
बीजापुर. सरकारी नौकरी की आस छोड़कर खुद रोजगार के अवसर तलाशने वालों की कमी नहीं है और वे ऐसा करके आत्मनिर्भर बन रहे हैं। छत्तीसगढ़ के बीजापुर जिले के नैमेड़ निवासी जितेन्द्र कुडिय़म ने बताया कि स्वंय का तीन एकड़ कृषि भूमि है जिस पर वह कृषि कार्य करता है। पेशे से कृषक जितेन्द्र कुडिय़म कृषि कार्य के साथ-साथ रेशम विभाग के अंतर्गत संचालित शासकीय कोसा बीज केन्द्र नैमेड़ में कृमिपालन का कार्य करता है। जो उसकी अतिरिक्त आमदनी एक जरिया बना हुआ है। पिछले दो वर्षों से कृमिपालन का कार्य कर 50 से 60 हजार रुपये अतिरिक्त आमदनी अर्जित किया है।
सहायक संचालक रेशम द्वारा बताया गया कि ग्रामोद्योग संचालनालय रेशम विभाग द्वारा संचालित रोजगार मूलक योजनाओं का मुख्य उद्देश्य ग्रामीण अंचल में निवास कर रहे स्थानीय निर्धन परिवार अनुसूचित जाति, जनजाति एंव अन्य वर्गों के कृषको एवं हितग्राहियों को स्वरोजगार उपलब्ध कराना है। जिला बीजापुर में टसर खाद्य प्रचुर मात्रा में उपलब्ध है। जिससे वृहद संख्या में कोसा उत्पादन की प्रबल संभावनाएं मौजूद है। टसर रेशम उत्पादन के माध्यम से वनांचल के आस-पास रहने वाले परिवारों को मूल कार्यों के अतिरिक्त पूरक रोजगार प्राप्त कराने का महत्वपूर्ण साधन है।
रेशम उद्योग एक कृषि आधारित ग्रामोद्योग है, जो ग्रामीण अर्थव्यवस्था की मजबूती के लिये सहायक है। बीजापुर जिले की बात कही जाये तो यहां उपलब्ध टसर खाद्य पौधो पर टसर कीटपालन किया जाता है। ग्रामीण क्षेत्रों में जहां वन खण्डों पर अथवा शासकीय टसर केन्द्रों में उपलब्ध खाद्य पौधों पर टसर कीटपालन योजना के माध्यम से पालित डाबा ककून उत्पादित किया जाकर कृषक एवं हितग्राहियों को स्वरोजगार उपलब्ध कराया जाता है।
इसी उद्देश्य से गत वर्ष 2019-20 में जिले के अंतर्गत 80 हजार स्वस्थ डिम्ब समूह का पालन कर करीबन 35-40 लाख रुपये की कीमत की कुल 25 लाख 71 हजार नग कोसे का उत्पादन किया गया है। जिसमें 204 कृषकों को लाभान्वित किया गया है। इसी तरह वर्ष 2020-21 में लगभग 77 हजार स्वस्थ डिम्ब समूह का कृमिपालन कर लगभग 30-35 लाख रुपये की उत्पादन कर 194 कृषको एवं हितग्राहियों को लाभान्वित किया गया है तथा वित्तीय वर्ष 2021-22 में 75 हजार स्वस्थ डिम्ब समूह का पालन कर करीब 27 लाख नग कोसे का लक्ष्य रखा गया साथ ही 303 हितग्राहियों को लाभान्वित किया जाना प्रस्तावित है।
