
- यह तो अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) की ताकत और नेतृत्व कर्ताओं की समझ का ही परिणाम है कि वे इस मुद्दे पर बिना झुके अब तक कुलपति से सीधे-सीधे लड़ाई लड़ रहे हैं ।
गोरखपुर/ लखनऊ, 31 जुलाई । campussamachar.com, दीन दयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय (Deen Dayal Upadhyaya Gorakhpur University ) से जुड़ी सामान्य दिखने वाली जरूरी मांगों को लेकर अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) द्वारा शुरू किए गए आंदोलन की आंच धीरे-धीरे बढ़ती दिखाई दे रही है। विद्यार्थी परिषद (ABVP) द्वारा उठाई गई समस्याओं का समाधान तात्कालिक रूप से करने में न तो विश्वविद्यालय के अधिकारियों को कोई दिक्कत आनी चाहिये थी और ना ही कुलपति को लेकिन इन समस्याओं के समाधान न करने में और छात्रों की बातें न सुनने का परिणाम विश्वविद्यालय परिसर में विगत दिनों लाठीचार्ज, आरोप-प्रत्यारोप, जेल, दाखिल सहित अपमानजनक स्थितियों से विश्वविद्यालय परिसर घिरा हुआ है।
uttar pradesh news : अब विद्यार्थी परिषद ने इस मुद्दे पर सीधे कुलपति प्रोफेसर राजेश सिंह के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए एक अगस्त 2023 को गोरखपुर विश्वविद्यालय (Deen Dayal Upadhyaya Gorakhpur University ) चलो का नारा दिया है । अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) के नेता गोरखपुर विश्वविद्यालय परिसर (Deen Dayal Upadhyaya Gorakhpur University ) में कार्यकर्ताओं और छात्रों की पिटाई व निलंबन के मामले को लेकर अब विश्वविद्यालय प्रशासन पर पूरी तरह से हमलावर है। संभव है कि इसमें गोरखपुर की स्थानीय राजनीति का भी घालमेल हो, लेकिन ऊपरी तौर पर देखने में आ रहा है कि विश्वविद्यालय प्रशासन (Deen Dayal Upadhyaya Gorakhpur University ) ने समय रहते छात्रों की समस्याएं सुन ली होती , उनसे बात कर ली होती तो वर्तमान स्थिति नहीं आती।
ABVP news : विश्वविद्यालय (Deen Dayal Upadhyaya Gorakhpur University ) के ही एक प्रोफेसर लगातार विश्वविद्यालय (Deen Dayal Upadhyaya Gorakhpur University ) की समस्याओं को अपने स्तर से उठाते रहे हैं लेकिन उनकी समस्याएं व्यक्तिगत स्तर पर ही ज्यादा रहती हैं और उनका भी समाधान भी अब तक नहीं हुआ है। आश्चर्य की बात यह है कि गोरखपुर विश्वविद्यालय (Deen Dayal Upadhyaya Gorakhpur University ) राज्य का कोई एकलौता विश्वविद्यालय नहीं है , जहां फीस बढ़ाई गई हो या छात्रों की समस्याओं को अनसुना किया गया हो या फिर पुलिस दमन के सहारे आवाज दबाने की कोशिश की गई हो अपितु देश प्रदेश के अधिकांश शिक्षण संस्थाओं के हाल कुछ इसी तरह के हैं ।
DDU gorakhpur university : यह तो अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) की ताकत और नेतृत्व कर्ताओं की समझ का ही परिणाम है कि वे इस मुद्दे पर बिना झुके अब तक कुलपति से सीधे-सीधे लड़ाई लड़ने की रणनीति बना चुके है । संभव है कि यह आंदोलन आने वाले दिनों में प्रदेश स्तर पर भी फैल सकता है, क्योंकि अन्य विश्वविद्यालयों में भी ऐसी ही समस्याएँ है लेकिन चर्चा आंदोलन के भविष्य को लेकर भी हो रही है । आगे क्या होगा ?
up education news : विश्वविद्यालयों में इस समय प्रवेश प्रक्रिया और रिजल्ट की घोषणाओं के बीच ऐसे आंदोलनों से छात्रों का नुकसान होता है बल्कि उनकी पढ़ाई भी प्रभावित होती है लेकिन विश्वविद्यालय प्रशासन हमेशा ऐसा ही चाहता है कि कुछ आंदोलन और कुछ ऐसी घटनाएं हो जाएं जिससे अपनी लापरवाही , भ्रष्टाचार और महीनों से लेट रिजल्ट जैसी तमाम समस्याओं को भी आंदोलनों की आड़ लेकर अपनी लापरवाही निष्क्रियता को छुपा सकें।
