
बिलासपुर. गुरु घासीदास विश्वविद्यालय (GGU Bilaspur -central university) की प्राकृतिक संसाधन विद्यापीठ के अंतर्गत फार्मेसी विभाग के सहायक प्राध्यापक डॉ. विवेकानंद मंडल एवं ग्रामीण प्रौद्योगिकी एवं सामाजिक विकास विभाग के सह-प्राध्यापक डॉ. राजेन्द्र मेहता व उनकी टीम को ” ए सॉल्वेंट फ्री माइक्रोवेव अस्सिटेड एक्सट्रेक्शन ऑफ वोलेटाइल ऑयल फ्र ी मेंथा स्पिकाटा लीव्स” शीर्षक पर किये गये शोध पर पेटेंट प्रदान किया गया है।
उल्लेखनीय है कि डॉ. विवेकानंद मंडल की टीम में डॉ. राजेन्द्र मेहता, सह-प्राध्यापक ग्रामीण प्रौद्योगिकी एवं सामाजिक विकास विभाग एवं शोधार्थी कवि भूषण सिंह चौहान, रोशनी तांडे एवं कमल कुमार सेन शामिल थे। टीम के द्वारा 09 अक्टूबर, 2018 को पेटेंट के लिए आवेदन किया गया था। इस आवेदन को भारत सरकार के पेटेंट कार्यालय द्वारा अनुदान की तिथि 29 जुलाई, 2021 को पेेटेंट प्रमाणपत्र जारी किया गया है।
कुलपति प्रोफेसर आलोक कुमार चक्रवाल ने डॉ. विवेकानंद मंडल एवं डॉ. राजेन्द्र मेहता की टीम को इस उपलब्धि पर बधाइयां दीं और भविष्य में भी शोध एवं अनुसंधान से जुड़े विषयों पर सकारात्मक कार्य किये जाने हेतु शुभकामनाएं प्रदान कीं। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ को औषधीय पौधों का प्रदेश भी कहा जाता है ऐसे में छत्तीसगढ़ के एकमात्र केन्द्रीय विश्वविद्यालय होने के नाते हमारा दायित्व है कि हम प्रदेश की औषधीय परंपरा को राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर शोध, अनुसंधान एवं नवाचार की नवीन श्रृंखला के माध्यम से प्रसारित करें।
एसेंशियल ऑयल के नवीन निष्करण विधि पर अध्ययन
भारत में विभिन्न प्रकार के औषधीय पौधे हैं इनमें से बहुत सारे औषधीय पौधों में एसेंशियल ऑयल या वाष्पशील तेल के रूप में तत्व मौजूद होते हैं। इन तत्वों में महत्वपूर्ण औषधीय गुण होते हैं जैसे जीवाणुरोधी, सूजनरोधी, विषाणुरोधी, फ ंगलरोधी, कैंसररोधी आदि। व्यावसायिक रूप से भारत एवं विश्व के अनेक देशों में उत्पादन सात सौ मिलियन डॉलर के करीब है। भारत में परंपरागत रूप से भाप आश्वन (स्टीम डिस्टिलेशन) विधि से एसेंशियल ऑयल उद्धरण (एक्सट्रेक्शन) किया जाता है। इस विधि में समय, पानी, बिजली, रसायनिक विलायक और कार्बन उत्सर्जन का प्रचुर मात्रा में उपयोग होता है जो कि हमारे वातारण के लिए हानिकारक है और ग्लोबल वार्मिंग को बढ़ावा देता है।
डॉ. मंडल की टीम एसेंशियल ऑयल के नवीन निष्करण विधि पर अध्ययन कर रही है। इस विधि में विकिरण के माध्यम से औषधीय पौधों में मौजूद एसेंशियल ऑयल ग्रंथि टूट जाती है और गुरुत्वाकर्षण बल के द्वारा औषधीय तेल एकत्रित हो जाता है। विधि की खास बात है कि यह विलायक मुक्त विधि है, इस विधि में परंपरागत विधि की तुलना में कम समय लगता है, इसमें कम बिजली की खपत और कम कार्बन उत्सर्जन होता है। अधिक ईल्ड होने की वजह से इस विधि का उपयोग लघु एवं छोटे उद्योगों में किया जा सकता है।
डॉ. विवेकानंद मंडल एवं डॉ. राजेन्द्र मेहता की टीम को भारत सरकार के पेटेंट्स, डिजाइन एंड ट्रेडमाक्सज़्, जियोग्राफि कल इंडिकेशंस द्वारा पेटेंट प्रदान किया गया। डॉ. मंडल के अविष्कार को पेटेंट अधिनियम 1970 के उपबंधों के अनुसार 09 अक्टूबर, 2018 को बीस वर्ष की अवधि के लिए पेटेंट अनुदत्त किया गया है।
