गुरु घासीदास शिष्या समिति की मासिक बैठक संपन्न

बिलासपुर. आने वाले समय में समाज को शिक्षा नहीं ंमिलेगी, रोजगार नहीं मिलेगा और स्वास्थ्य सुविधा आदि ये सभी सुविधाएं नहीं मिलेगी, क्योंंकि इन सभी का निजीकरण होने जा रहा है। केंद्र की मोदी सरकार कहती है कि हम 80 करोड जनता को पाच किलो गेहू या पाच किलो चावल, 1 किलो चना दाल या एक किलो चना देंगे। ऐसी अवस्था में समाज का क्या होगा ? इस पर चर्चा हो हम सब मिलकर आनेवाले पीढ़ी को शिक्षा व रोजगार कैसे दे सकते है ?
समाज के लिए अब कुछ करना जरूरी
इन सभी मुद्दों पर चर्चा करने के लिए गुरु घासीदास शिष्या समिति की मासिक बैठक सी. के. महिलांगे के निवास स्थान माहाराणा प्रताप चौक, देवीनगर, बिलासपुर (छत्तीसगढ़) में सफलतापूर्वक आयोजित की गई। बैठक समाज के वरिष्ठजनों ने कहा कि आजादी के 74 साल में समाज के कितने लोग विधायक, सांसद , मंत्री बने लेकिन समाज को क्या मिला ? इसलिये हमें सोचना है कि सब मिलकर शिक्षा संस्थान कैसे स्थापित करें, छोटे- छोटे उद्योग कैसे शुरू करें।
उदाहरण देकर समझाया
बैठक में यह उदाहरण देकर समझाया गया कि कुछ समाज के पास शिक्षा संस्थान, स्कूल, कॉलेज व हॉस्पिटल , उद्योग-व्यापार, हैं। डॉक्टर बाबासाहेब आंबेडकर जी ने बताया था कि रचनात्मक काम के लिए समाज के उत्थान के लिए अपने पगार का बीसवां हिस्सा देना चाहिये जैसे कोई 100 रुपये कमाता है तो 5 रुपये समाज के लिये दे और एक लाख कमाता है तो 5000 रुपये महीना समाज को दे।
…तो हमारे भी होते स्कूल, कालेज और उद्योग
अगर इस विचार पर चले होते तो आज हमारे पास इस देश में हमारे लाखों स्कूल, कॉलेज, मेडिकल कॉलेज, इंजीनियरिंग कॉलेजेस आदि होते तो हमारे समाज को अच्छी शिक्षा मिलती, लेकिन हमने कभी सोचा नहीं, आज भी नहीं सोच रहे तो समाज का नुकसान होगा हम सिर्फ व्हाट्सअप पर मेसेजेस फॉरवर्ड करते रहेंगे ,जो बातें जरुरी नहीं है। समाज की समस्या कैसे सुलझाई जाये इस बात पर चर्चा हो। देश मेे 1200 उपजातियां हैं, इन्हें किस प्रकार से जोड़ा जाय, और इसके लिए राजनीतिज्ञों से अपेक्षा करना भी व्यर्थ है।
मान्यवर कांशीराम ने कहा था
बैठक में समाज के लोगों ने कहा कि मान्यवर कांशीराम साहब करते थे- तमन्ना सही हो तो रास्ते खोजे जा सकते हैं और तमन्ना सही नहीं तो लोक हजार बहाने होते हैं। समय कम बचा है और इसके लिए रणनीति बनाकर समाज को आगे बढ़ाने के लिए काम करना होगा। बैठक में जय सतनाम के साथ समापन किया गया।
