
बिलासपुर , 09 फरवरी , पूज्य परम आलय जी के 30 वर्षों के अनुभव व सूत्रों को समझते हुए बिलासपुर के हजारों घरों में लोग धीरे धीरे निरोगी होते हुए आदमी से मनुष्य बन रहे हैं। विभिन्न गार्डनो में नाभि झटका प्रयोग करने वाले नियमित साधक एकसाथ बी आर गार्डन, बृहस्पति बाजार में एकत्रित होकर प्रयोग किए। पूज्य परम आलय जी को नए दृष्टिकोण वाले शिविर के मार्फत बिलासपुर पहली बार आमंत्रित करने वाले सर्वश्री रामावतार अग्रवाल, सुनील सुल्तानिया, राजेश गोयल चक्कू, शिव अग्रवाल, अशोक अग्रवाल, विनोद जैन, कमलेश अग्रवाल जैसी अनेकों विभूतियों के प्रति आभार व्यक्त किया गया। क्योंकि इनकी वजह से वह पहला शिविर बिलासपुर में आयोजित हो सका। जो आने वाले समय में बिलासपुर के लिए एक मील का पत्थर साबित होने जा रहा है।
सन टू ह्यूमन परिवार बिलासपुर के ललित अग्रवाल ने बताया कि वैज्ञानिक प्रमाणों से स्पष्ट हैं कि 450 करोड़ साल पहले पृथ्वी का निर्माण हुआ। लगभग 50 करोड़ साल पहले पृथ्वी पर पेड़-पौधे, पशु-पक्षी अवतरित हुए। तकरीबन 50 लाख साल पहले पहली बार बंदर से विकसित होते हुए आदमी में रूपांतरित हुआ। इस परिवर्तन का सबसे बड़ा लाभ हमारे मस्तिष्क के विकास के रूप में शुरू हुआ। अभी भी केवल 10% चेतन व 90% अचेतन अवस्था में रहता है। मानव शरीर पंचतत्व से बना है। यह त्रिदोष, सप्त धातु व मल के रूप में शरीर ने विद्यमान रहता हैं। हम जो भोजन ग्रहण करते हैं उससे ही रस, रक्त, अस्थि, वसा, मांस, मज्जा,शुक्र व ओज का निर्माण होता है। यदि हम केवल 21 दिनों से 120 दिनों तक नियमित धारा बनाकर सूर्योदय के एक घंटे बाद जल या दो घंटे बाद एल्कलाइन नाश्ता, दोपहर को जब जठराग्नि तीव्र हो, एसिडिक भोजन व शाम को स्वल्पाहार/जल यानि दिन में मात्र तीन बार मुंह जूठा कर शरीर में ऑक्सीजन की मात्रा बढ़ाने वाले व्यायाम कर स्वयं को जानने की साधना से ऊर्जा निर्माण करते हुए पारिवारिक, सामाजिक, व्यापारिक जिम्मेदारियों का निर्वहन करते हैं तो हममें आदमी से मनुष्य बनने की पूर्ण संभावना मौजूद है।
जिस तरह मोबाइल के सर्वोत्तम उपयोग हेतु उसके फीचर्स को समझते हुए उसे चार्ज कर उपयोग करना होता हैं। जैसे पेट्रोल से चलने वाली बाइक या कार रिफाइन या मिट्टी तेल से नहीं चल सकती। वैसे ही मानव शरीर की मशीन को भी समझ कर सदुपयोग करने की आवश्यकता है। तभी मन से मनन, मनन से मनुष्य बन स्वयं के अंदर विराजित परमात्मा से साक्षात्कार संभव है। प्रकृति ने हमें पशु से आदमी तक तो विकसित कर दिया। लेकिन उससे आगे की विकास यात्रा हमें ही तय करनी होगी। गलत आहार लेने से जठराग्नि कमजोर होकर भोजन पचाने ने असमर्थ होकर धातुओं को अपुष्ट कर त्रिदोष को असंतुलित कर कमजोर बना बीमारी को निमंत्रण देंगे।
इसके विपरीत संतुलित भोजन हमें शक्तिशाली बना भोजन से ऊर्जा ब्रेन तक पहुंचाकर संकल्प शक्ति बढ़ाएगा। भोजन छोटी घटना नहीं है। “जैसा खाएंगे अन्न, वैसा होगा मन”। आज के आयोजन को सफल बनाने के पूर्णिमा पिल्लै, संतोष वर्मा, प्रगति दुबे, भारती डडसेना, सरोजनी वर्मा, श्रुति साहू, रामसेवक कौशिक, महेंद्र जैन, ललित अग्रवाल, संजय जैन, पार्थों मुखर्जी, सिकंदर रजक, उमाशंकर साहू, रेखा आहूजा, अखिला नंद पांडेय, नित्यानंद अग्रवाल, प्रमोद अवस्थी, राजेश शर्मा, गोपाल अग्रवाल, नरेश गेहानि, शरद मालोटिया, दौलतराम चौधरी, अजय जैन, प्रवीण गोलछा, रेवती राव, रामकुमार वस्त्रकार, आर आर साहू आदि अनेकों साधकों का सहयोग रहा। पिछले रविवार शनिमंदिर, राजकिशोरनगर आज बी आर गार्डन, बृहस्पतिबाजार के बाद बिलासपुर में यह सिलसिला आगे भी जारी रहेगा। उपस्थित समस्त साधकों ने पूज्य परम आलय जी से निवेदन किया हैं कि वे पुनः बिलासपुर को अपने चरण रज से पवित्र करे तथा दूसरी बार नए दृष्टिकोण वाले शिविर लगाकर हम बिलासपुरवासियों पर उपकार करें
