
लखनऊ. अभिभावक कल्याण संघ ने प्रदेश में सीबीएसई, आईसीएससी और यूपी बोर्ड से मान्यता प्राप्त निजी स्कूलों और कालेजों पर अभिभावकों से मनमाना शुल्क वसूलने के गंभीर आरोप लगाए हैं। संघ ने वसूली प्रकरण की जांच कराने व ५० प्रतिशत कम करने के लिए सीएम को संबोधित ज्ञापन लखनऊ के जिलाधिकारी को सौंपा। इस अवसर पर बड़ी संख्या में अभिभावक उपस्थित रहे और अपनी पीड़ा व्यक्त की।
लखनऊ जिलाधिकारी को ज्ञापन सौंपने पहुंचे अभिभावक कल्याण संघ के पदाधिकारियों का कहना है कि अभिभावकों से यह वसूली विगत चार दशक से हो रही है। यह राशि विभिन्न मदों के नाम से अवैध रूप से वसूली जा रही है और यह प्रकरण प्रदेश की गत दो दशक में रही सरकारों के संज्ञान में लाते हुए इसकी जाँच कराये जाने का अनुरोध समय-समय पर किया गया। परन्तु तत्कालीन सरकारों द्वारा इस सम्बन्ध में कोई ठोस कार्यवाही नहीं की गई।
वसूली प्रकरण की हो जांच,राशि ५० प्रतिशत कम हो
संगठन के प्रवक्ता अनिल ने कहा कि संघ द्वारा विगत दो दशकों से प्रयास किए जा रहे हैं। संघ ने सरकार से इस वसूली प्रकरण की जांच कराने और 50 प्रतिशत धनराशि कम करए जाने के लिए कार्यवाही का अनुरोध किया गया है। संघ का मानना है कि निजी विद्यालय न केवल प्रवेश के नाम पर भारी धन उगाही कर रहे हैं, बल्कि टीचिंग फीस के अलावा अन्य मदों के नाम पर प्रवेश शुल्क, काशनमनी टर्म फीस, डेवलपमेंट फीस लैब फीस, लाइब्रेरी फीस कम्प्यूटर शुल्क, मैगजीन शुल्क वार्षिक समारोह शुल्क, बिल्डंग फन्ड, साइकिल स्टैण्ड शुल्क, वार्षिक कैलेन्डर शुल्क, एक्जामिन शुल्क के साथ काउंसिलिंग फीस, टी0सी0 शुल्क की अवैध वसूली की जा रही है।
कुछ स्कूलों ने शिक्षा को बनाया व्यापार
संघ के प्रवक्ता अनिल सिंह की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि इस तरह कथित निजी स्कूलों और कालेजों के प्रबन्धकों ने शिक्षा को व्यापार बना रखा है, जबकि भारतीय संविधान / शिक्षा एक्ट एवं मानव संसाधन विकास मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा समय-2 पर जारी दिशा निर्देशों के अनुसार शिक्षा को व्यापार नहीं बनाया जा सकता है” ऐसा उल्लिखित किया गया है।
अभिभावक शिक्षा में सुधार की कर रहे अपेक्षा
प्रदेश के करोड़ों अभिभावक शिक्षा के क्षेत्र में व्यापक सुधार की अपेक्षा कर रहे हैं। इससे स्पष्ट है कि प्रदेश में शिक्षा के क्षेत्र व्याप्त विषमताओं में सुधार की तत्काल आवश्यकता है। विगत सरकारों द्वारा प्रकरण में कोई कार्यवाही न करने से यह स्पष्ट है कि सरकार विभिन्न स्कूल / कालेजों के प्रबन्धतन्त्र / शिक्षा माफियाओं के दबाव में हैं। शिक्षा माफियाओं को ही लाभ पहुंच रहा है। संघ ने प्रदेश के विभिन्न निजी स्कूल / कालेजों द्वारा 50 प्रतिशत अवैध रूप से ली जा रही धनराशि जाँच कराये जाने एवं 50 प्रतिशत शुल्क को तत्काल प्रभाव से कम कराये जाने के लिए 07 जनवरी को उत्तर प्रदेश के मुख्यमन्त्री को संबोधित जिलाधिकारी को सौंपा।
बड़ी संख्या में अभिभावक रहे उपस्थित
अभिभावक कल्याण संघ के इस प्रतिनिधि मण्डल में प्रदीप कुमार श्रीवास्तव ओएन वर्मा, सतीश शर्मा, ओ0पी राजपूत, राजेश सतीश सिंह घनश्याम तिवारी, राजेन्द्र सिंह, राकेश जायसवाल, अनिल कुमार सिंह, राजेश खन्ना, राजीव शर्मा, मो0 खतीब, अमित कुमार, कृष्णा नन्द राय, भोजपुरी कवि राजीव कुमार शर्मा, प्रशुन कुमार श्रीवास्तव, राजीव वर्मा, विनय मिश्रा आदि उपस्थित थे।
