्तर पर घटती छात्र संख्या की समस्या सामने आ रही है इसके संबंध में विचार करना आवश्यक है। उत्तम शोध कार्यों, अच्छे प्रकाशन, नवाचार आदि को बढ़ाकर उच्च शिक्षा की गुणवत्ता को बढ़ाया जा सकता हैं तथा गुणवत्तापरक शिक्षा प्राप्त करके ही हमारे विद्यार्थी आत्मनिर्भरता को प्राप्त कर सकते हैं उन्होंने डिजिटल लाइब्रेरी,समर्थ पोर्टल आदि की उपादेयता को भी बहुत ही सहज ढंग से व्यक्त किया।

उन्होंने बहुत से आंकड़ों के माध्यम से भारतीय उच्च शिक्षा की स्थिति को भी सबके समक्ष साझा किया और उसमें सुधार के उपाय भी बताए। संगोष्ठी के विशिष्ट वक्ता प्रो. लोकेश त्रिपाठी जी ने बताया कि सरकारी महाविद्यालयों को अपनी गरिमा कम होते जाने का कारण सरकार का उनकी तरफ ध्यान ना देना है इन महाविद्यालयों को यू जी सी या सरकार द्वारा दिए गए फंड प्राप्त नहीं हो पाते हैं यह फंड सिर्फ विश्वविद्यालयों तक ही सीमित रह जाते हैं जिसके कारण आर्थिक आय ना होने से व्यावहारिक रूप से महाविद्यालयों को बहुत सी चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। अतः सरकार को इस ओर ध्यान आकर्षित करने की विशेष आवश्यकता है कि वह इन महाविद्यालयों के लिए भी फंड उत्पन्न करें ताकि वहां पर भी भौतिक सुविधाएं , पुस्तकालय, विज्ञान व कंप्यूटर लैब आदि की व्यवस्था कर अपने स्तर को सुधार सके।

संगोष्ठी मैं तीसरे वक्ता के रूप में लुआक्टा अध्यक्ष प्रो. मनोज पांडे जी ने अपने विचारों को प्रस्तुत करते हुए बताया कि शिक्षक संघ सिर्फ आंदोलन ही नहीं करता बल्कि वह वास्तविक समस्याओं को सरकार तक पहुंचाने का काम भी करता है।उन्होंने उच्च शिक्षा विशेषत: महाविद्यालयी शिक्षा की तात्कालिक समस्याओं पर विशेष जोर दिया उन्होंने बताया की वर्तमान समय में महाविद्यालयों के समक्ष घटती छात्र संख्या, वर्ष भर होने वाले परीक्षाए, बढ़ते सेल्फ फाइनेंस कॉलेज जिन्होंने शिक्षा की गुणवत्ता को बिल्कुल नष्ट कर दिया है,मद ना मिलने के कारण महाविद्यालयों में इन्फ्रास्ट्रक्चर की कमी बड़ी समस्या के रूप में सामने आई हैं।

वर्तमान समय में विश्वविद्यालयों की हठधर्मिता भी बढ़ी है वह किसी भी प्रशासनिक कार्यों जैसे पाठ्यक्रम निर्माण आदि में महाविद्यालयों को सहभाग करने का मौका नहीं देते हैं। नित्य नए पोर्टल के आने से विभिन्न तकनीकी संबंधी समस्याएं उत्पन्न होती है जिसके कारण शिक्षा- शिक्षण प्रक्रिया पर प्रभाव पड़ता है उनका कहना था कि शिक्षा पर जीडीपी का लगभग 10% खर्च किया जाए तथा स्ववित्तपोषित महाविद्यालयों को भी अनुदान सूची पर लिया जाए ताकि वह अपनी भौतिक सुविधाओं में सुधार कर सके नए कर्मचारियों की नियुक्ति कर सकें और शिक्षा व्यवस्था को सुचारू ढंग से चला सके सरकार को मान्यता देने के नियमों में कठोरता लानी होंगी, जिससे शिक्षा का व्यवसायीकरण या निजीकरण को नियंत्रित किया जा सके। उनके विचारों के साथ उद्घाटन सत्र का समापन हुआ तत्पश्चात आर एम पी कॉलेज सीतापुर के डॉ. देवव्रत सिंह जी ने सबको धन्यवाद व्यापित किया और उद्घाटन सत्र के सफल समापन की घोषणा की।
सत्र दो “प्राचार्य उद्बोधन “ के रूप में आयोजित किया गया जिसमे लखनऊ विश्वविद्यालय से संबंधित विभिन्न महाविद्यालयों के प्राचार्यगणों प्रो पंकज सिंह, प्रो रजनी कांत, प्रो हुमा ख्वाजा, प्रो मंजुला उपाध्याय, प्रो शीला श्रीवास्तव द्वारा अपने विचार रखे गए, सभी ने महाविद्यालयों के समक्ष आ रही चुनौतियों पर ध्यान आकर्षित किया और सरकार से आग्रह किया कि समस्याओं के निवारण के लिए रननीति बनाए I इस सत्र का संचालन प्रो ज्योति काला ने किया तथा धन्यवाद ज्ञापन लुआक्टा के संयुक्त मंत्री एवं सर्वोदय पी जी महाविद्यालय, सलोन रायबरेली के डॉ श्रीकांत उपाध्याय जी ने किया ।

अगले सत्र के रूप में मीडिया सत्र का आयोजन किया गया जिसमे सभी प्रतिष्ठित समाचार पत्रों से सम्बन्धित पत्रकारगण उपस्थित रहे व अपने विचार व्यक्त किए । एनबीटी से श्री जीशान जी ने नयी शिक्षा नीति और भारतीय ज्ञान परंपरा पर बात रखी I अमृत विचार पत्र से श्री मार्कण्डेय पांडेय जी ने कॉलेज को सकार रूप से और प्रयास करने चाहिए इसपर अपनी राय दी I हिन्दुस्तान पत्र से श्री शाश्वत मिश्रा जी ने महाविद्यालयों की समस्याओं, घटते प्रवेश पर चर्चा की और ऐसे कोर्सेस खोलने की बात की जो रोजगार परक हो । इस सत्र का संचालन डॉ सतीश प्रताप सिंह , तेजगाँव ने किया तथा धन्यवाद ज्ञापन डॉ जितेंद्र चौहान हरदोई ने किया । तकनीकी सत्र के चेयरपर्सन प्रो संजय कुमार , वाई डी पी जी कॉलेज, लखीमपुर ने और सह अध्यक्ष प्रो सरिता यादव, हरदोई ने की। इस सत्र में बड़े पैमाने पर प्रतिभागियों ने अपने शोध पत्र व विचार व्यक्त किये । संगोष्ठी मे इस संगोष्ठी पर प्रो सत्या मिश्रा, नारी शिक्षा निकेतन पी जी कॉलेज ने रिपोर्ट अथवा संगोष्ठी का सार साझा किया । लुआक्टा महामंत्री व खुन खुन जी महाविद्यालय की प्राचार्या, संगोष्ठी संयोजक प्रो अंशु केडिया ने धन्यवाद ज्ञापन किया ।
संगोष्ठी के आयोजन मे प्रो सुनीता कुमार, प्रो अपर्णा, प्रो शालिनी, प्रो आरती कनौजिया, डॉ वंदना जैस्वाल, डॉ अनामिका, डॉ वीर विक्रम सिंह, राज नंदिनी, डॉ अखिलेश त्रिपाठी आदि ने सहयोग दिया . शुरू से अंत तक लगभग 650 प्रतिभागी किसी न किसी समय जुड़े रहे I महाविधालयों मे TV स्क्रीन, प्रोजेक्टर पर एक साथ शिक्षक जुड़े .

संगोष्ठी में निम्न बिंदुओं पर विचार विमर्श किया गया :
उच्च शिक्षा के पारंपरिक सार्वजनिक संस्थानों के समक्ष आ रही निम्न समस्याएं इसके भविष्य को लेकर सशंकित कर रही हैं I
1-सरकारी अनुदान का पर्याप्त न होना तथा वित्त का अभाव
2- एन ई पी के क्रियान्वयन का व्यावहारिक न होना
3- स्ववित्त पोषित महाविद्यालयों की अनवरत मान्यता
4- नित पाठ्यक्रम का बदलना
5-विद्यार्थियों एवम शिक्षकों में नीति को लेकर भ्रम
6-निजी संस्थाएं को अनेकों छूट
7- सरकारी संस्थानों की समस्याओं की कोई सुनवाई नही
8- सरकार की समस्याओं के निवारण मे उदासीनता
9- नान टीचिंग स्टाफ की कमी इत्यादि
10– विश्वविद्यालयों की परीक्षा फीस का आडिट किया जाय, तथा परीक्षा मद में अवशेष धन को महाविद्यालयो के अवस्थापना सुविधाओ हेतु भी अवांटित किया जाय।
11– सेमेस्टर प्रणाली की जगह वार्षिक परीक्षा का आयोजन किया जाय।
12– शिक्षा राज्य का दायित्व है और सरकार मर्जर की नीति को समाप्त करे।
13– सरकार द्वारा शिक्षा से इतर गतिविधिओ पर लगाम लगाया जाय।
14– विश्वविद्यालय की आकादमिक समितियों मे विश्वविद्यालय के प्रोफेसर की भाँति महाविद्यालय के प्रोफेसर को भी शामिल किया जाय।
15– पुराना हाउस टैक्स माफ़ किया जाय

