आठ पहर यूॅ ही गया, माया, मोह, जंजाल .....
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एक दिन ऐसा होएगा, कोइ कहू का नाहि ...
अहिरन(लोहा) की चोरी करै, करै सुई का दान ।
सपनों का आकार मायने नहीं रखता.....
दुर्लभ मानुष जन्म है, देह न बारम्बार
जब वृक्षों में फल लगते हैं तो वे फलों के भार से झुक जाते हैं.....
पूरा पढि़ए जरूर... चेला तुम्बी भरके लाना… तेरे गुरु ने मंगाई
गुरु पूर्णिमा पर सभी गुरूओं को प्रणाम करता हूँ।
करत-करत अभ्यास से, जड़मति होत सुजान ।
कबिरा चिंता क्या करु, चिंता से क्या होय ।मेरी चिंता हरि करै, चिंता मोहि ना कोय ।।...
