

- सभा का आयोजन वेद विद्यालय के प्राचार्य डॉ. चंद्रकांत द्विवेदी द्वारा किया गया, जिन्होंने सभी अतिथियों का वाचिक स्वागत करते हुए कार्यक्रम की गरिमा को बढ़ाया।
- कार्यक्रम के अंत में श्रावणी उपाकर्म की पूर्व संध्या पर आयोजित वेद मंत्र श्लोकान्त्याक्षरी प्रतियोगिता में उत्तीर्ण ब्रह्मचारी छात्रों को सम्मानित कर पुरस्कृत किया गया।
लखनऊ, 10 अगस्त , हनुमान सेतु स्थित श्री बाबा नीम करौरी वेद विद्यालय में संस्कृत दिवस एवं श्रावणी उपाकर्म के पावन अवसर पर एक विशिष्ट व्याख्यान सभा का आयोजन किया गया। इस आयोजन का उद्देश्य वैदिक परंपरा एवं संस्कृत भाषा की वैज्ञानिकता तथा सांस्कृतिक महत्ता को उजागर करना था। सभा का आयोजन वेद विद्यालय के प्राचार्य डॉ. चंद्रकांत द्विवेदी द्वारा किया गया, जिन्होंने सभी अतिथियों का वाचिक स्वागत करते हुए कार्यक्रम की गरिमा को बढ़ाया।
सभा की अध्यक्षता इलाहाबाद केंद्रीय विश्वविद्यालय के संस्कृत विभागाध्यक्ष प्रोफेसर प्रयाग नारायण मिश्र ने की। उन्होंने अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में वेदों में निहित ज्ञान के आधुनिक वैज्ञानिक पक्ष पर प्रकाश डालते हुए कहा कि वेद ही समस्त विज्ञान का मूल स्रोत हैं। उन्होंने छः वेदांगों को प्रत्यक्ष विज्ञान बताते हुए संस्कृत अध्ययन की सामाजिक प्रतिष्ठा और जीवन में आनंद की अनुभूति पर बल दिया।
कार्यक्रम के मुख्य वक्ता लखनऊ विश्वविद्यालय के संस्कृत विभाग के प्राध्यापक डॉ. अशोक कुमार शतपथी रहे। उन्होंने श्रावणी उपाकर्म की वैज्ञानिकता पर विस्तार से व्याख्यान देते हुए बताया कि श्रावण मास की पूर्णिमा तिथि वेद पाठ एवं विद्यारंभ के लिए अत्यंत अनुकूल मानी जाती है। इस काल में वनस्पतियों का उद्गम तथा स्मृति शक्ति का विकास होता है। उन्होंने चंद्रमा की स्थिति और उसके प्राणी जगत पर प्रभाव को वैज्ञानिक दृष्टिकोण से प्रस्तुत किया।
कार्यक्रम के अंत में श्रावणी उपाकर्म की पूर्व संध्या पर आयोजित वेद मंत्र श्लोकान्त्याक्षरी प्रतियोगिता में उत्तीर्ण ब्रह्मचारी छात्रों को सम्मानित कर पुरस्कृत किया गया। इस अवसर पर वेद विद्यालय के सम्मानित शिक्षकगण, वेदपाठी विद्यार्थी, उनके अभिभावकगण तथा संस्कृत प्रेमी जन उपस्थित रहे। कार्यक्रम ने वैदिक परंपरा के संरक्षण एवं प्रचार-प्रसार की दिशा में एक महत्वपूर्ण योगदान दिया।
