
रायपुर , 16 मई , campussamachar.com, भारतीय कुष्ठ निवारक संघ, चांपा के संस्थापक स्व. श्री सदाशिव गोविंदराव कात्रे जी की 48वीं पुण्यतिथि पर सहकार भारती छत्तीसगढ़ की ओर से श्रद्धांजलि अर्पित की गई। इस अवसर पर पैक्स प्रकोष्ठ के प्रदेश संयोजक घनश्याम तिवारी एवं प्रदेश कोषाध्यक्ष रामप्रकाश केशरवानी ने संयुक्त रूप से कात्रे जी को नमन करते हुए उन्हें कलियुग का भगीरथ बताया।
श्रद्धांजलि संदेश में तिवारी ने कहा कि कात्रे जी का जीवन सेवा, त्याग और समर्पण की अद्वितीय मिसाल है। जब समाज कुष्ठ रोगियों से मुँह मोड़ रहा था, तब उन्होंने उन्हें अपनाया और आत्मसम्मान से जीने की राह दिखाई। वे केवल सेवा नहीं कर रहे थे, बल्कि समाज को मानवता का पाठ पढ़ा रहे थे।
श्री रामप्रकाश केशरवानी ने कहा कि कात्रे जी का समर्पण इस बात का प्रमाण है कि व्यक्ति यदि संकल्प ले तो अपने दुःख को भी दूसरों की आशा बना सकता है। उनके द्वारा स्थापित संस्था आज भी समाज के तिरस्कृत वर्ग के लिए सम्मान, सुरक्षा और सहारा बनी हुई है, जो अत्यंत प्रेरणादायक है।
रेलवे की नौकरी छोड़कर, स्वयं कुष्ठ रोगी होते हुए, कात्रे जी जब बैतलपुर इलाज के लिए पहुँचे और वहाँ मिशनरियों द्वारा धर्मांतरण देखा, तब उन्होंने तय किया कि उन्हें कुछ असली और आत्मसम्मानपूर्ण सेवा करनी है। यही सोच उन्हें चांपा लेकर आई, जहाँ उन्होंने भारतीय कुष्ठ निवारक संघ आश्रम की नींव रखी।
संस्था के मूल तीन उद्देश्य—कुष्ठ रोगियों को स्वाभिमान से जीवन, भिक्षावृत्ति से मुक्ति और सम्मानजनक अंतिम संस्कार—आज भी पूरी निष्ठा से निभाए जा रहे हैं। यह आश्रम न केवल सेवा केंद्र है, बल्कि एक वैचारिक आंदोलन भी है, जिसकी नींव स्वयं पीड़ित व्यक्ति ने रखी। सहकार भारती की ओर से श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए श्री घनश्याम तिवारी एवं श्री रामप्रकाश केशरवानी ने कहा कि ऐसे महापुरुषों का स्मरण केवल एक रस्म नहीं, बल्कि प्रेरणा है। समाज को चाहिए कि वह कात्रे जी जैसे व्यक्तित्वों से सीख लेकर सेवा और संवेदना को अपने जीवन का आधार बनाए।
