
लईका के मोबाइल चलाई
लईका के मोबाइल चलाई
करत हे मुह जोरी,।
पढ़ाई लिखाई सब छोड़ के, मोबाइल हे चपकाई।
खावत पियत सुतत दिनभर
कार्टून गेम खेलाई।
दाई ददा के कहना नई मानाय,
मोबाइल के हे चपकाई।
कोरा के लईका तको पिए बर इतरात हे।
बिन, मोबाइल देखे बिना नरी ले नई उतरत हे।
चार महीना के लईका, बटन ल दबावत हे।
आनी बानी के एप खोल के मोबाइल चलावत हे।
एक मोबाइल लईका ल दे दे,
घर रखवारी हो जही।
चारो धाम घुम फिर आबे
लईका ल तै मोबाइल म पाबे।
खवाई पियाई सब भुला जाथे
बस मोबाइल, मोबाइल चिल्लाथे।
जेन जिनीस तय नई जानस
लईका जान जात हे।
एकरे खातिर उम्र ले पहली
लईका बिगड़त जात हे।
मया म मयारू दाई ददा ,
गिफ्ट म मोबाइल देवत हे।
टुरा टुरी भाग जात हे ,तव
मुड़ धर चिल्लात हे।
पढ़े लिखे समझदार मन भी
मोबाइल फोन धरावत हे
बिहाव करे के पहली, घर
छोड़ भाग जात हे।
मोबाइल म लबारी सीखत हे
लईका सियान सब बिगड़त हे
बेटा कहां हस खाए बर आजा
कथे कालेज म हव ददा ।
अऊ रायपुर ले,घुम आथेय।
मोबाइल अच्छा भी आय
पर सदुपयोग करना चाही
दुनिया के हर बात हे ऐमा
सब चीज मिल जाही।
ज्ञान के दर्पण बनाई तव
जिंदगी बन जाही।
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ओमप्रकाश वर्मा
सेमरताल बिलासपुर
विशेष;
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