
लखनऊ , 06 जून, campussamachar.com, क्षेत्रीय उच्च शिक्षा अधिकारी लखनऊ डॉक्टर सुधीर चौहान के ट्रांसफर आदेश जारी हो गए हैं और उनके स्थान पर गोरखपुर के क्षेत्रीय उच्च शिक्षा अधिकारी डॉक्टर अश्वनी मिश्रा को प्स्दस्थ किया गया है . डॉक्टर सुधीर चौहान को हरदोई जिले के पिहानी स्थित राजकीय महाविद्यालय में प्राचार्य के रूप में भेजा गया है . शासकीय स्तर पर इसे सामान्य तबादला बताया जा रहा है .
इसके अलावा भी दो और ट्रांसफर हुए हैं . इस प्रकार उच्च शिक्षा विभाग ने कुल चार ट्रांसफर किए हैं और इन चारों ट्रांसफार्मर सबसे ज्यादा चर्चा सुधीर चौहान की हो रही है कि आखिर उनका तबादला क्यों किया गया है ? आज दिनभर सचिवालय , विश्वविद्यालय और डिग्री कॉलेज में यही चर्चा का केंद्र बिंदु रहा कि डॉक्टर सुधीर चौहान का तबादला क्यों किया गया है ? तरह-तरह की हो रही चर्चाओं के बीच मुख्य बात यह निकलकर सामने आ रही है कि उन्होंने लखनऊ के एक बड़े डिग्री कॉलेज में कर्मचारियों की नियुक्ति में नियमों की अनदेखी की है .
कॉलेज प्रबन्ध तंत्र के लोग सरकारी स्तर पर काफी प्रभावी भूमिका में रहे हैं और अभी भी उनका रुतबा है. प्रबंधन के प्रभाव में आकर ही क्षेत्रीय उच्च शिक्षा अधिकारी लखनऊ ने कॉलेज में नियुक्तियों में मददगार रहे हैं जबकि कॉलेज के प्राचार्य अवकाश पर होने के कारण इस नियुक्ति प्रक्रिया में शामिल नहीं है . उनकी अनुपस्थिति में नियुक्तियां की गई है . ऐसे में सवाल यह उठा रहा है कि आखिर नियमों के अनदेखी कर प्राचार्य की अनुपस्थिति में नियुक्तियां करना इतना जरूरी क्यों हो गया था ? और अगर जरूरी भी था तो उच्च शिक्षा विभाग द्वारा दिए गए दिशा निर्देशों के रूप की नियुक्तियां की जानी चाहिए थी . लेकिन प्रभाव और दबाव के कारण इन नियुक्तियों में नियमों के अनदेखी की बात सामने आ रही है .
हालांकि इस मुद्दे पर बोलने के लिए अभी न तो संबंधित कॉलेज के प्राचार्य तैयार हैं और नहीं डॉक्टर सुधीर चौहान . कॉलेज के प्राचार्य ने सिर्फ इतनी टिप्पणी की है कि वह पिछले कई दिनों से अवकाश पर हैं . उच्च शिक्षा विभाग से जुड़े लोग यह जानते हैं कि क्षेत्रीय उच्च शिक्षा अधिकारी के पास नियुक्तियां, कॉलेज में होने वाली नियुक्तियों, नए कॉलेज के खुलने और संचालन से जुड़ी विभिन्न समितियां में महत्वपूर्ण भूमिका होती है . क्षेत्रीय शिक्षा अधिकारी की रिपोर्ट खास मायने रखती है. ऐसे में उच्च शिक्षा विभाग का एक महत्वपूर्ण पद पाने के लिए उच्च शिक्षा विभाग के अधिकारियों में भी बराबर जोर आजमाइश चलती रहती है. चर्चा है कि जोर आजमाइश में डॉक्टर सुधीर चौहान कमजोर हुए और फिर उनका तबादला हो गया। बहरहाल शासन स्तर से हुए इस तबादले को लेकर चर्चा जरुर गर्म है .
