
- ‘सहकार टैक्सी’ केवल एक परिवहन सेवा नहीं, बल्कि सहकारिता के माध्यम से आर्थिक समानता, सामाजिक न्याय और आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ता हुआ एक आंदोलन है।
रायपुर, 19 जून , देश में सहकारिता के क्षेत्र में एक नई और ऐतिहासिक शुरुआत करते हुए ‘सहकार टैक्सी कोऑपरेटिव लिमिटेड’ के गठन को लेकर सहकार भारती छत्तीसगढ़ के पैक्स प्रकोष्ठ के प्रदेश संयोजक श्री घनश्याम तिवारी ने इसे एक सामाजिक-आर्थिक परिवर्तन की दिशा में ऐतिहासिक पहल बताया है। उन्होंने कहा कि यह पहल टैक्सी चालकों के लिए केवल आजीविका का माध्यम नहीं, बल्कि सम्मान, आत्मनिर्भरता और भागीदारी का प्लेटफॉर्म बनेगी। “यह सहकारी मॉडल केवल तकनीक पर आधारित नहीं है, यह सहभागिता, समानता और स्वामित्व के मूल्यों पर आधारित है। टैक्सी चालक अब केवल सेवा प्रदाता नहीं, बल्कि अपने भविष्य के निर्माता होंगे।”
घनश्याम तिवारी ने कहा कि देश में सहकारी आंदोलन का प्रभाव अब केवल ग्रामीण क्षेत्रों या कृषि से जुड़े क्षेत्रों तक सीमित नहीं है, बल्कि शहरी सेवा क्षेत्रों में भी इसकी प्रभावी उपस्थिति स्थापित की जा रही है। ‘सहकार टैक्सी’ इसका जीवंत उदाहरण है, जो दिल्ली, उत्तर प्रदेश, गुजरात और महाराष्ट्र में प्रारंभ होकर धीरे-धीरे राष्ट्रीय स्तर पर विस्तार की दिशा में अग्रसर है। इस परियोजना का पंजीकरण बहु-राज्य सहकारी समिति अधिनियम के अंतर्गत किया गया है, जो इसे कानूनी और आर्थिक रूप से सुदृढ़ आधार प्रदान करता है।
इस सहकारी टैक्सी प्लेटफॉर्म की सबसे उल्लेखनीय विशेषता यह है कि इसे देश की सात शीर्ष सहकारी संस्थाओं का सक्रिय समर्थन प्राप्त है – अमूल, इफको, कृभको, नाबार्ड, नेफेड, एनडीडीबी और नेशनल कोऑपरेटिव एक्सपोर्ट लिमिटेड (एनसीईएल)। इन सभी संस्थाओं ने मिलकर 80 करोड़ रुपये की प्रारंभिक पूंजी, प्रत्येक द्वारा 10 करोड़ रुपये, इस परियोजना के लिए समर्पित की है, जबकि कुल अधिकृत पूंजी 300 करोड़ रुपये तय की गई है।
घनश्याम तिवारी ने कहा कि इस परियोजना की सबसे बड़ी उपलब्धि यह है कि ड्राइवर स्वयं इस टैक्सी प्लेटफॉर्म के सदस्य और सह-स्वामी होंगे। यह मॉडल न केवल लाभ का निष्पक्ष वितरण सुनिश्चित करेगा, बल्कि निर्णय प्रक्रिया में भी उनकी प्रत्यक्ष भागीदारी होगी। “अब तक टैक्सी चालक दूसरे प्लेटफॉर्म्स पर केवल कमीशन का शिकार होते रहे हैं, लेकिन सहकार टैक्सी उन्हें स्वाभिमान, स्थायित्व और आर्थिक सुरक्षा प्रदान करेगा,”
इस प्लेटफॉर्म को तकनीकी रूप से सक्षम और प्रतिस्पर्धी बनाने के लिए आईआईआईटी बेंगलुरु जैसे अग्रणी तकनीकी संस्थानों से सहयोग लिया जा रहा है। इससे यह सुनिश्चित होगा कि सहकार टैक्सी डिजिटल रूप से सशक्त, सुरक्षित, पारदर्शी और उपयोगकर्ता के अनुकूल हो। एक तरफ तकनीकी गुणवत्ता पर जोर दिया जा रहा है, वहीं दूसरी ओर सामाजिक-आर्थिक न्याय को केंद्र में रखते हुए इसे एक आदर्श सहकारी मॉडल के रूप में विकसित किया जा रहा है।
घनश्याम तिवारी ने इस परियोजना की आधारशिला रखने के लिए केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह का विशेष रूप से आभार प्रकट करते हुए कहा कि “श्री शाह जी की दूरदृष्टि और नीति-निर्माण के कारण ही आज सहकारिता कृषि और डेयरी से आगे बढ़कर शहरी परिवहन जैसे संवेदनशील क्षेत्रों तक पहुंची है। उनका विचार कि टैक्सी, ऑटो, दोपहिया और चारपहिया वाहन चालकों को एक ही सहकारी मंच पर लाया जाए – वास्तव में आर्थिक समानता और न्याय का मॉडल है।”
श्री तिवारी ने जानकारी दी कि सहकार भारती छत्तीसगढ़ इस मॉडल को राज्य में लाने के लिए व्यापक रणनीति बना रही है। उन्होंने कहा कि रायपुर, बिलासपुर, दुर्ग, अंबिकापुर और जगदलपुर जैसे शहरों में यह सहकारी टैक्सी सेवा स्थानीय युवाओं, बेरोजगारों और ड्राइवरों के लिए एक स्थायी आजीविका का माध्यम बन सकती है। “हम राज्य सरकार, स्थानीय प्रशासन और सहकारी विभाग से चर्चा कर इस मॉडल को लागू करने की दिशा में कार्य प्रारंभ कर चुके हैं। छत्तीसगढ़ की सड़कों पर भी जल्द सहकार टैक्सी दौड़ती दिखेगी .
छत्तीसगढ़ के सहकार भारती के पदाधिकारी इस ऐतिहासिक निर्णय का स्वागत करते हुए इसके समर्थन में आगे आए हैं। जिन प्रमुख पदाधिकारियों ने समर्थन और सराहना व्यक्त की है उनमें प्रदेश अध्यक्ष राधेश्याम चंद्रवंशी, प्रदेश कोषाध्यक्ष रामप्रकाश केशरवानी, प्रदेश संयोजक मछुआ प्रकोष्ठ नरेश मल्लाह, गणेश राम साहू, महादेव नेताम, जितेंद्र साहू, रामकुमार श्रीवास, बुद्धेश्वर केशरवानी, ललित देवांगन, महेश सोनी, मनिंद्र शुक्ला, महेश तिवारी, रुद्रप्रकाश साहू, सुरेंद्र सेहरा और जितेंद्र जैसे अनेक समर्पित कार्यकर्ता शामिल हैं। सभी ने मिलकर इसे सहकारिता क्षेत्र में बदलाव की दिशा में एक निर्णायक कदम बताया है।
‘सहकार टैक्सी’ केवल एक परिवहन सेवा नहीं, बल्कि सहकारिता के माध्यम से आर्थिक समानता, सामाजिक न्याय और आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ता हुआ एक आंदोलन है। यह सोच और प्रतिबद्धता यह संकेत देती है कि सहकार भारती छत्तीसगढ़ इस विचार को राज्य के प्रत्येक ज़िले और पंचायत स्तर तक पहुंचाने का प्रयास करेगी।
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