
- स्कूल शिक्षा मंत्री को लिखे इस पत्र में कई चौकाने वाली और जाँच के लिए महत्वपूर्ण बातें लिखी गई हैं .
कोरबा / रायपुर, 24 सितम्बर , शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय कनकी कोरबा में शिक्षकों के बीच चल रही आपसी राजनीति से विद्यालय का वातावरण न केवल प्रभावित हो रहा है बल्कि राज्य सरकार द्वारा शिक्षा की गुणवत्ता बढ़ाने की चल रहे प्रयासों को भी झटका लग रहा है . शिक्षा विभाग के अधिकारियों का नियमित निरीक्षण और पर्यवेक्षण ना होने से विद्यालय की स्थिति शासन की मांगों का रूप संचालित नहीं हो पा रही है .
अब स्थिति यहां तक पहुंच गई है कि शिक्षकों के एक विशेष समूह ने काकस बनाकर उन टीचर्स को परेशान और प्रताड़ित करने में जुटा हुआ है जो शासन की नीति और नियमों के अनुसार शिक्षण कार्य करने के लिए हमेशा तत्पर रहते हैं . इसी विद्यालय की एक शिक्षिका सुलोचना बागले की और से प्रदेश के स्कूल शिक्षा मंत्री को एक पत्र लिखकर स्कूल में चल रही शिक्षकों की घटिया राजनीति का पर्दाफाश किया है और पूरे प्रकरण की उच्च स्थिति जांच कर कर न्याय मांगा है. उनका कहना है कि पूर्व में भी अधिकारीयों को अवगत कराया जा चुका है लेकिन कोई सुधार नहीं हो पा रहा है इसलिए अब मजबूरी हो गई . पत्र में कई चौकाने वाली और जाँच के लिए महत्वपूर्ण बातें लिखी गई हैं .
स्कूल शिक्षा मंत्री को भेजे गए इस पत्र में व्याख्याता ने कहा है कि विद्यार्थियों की संख्या कम होने के बावजूद उन्हें ठीक से अध्यापन नहीं कराया जाता है. इतना ही नहीं उक्त शिक्षिका को फसाने के लिए विभिन्न आरोप गढ़े जा रहे हैं . इससे शिक्षिका बहुत परेशान है और मानसिक रूप से काफी आहत हो रही है . शिक्षिका ने अपने पत्र की प्रतिलिपि कोरबा के जिलाधीश, पुलिस कप्तान, कोरबा के जिला शिक्षा अधिकारी सहित सभी वरिष्ठ अधिकारियों को प्रेषित की है और न्याय मांगा है . साथ ही यह भी अनुरोध किया है कि वे विद्यालय में नियमित निरीक्षण, पर्यवेक्षक सुनिश्चित कराकर सरकार की मंशा के रूप पठन-पाठन सुनिश्चित कराएं .
शिक्षिका ने न्याय न मिलने पर 26 सितंबर से को जिला शिक्षा अधिकारी ऑफिस के सामने उपवास करेगी और इसके बाद 27 सितंबर को बड़ा कदम उठाने के लिए मजबूर होगी . कोरबा के विभिन्न शिक्षक संगठनों को भी इस शिक्षिका ने पत्र भेज कर न्याय मांगा है और शासन की मंशा के अनुरूप शिक्षा की गुणवत्ता बढ़ाने , सभी को पठन-पाठन की सुविधा उपलब्ध कराने का आग्रह किया है . अब देखना यह महत्वपूर्ण होगा कि शिक्षा विभाग पीड़ित शिक्षिका के दर्द को किस तरह से दूर करते हुए विद्यालय में शैक्षिक माहौल वापस लाने का काम करते हैं
