
- डा दिनेश शर्मा को समस्या के समाधान न होने पर लुआक्टा द्वारा प्रस्तावित 28 अगस्त,25 को सामूहिक अवकाश के साथ धरना एवं राजभवन मार्च तथा प्रस्तावित कार्य परिषद की बैठक की तिथि को विश्वविद्यालय मे धरना दिये जाने एवं समस्त अग्रिम आंदोलन से अवगत कराया गया.
लखनऊ , 25 अगस्त , लखनऊ विश्वविद्यालय सहयुक्त महाविद्यालय शिक्षक संघ (लुआक्टा ) का प्रतिनिधि मंडल आज 25 अगस्त 2025 को उत्तर प्रदेश के पूर्व उप मुख्यमंत्री एवं उच्च शिक्षा मंत्री एवं राज्य सभा सदस्य मा डा दिनेश शर्मा जी से मिला . शिक्षक संघ के पदाधिकारियों ने डा दिनेश शर्मा को लखनऊ विश्वविद्यालय द्वारा यू जी सी रेगुलेशन, 2022 की गलत व्याख्या करते हुए शोध अध्यादेश 2025 मे यू जी सी रेगुलेशन के नियमो के विपरीत सह्युक्त महाविद्यालयो के स्नातक स्तर पर अध्यापन कार्य करने वाले शिक्षकों को शोध से वंचित करने के 8 अगस्त 2025 को एकेडमिक कौंसिल द्वारा पारित प्रस्ताव के विरोध मे मिला एवं ज्ञापन सौंपा तथा विश्वविद्यालय द्वारा की जा रहे मनमानेपन के समस्त तथ्यों से अवगत कराया, तथा वार्ता किया एवं समस्या के समाधान न होने पर लुआक्टा द्वारा प्रस्तावित 28 अगस्त,25 को सामूहिक अवकाश के साथ धरना एवं राजभवन मार्च तथा प्रस्तावित कार्य परिषद की बैठक की तिथि को विश्वविद्यालय मे धरना दिये जाने एवं समस्त अग्रिम आंदोलन से अवगत कराया गया.
लुआक्टा नेताओं ने बताया कि डा दिनेश शर्मा जी द्वारा समस्या के समाधान के लिए सहयोग का आश्वासन दिया तथा इस संबंध में राज्यपाल/ कुलाधिपति महोदया सहित उच्च शिक्षा मंत्री को पत्र लिखने एवं वार्ता कर समाधान का आश्वासन दिया।
डा दिनेश शर्मा जी को दिया गया ज्ञापन निम्नवत है-.
सेवा में
मा दिनेश शर्मा जी
पूर्व उप मुख्यमंत्री एवं
सांसद (राज्य सभा)
नई दिल्ली
विषय:– लखनऊ विश्वविद्यालय द्वारा शोध कार्य हेतु यू जी सी रेगुलेशन 2022 की मनमानी व्याख्या कार्य स्नातक स्तर के शिक्षकों को शोध अधिकार से वंचित करने के संबंध में
महोदय,
लखनऊ विश्वविद्यालय, लखनऊ द्वारा मनमाने तरीके से नियमो के विरुद्ध शोध अध्यादेश 2025, दिनांक 8 अगस्त 2025 को विद्यापरिषद द्वारा स्नातक स्तर पर अध्यापन कार्य करने वाले शिक्षकों को सत्र, 2026 से शोध अधिकार से वंचित करने का प्रस्ताव पारित किया है, जिसे यथा शीघ्र कार्य परिषद द्वारा पारित किये जाने की तैयारी भी की जा रही है, जिससे लखनऊ विश्वविद्यालय से सह्युक्त महा महाविद्यालयों के शिक्षक अपने को ठगा एवं आंदोलित महसूस कर रहे है । आपके कुशल नेतृत्व मे 05 सितंबर 2021 को उत्तरप्रदेश के स्नातक स्तर पर अध्यापन कार्य करने वाले शिक्षकों को शोध कराने का अधिकार, तथा 1 नवम्बर 2021 को प्रोफेसर पद प्राप्त हुआ l
जिसके कारण महाविद्यालयो के शिक्षकों को भी कुलपति एवं प्रशासनिक पदो सहित विश्वविद्यालयो मे एसोसियेट प्रोफेसर एवं प्रोफेसर पद पर नियुक्ति का मार्ग प्रशस्त हुआ l पुन: लखनऊ विश्वविद्यालय, लखनऊ में स्नातक स्तर के शिक्षकों को शोध अधिकार से वंचित किये जाने का प्रयास किया जा रहा है जिससे शिक्षकों मे रोष है I यू जी सी रेगुलेशन 2022 मे स्नातक स्तर के शिक्षकों को शोध अधिकार से वंचित करने का कोई नियम नही है l रेगुलेशन के बिंदु 6.1 मे शोध निर्देशक नियुक्त करने के संबंध में नियम or in its affiliated Post Graduate Colleges है, जबकि लखनऊ विश्वविद्यालयद्वारा प्रस्तवित शोध अध्यादेश मे शोध निर्देशक नियुक्त करने के संबंध में बिंदु 6.1मे or in its associated Colleges(Govt.and Govt. aided) where relevant postgraduate programme in that subject is being run and fulfil the conditions mentioned in 14.2 verifief by departmental committee constituted by Head of Department. यू जी सी रेगुलेशन 2022 कही भी postgraduate programme in the subject is being run का उल्लेख नही करता है, तथा यह विश्वविद्यालय की अधिकारिता से परे है l यह भी अवगत कराना समीचीन है कि राज्य सरकार द्वारा यू जी सी रेगुलेशन 2022 अभी अंगीकृत नही किया गया है, एवं अंगीकृत करने के लिए समिति भी बनाई गयी है, वर्तमान कुलपति का कार्य काल अल्प समय के लिए है, तथा यह नीतिगत निर्णय का विषय है,
इस तथ्य से उन्हे अवगत भी कराया जा चुका है।शोध अधिकार से वंचित किये जाने के कारण शिक्षकों द्वारा 8 अगस्त 25 को लखनऊ विश्वविद्यालय मे धरना किया जा चुका है, एवं कुलपति महोदया से वार्ता विफल हो चुकी है, तथा संगठन द्वारा आगे भी आंदोलन किये जाने का निर्णय लिया गया है। जिसमे दिनांक 28 अगस्त 2025 को लखनऊ विश्वविद्यालय से सह्युक्त सभी महाविद्यालयो के शिक्षक साथी सामूहिक अवकाश पर रहते हुए विश्वविद्यालय में धरना देंगे एवं राजभवन मार्च करेंगे, जिस दिन कार्यपरिषद की बैठक आहूत की जायेगी उस दिन भी विश्वविद्यालय पर धरना दिया जायेगा l दिनांक 4 सितम्बर 2025 को काला फीता बांधकर कार्य करेंगे एवं 10 सितम्बर 25 को प्रस्तवित दीक्षांत समारोह का बहिष्कार एवं काला फीता बांधकर कार्य करेंगे, यदि आवश्यक हुआ तो संगठन द्वारा इस तिथि को राजभवन मार्च भी किया जा सकता है l साथ ही साथ संगठन द्वारा उक्त विषय पर आपसे मिलकर ज्ञापन दिये जाने एवं आपके माध्यम से समस्या का समाधान का आग्रह किये जाने का प्रस्ताव भी पारित किया गया है l
अत: आपसे आग्रह है कि समस्या के समाधान के लिए उचित कार्यवाही करने का कष्ट करे, जिससे आप द्वारा प्रदत्त शोध अधिकार यथावत बना रहे, और विश्वविद्यालय की मनमानी पर रोक लगाई जा सके l संघ आपका आभारी रहेगा।
सादर
डा मनोज पांडेय
संलग्नक: मा कुलपति महोदया को प्रेषित पत्र दिनांक 25 अगस्त 2025 की प्रति
मा कुलपति महोदया को लिखा पत्र निम्नवत है—-
सेवा में
मा कुलपति
लखनऊ विश्वविद्यालय लखनऊ
विषय:– विद्या परिषद की आहूत बैठक दिनांक 8 अगस्त 2025 मे पारित शोध अध्यादेश 2025 के बिंदु, 6.1 एवं 5.2.1 यू जी सी रेगुलेशन,2022 के विपरीत होने के कारण निरस्त कि जाने के संबंध में
महोदया,
संगठन आपका ध्यान 8 अगस्त 2025 को लखनऊ विश्वविद्यालय लखनऊ द्वारा आहूत विद्या परिषद की बैठक में पारित शोध अध्यादेश 2025, जिसके द्वारा विश्वविद्यालय से सहयुक्त महाविद्यालयो मे शोध के संबंध में यू जी सी रेगुलेशन 2022 के आधार पर स्नातक स्तर पर अध्यापन कार्य करने वाले शिक्षकों को सत्र 2026 से शोध अधिकार से वंचित करने का निर्णय लिया गया है। इस संबंध में संघ निम्न तथ्य संज्ञान में लाना चाहता है—-
1– आप अवगत है कि राज्य सरकार द्वारा शोध के सम्बन्ध में निर्गत यू जी सी रेगुलेशन 2022 अंगीकृत नही किया गया है, एवं इसे अंगीकृत करने के लिए समिति का गठन किया गया है। जिसमे लखनऊ विश्वविद्यालय के कुलपति एवं कुलसचिव दोनों शामिल हैं l
2– आप अवगत है कि प्रदेश के महाविद्यालयो मे स्नातक स्तर के अध्यापन कार्य करने वाले शिक्षकों को शोध का अधिकार राज्य सरकार द्वारा संगठन के संघर्ष से तत्कालीन उप मुख्यमंत्री एवं उच्च शिक्षा मंत्री मा डा दिनेश शर्मा जी द्वारा वर्ष 2021 में शिक्षक दिवस (5 सितम्बर) को लखनऊ विश्वविद्यालय के ऐतिहासिक मालवीय सभागार में तोहफ़ा के रूप में दिया गया था। लखनऊ विश्वविद्यालय द्वारा भी स्नातक स्तर के शिक्षकों को शोध अधिकार प्रदान करने के लिए समिति बनाई गई थी, किंतु इसकी रिपोर्ट से पहले सरकार द्वारा घोषणा हो गयी।
3– विगत वर्ष मे भी स्नातक स्तर पर अध्यापन कार्य करने वाले शिक्षकों को शोध अधिकार से वंचित किये जाने के संबंध में पूर्व तत्कालीन कुलपति प्रो आलोक राय जी से संगठन की वार्ता हुई थी और स्नातक स्तर के शिक्षकों का शोध अधिकार यथावत रखने पर सहमति बनी थी और यथावत बना रहा।
4– शोध छात्रों का नामांकन एवं फीस विश्वविद्यालय मे जमा होती है, तथा वह विश्वविद्यालय का छात्र होता है महाविद्यालय या विश्वविद्यालय का शिक्षक केवल शोध निर्देशक होता है। शिक्षक पद पर नियुक्ति की योग्यता विश्वविद्यालय एवं महाविद्यालयो मे एक समान होती है। शिक्षक की नियुक्ति यू जी, पी जी की नही बल्कि अध्यापन कार्य करने के लिए होती हैं l
5– शोध कार्य करने के लिए यू जी सी रेगुलेशन 2022, के आधार पर विश्वविद्यालय अपनी अधिकारिता से परे जा स्नातक स्तर के शिक्षकों को शोध अधिकार से वंचित करने का प्रयास कर रहा है, आप अवगत हो कि–
A– शोध निर्देशन हेतु यू जी सी रेगुलेशन 2022 मे महाविद्यालयो के शिक्षकों को शोध निर्देशक बनाये जाने का निम्न प्राविधान किया गया है—-
बिंदु 6.-
Allocation of Research Supervisor– Eligibility criteria to be a Research Supervisor, Co-Supervisor, Number of Ph.D.scholars permissible per supervisor, etc.
(1) “Permanent faculty members working as —–or in its affiliated Post-graduate Colleges/institutes. Such recognized research supervisors cannot supervise research scholars in other institutions, where they can only act as co-supervisors.—— these Regulations. ( छाया- प्रति संलग्न)
B–लखनऊ विश्वविद्यालय, लखनऊ की विद्या परिषद की बैठक संख्या (02/2025) दिनांक, 08-08-2025 मे प्रस्तुत किये जाने वाले मद की पूरक कार्यसूची मे अन्य मद संख्या 2025/02/S04 ( पृष्ठ संख्या 64 ) मे प्रस्तुत एवं पारित प्रस्ताव
6.-
(1)Allocation of Research Supervisor– Eligibility criteria to be a Research Supervisor, Co-Supervisor, Number of Ph.D.scholars permissible per supervisor, etc.
(1) “Permanent faculty members working as —–or in its associated Colleges(Govt. and Govt. aided) where relevant postgraduate programme in that subject is being run and fulfil the conditions mentioned in 14.2 verified by departmental committee constituted by Head of Department.
Such recognized research supervisors cannot supervise research scholars in other institutions, where they can only act as co-supervisors.
C–
(1) यू जी सी द्वारा निर्गत Public Notice No. F. 4.I(UGC-NET Review Committee)/2024(NET) /140648 March 27, 2024 के अनुसार शोध में प्रवेश प्राप्त करने के लिए National Eligibility Test (NET) as an Entrance Test for Admission to Ph. D. (छाया- प्रति संलग्न)
” The University Grants Commission conducts the National Eligibility Test(NET)——— Based on the the expert committee’s recommendation, in its 578th Meeting held on 13 March 2024,the UGC has decided that from the academic session 2024-25, the NET score can be used for admission to Ph.D. programmes in place of entrance tests conducted by the different universities/HEIs.
From June 2024 onwards, therefore, the NET candidates will be declared eligible in theree categories.
(2) दूसरी तरफ विश्वविद्यालय के विद्या परिषद द्वारा प्रवेश के संबंध में परीक्षा कराये जाने का निम्न प्रस्ताव पारित किया गया है, शोध अध्यादेश 2025 के बिंदु 5 एवं 5.2.1 अनुसार
5.Procedure for admission
5.2.1 The selection of candidates for Ph. D. Programme through RET shall be based on, 70% weightage in the entrance test (RET) and 30%.to the performance in interview.
9–(A)इस प्रकार स्पष्ट है कि शोध निर्देशन कराने हेतु यू जी सी रेगुलेशन 2022 के 6.1अनुसार Post Graduate Colleges की आवश्यकता है न कि Post Graduate Programme in that subject is being run and fulfil the conditions mentioned in 14.2 verified by departmental committee constituted by Head of Department
(B) यू जी सी द्वारा अपने Public Notice के माध्यम से RET परीक्षा समाप्त कर दिया गया है, और NET को आधार बनाया गया है l
उक्त दोनों प्रस्ताव यू जी सी रेगुलेशन 2022 द्वारा प्रतिपादित नियमो के विरुद्ध होने के कारण विश्वविद्यालय की अधिकारिता से परे है और विधित: लागू नही किये जा सकते हैl
अत: आपसे आग्रह है कि विधि के सामान्य सिद्धांतो का पालन करते हुए शोध अध्यादेश 2025 के बिंदु 6.1 एवं 5.2.1 को निरस्त करने का कष्ट करे l
सादर,
डा मनोज पांडेय
अध्यक्ष, लुआक्टा
