

- छत्तीसगढ़ राज्य श्रोत पुरुष एवं प्रधान पाठक जयंत सिंह क्षत्रिय ने बताया कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के आयाम से निश्चित ही हमने जो वास्तविकता को खो दिया है उसको प्राप्त कर सकते है.
रायपुर , 02 नवम्बर , राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के तहत प्राथमिक माध्यमिक हाई हॉयर सेकेंडरी शालाओं में गणित विषय के प्रति रुचि लाने एवं सरल एवं नए तकनीकी से आगाज होने हेतु क्षेत्रीय शिक्षा संस्थान भोपाल एन सी ई आर टी द्वारा पश्चिमी राज्यों के श्रोत व्यक्तियों का एन सी ई आर टी द्वारा निर्मित गणित किट पर प्रशिक्षण आयोजित किया जिसमे प्रथम फेस में तीन राज्य तथा दूसरे फेस में 27 अक्टूबर से 1 नवंबर के बीच छत्तीसगढ़ राज्य ,गोवा तथा गुजरात के राज्य श्रोत व्यक्तियों का प्रशिक्षण आयोजित किया
इसमें दिल्ली के मास्टर ट्रेनर एवं गणित विषय पर आधारित विभिन्न कंटेंट के शोध पुरुष प्रोफेसर राजेश कुमार ठाकुर ने आधुनिक गणित से संबंधित और भारतीय संस्कृति एवं प्राचीन परंपरा से जुड़े विभिन्न गणित विषय से संबंधित गणितज्ञों के बारे में बताया जिन्होंने हमारी संस्कृति को गणित की परंपरा से पूर्व में ही जोड़ दिया था।प्रोफेसर राजेश ने विभिन्न तकनीकी ज्ञान की मदद से आज गणित विषय का अध्यापन कैसे किया जाना चाहिए उसको बड़े ही अच्छे ढंग से अपने शोध के कार्य को प्रदर्शित किया।

क्षेत्रीय शिक्षा संस्थान भोपाल एन सी ई आर टी के प्राचार्य एस के गुप्ता जी सहित प्रशिक्षण के समन्वयक अधिकारी प्रोफेसर अश्विनी कुमार गर्ग ने पूरे प्रशिक्षण के दौरान सभी प्रतिभागियों को गणित के विभिन्न प्रकार से बने टीचिंग लर्निंग मैटेरियल को प्रदर्शित कर बताया एवं मनोवैज्ञानिक ढंग से कैसे कक्षा में छात्र छात्राओं गणित के प्रति रुचि और जिज्ञासा उत्पन्न किया जाए इनके भी गुण को बताया।तकनीकी शिक्षा संचार के युग में कक्षा में कैसे सोशल मीडिया का उपयोग करके छात्र छात्राओं को तकनीकी जानकारी दिया जाए इसके लिए प्रोफेसर एम के मैथ्यू सर ने बड़े ही अच्छे ढंग से बताया।

छत्तीसगढ़ राज्य श्रोत पुरुष एवं प्रधान पाठक जयंत सिंह क्षत्रिय ने बताया कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के आयाम से निश्चित ही हमने जो वास्तविकता को खो दिया है उसको प्राप्त कर सकते है आज के नवीन पाठ्यक्रम पर आधारित राष्ट्रीय करिकुलम फ्रेमवर्क से और साथ ही अपनी प्राचीन संस्कृति एवं सभ्यता से सम्बन्धित आर्यभट्ट ,वराहमिहिर रामानुजन इत्यादि महान गणितज्ञ के खोज एवं आविष्कार को भी समझेंगे जिन्होंने कई वर्ष पूर्व बहुत सारे ऐसे गणित के थ्योरम तथा नियमों से संबंधित कार्य किया था। विभिन्न राज्यों के श्रोत व्यक्तियों से मिलकर एक अलग ही अनुभव एवं ज्ञान प्राप्त हुआ जिसको हम अपने छात्र छात्राओं को राज्य के विभिन्न शालाओं में बताएंगे . ऐसा भी क्षत्रियजी ने कहा। छ ग राज्य के लगभग 25 प्रतिभागियों ने प्रशिक्षण का लाभ लिया जिसको राज्य के विभिन्न जिलों के विद्यालय के छात्र छात्राओं को अवश्य लाभ मिलेगा।
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