
- अब सहकारी समितियों के माध्यम से इन संसाधनों का वैज्ञानिक और व्यावसायिक उपयोग संभव होगा, जिससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नया आधार मिलेगा।
रायपुर,22 मई, campussamachar.com, देश की सहकारी संरचना को मजबूत करने और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त बनाने की दिशा में केंद्र सरकार द्वारा एक और ऐतिहासिक कदम उठाया गया है। केंद्रीय सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह ने हाल ही में घोषणा की कि पुआल, गोबर प्रबंधन और मृत मवेशियों के अवशेषों के समुचित उपयोग के उद्देश्य से सरकार डेयरी क्षेत्र में तीन नई बहु-राज्य सहकारी समितियों की स्थापना करेगी।
इस निर्णय का सहकार भारती छत्तीसगढ़ ने जोरदार स्वागत करते हुए इसे ‘खेती के साथ सहकारिता को जोड़ने की दूरदर्शी पहल’ बताया है।
सहकार भारती छत्तीसगढ़ के पैक्स प्रकोष्ठ के प्रदेश संयोजक श्री घनश्याम तिवारी, प्रदेश कोषाध्यक्ष श्री रामप्रकाश केशरवानी एवं जिला पंचायत जांजगीर-चांपा के सहकारिता सभापति श्री महादेव नेताम ने संयुक्त बयान जारी करते हुए केंद्र सरकार एवं विशेष रूप से सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह के प्रति आभार व्यक्त किया।
सहकार से समृद्धि की दिशा में सशक्त पहल
श्री घनश्याम तिवारी ने कहा कि यह कदम सहकार भारती के वर्षों के प्रयासों और प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के “सहकार से समृद्धि” के मूल मंत्र को धरातल पर उतारने की दिशा में मील का पत्थर साबित होगा। इस पहल से पशुपालकों, कृषकों और ग्रामीण युवाओं के लिए रोजगार के नए द्वार खुलेंगे।
ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मिलेगा बल
श्री रामप्रकाश केशरवानी ने कहा कि गोबर, पुआल और मृत मवेशियों के प्रबंधन को व्यवस्थित और लाभकारी बनाना लंबे समय से आवश्यक था। अब सहकारी समितियों के माध्यम से इन संसाधनों का वैज्ञानिक और व्यावसायिक उपयोग संभव होगा, जिससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नया आधार मिलेगा।
छत्तीसगढ़ को भी बने भागीदार
श्री महादेव नेताम ने केंद्र सरकार से आग्रह किया कि छत्तीसगढ़ जैसे कृषि और पशुपालन प्रधान राज्य को इन बहु-राज्य सहकारी समितियों की प्रक्रिया में विशेष रूप से सम्मिलित किया जाए। उन्होंने कहा कि राज्य की प्राथमिक कृषि साख समितियाँ (PACS) एवं दुग्ध समितियाँ इस पहल में प्रभावी भागीदार बन सकती हैं।

तीन प्रमुख क्षेत्रों पर केंद्रित होंगी समितियाँ
बताया गया है कि पहली समिति पुआल आधारित पशु आहार उत्पादन, रोग नियंत्रण एवं कृत्रिम गर्भाधान जैसे विषयों पर कार्य करेगी। दूसरी समिति गोबर प्रबंधन और जैविक खेती को बढ़ावा देगी। तीसरी समिति मृत मवेशियों के अवशेषों के सुरक्षित एवं व्यावसायिक उपयोग पर कार्य करेगी। इन तीनों समितियों का उद्देश्य है – संसाधनों का समुचित उपयोग, रोजगार सृजन और ग्रामीण विकास।
सहकारिता ही ग्रामीण भारत का भविष्य
तीनों नेताओं ने एक स्वर में कहा कि सहकारिता ही भारत के ग्रामीण विकास का मजबूत आधार है। आज आवश्यकता है कि सहकारिता को सिर्फ एक विभाग न समझा जाए, बल्कि इसे जनआंदोलन के रूप में आगे बढ़ाया जाए। यह निर्णय उसी दिशा में एक सशक्त कदम है।
सहकार भारती की प्रतिबद्धता
सहकार भारती छत्तीसगढ़ ने आश्वस्त किया है कि वह राज्य में इन योजनाओं के प्रचार-प्रसार, जनजागरूकता, प्रशिक्षण एवं क्रियान्वयन हेतु अपने संपूर्ण नेटवर्क के साथ सरकार का सहयोग करेगी।
