

- झारखंड केन्द्रीय विश्वविद्यालय, रांची में दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी आयोजित
बिलासपुर, 23 मार्च , campussamachar.com, । गुरु घासीदास विश्वविद्यालय (केंद्रीय विश्वविद्यालय) के कुलपति प्रोफेसर आलोक कुमार चक्रवाल ( Professor Alok Kumar Chakrawal Vice Chancellor of Guru Ghasidas Vishwavidyalaya -Central University,) झारखंड केन्द्रीय विश्वविद्यालय में आयोजित दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी के समापन समारोह के मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए।
कार्यक्रम की अध्यक्षता झारखंड केन्द्रीय विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. क्षिति भूषण दास ने की। दिनांक 21-22 मार्च, 2025 को झारखंड केन्द्रीय विश्वविद्यालय के वाणिज्य एवं वित्तीय अध्ययन विभाग द्वारा आयोजित अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी का विषय इंडियाज जर्नी टूवर्ड्स विकसित भारत 2047: एक्सप्लोरिंग सिनर्जीस बिटविन सोशल इक्विटी, इकॉनोमिक ग्रोथ एंड ग्लोबल इंटरडिपेंडेंस फॉर ए सस्टेनेबल एंड रिसिलेंट फीचर रहा।
कुलपति प्रोफेसर चक्रवाल ने 2047 तक विकसित भारत के निर्माण में शिक्षा और शिक्षकों की भूमिका को अहम बताया। उन्होंने कहा कि शिक्षकों को ऐसे विद्यार्थियों को तैयार करना होगा जो शिक्षा के माध्यम से सामाजिक उत्तरदायित्वों को समझते हुए राष्ट्र के निर्माण में सक्रिय भूमिका निभाएं। हम सभी को विकसित भारत के निर्माण के लिए युवाओँ में सामाजिक उद्यमिता का भाव पैदा करने की आवश्यकता है। भारतीय ज्ञान परंपरा को शिक्षा में समाहित करते हुए वैश्विक आवश्यकताओं के अनुरूप विद्यार्थियों के कौशल विकास पर ध्यान दिये जाने की आवश्यकता है।
कुलपति प्रोफेसर चक्रवाल ( Professor Alok Kumar Chakrawal Vice Chancellor of Guru Ghasidas Vishwavidyalaya -Central University) ने कहा कि 2047 तक भारत को विकसित बनाने के लिए राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के अनुभवजन्य शिक्षा, कौशल तथा उद्यमिता विकास, मातृभाषा में शिक्षा, रोजगार उन्मुखी, शिक्षा के अंतरराष्ट्रीयकरण तथा उद्य़ोगों की आवश्यकता के अनुरूप शिक्षा इत्यादि बिंदुओं पर विशेष ध्यान केन्द्रित करने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि गुरु घासीदास विश्वविद्यालय में स्वावलंबी छत्तीसगढ़ जैसी अनेक योजनाएं विद्यार्थियों को सामाजिक सरोकारों से जोड़ती हैं।
संगोष्ठी में देश-विदेश के विद्वान शामिल हुए
प्रो. मुनिम बाराय, ग्रेडुएट स्कूल ऑफ मैनेजमेंट, रित्समेकन एशिया पैसिफिक यूनिवर्सिटी (एपीयू), जापान, प्रो. वल्लीप्पन राजू, वरिष्ठ निदेशक शोध, एमएएचएसए विश्वविद्यालय, मलेशिया ने बीज वक्तव्य दिया। इसके अलावा प्रो. भीमारया मैत्री, निदेशक, आईआईएम नागपुर, श्री अजय कुमार, निदेशक, सीसीएल, श्री इंद्रजीत यादव, निदेशक एमएसएमई, प्रो. अजय कुमार सिंह दिल्ली स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स भी शामिल हुए। अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी के संयोजक झारखंड केंद्रीय विश्वविद्यालय के वाणिज्य एवं वित्तीय अध्ययन विभाग विभागाध्यक्ष डॉ. बटेश्वर सिंह रहे।
