

- प्राचीन काल से हमारी काल गणना सटीक व वैज्ञानिक तथ्यों से परिपूर्ण हैं। लेकिन आजादी के 79 वर्ष के बाद भी भारत के पंचाग व कालगणना को वह सम्मान नहीं मिल पाया हैं।
बिलासपुर , 02 सितम्बर , श्रीधाम वृंदावन निवासी प्रख्यात कथाकार आचार्य विनयकांत त्रिपाठीजी ने आज भटली में श्रीमद्भागवत की व्यासपीठ से बताया कि भगवान श्रीकृष्ण के भौतिक शरीर त्यागने शुरू हुए कलयुग को 5127 वर्ष हो गए हैं। वैसे तो इस कलयुग में पाप व अनाचार बढ़ते जा रहे हैं। लेकिन कुछ लोग ऐसे भी हैं, जो अपने संस्कार व संस्कृति को जीवित रखने का प्रयास अपने अपने स्तर पर कर रहे हैं। प्राचीन काल से हमारी काल गणना सटीक व वैज्ञानिक तथ्यों से परिपूर्ण हैं। लेकिन आजादी के 79 वर्ष के बाद भी भारत के पंचाग व कालगणना को वह सम्मान नहीं मिल पाया हैं।
विगत पांच वर्षों से हिंदू दैनंदिनी न्यास द्वारा सुनील अग्रवाल द्वारा संपादित व बिलासपुर के ललित अग्रवाल के आवास से हिंदू दैनंदिनी के रूप में सरल भाषा मे पंचाग प्रकाशित करते हुए तिथि को अंको में लिखने की विधि बनाई हैं। उन्होंने बताया की इस दैनंदिनी में ऋतु, व्रत त्यौहार के साथ देश के विभिन्न भागों में उसदिन की स्थिति अंकित हैं। महाराजजी स्वयं पंचाग के साथ इस दैनंदिनी का प्रयोग करते हैं।
उन्हें विश्वास हैं कि आने वाले समय मे बिलासपुर हिंदू दैनंदिनी प्रकाशन हेतु गोरखपुर की तरह प्रसिद्ध होगा। महाराजश्री का आभार व्यक्त कर काल गणना पर विशेष जानकारी देते हुए ललित अग्रवाल ने बताया कि साल में दो बार दिन रात बराबर होते हैं। तथा दो बार दोनों में अंतर अधिक होता हैं। उसमे भी केवल 21 मार्च से दिन बढ़ते हैं व रात छोटी होती हैं। भारतीय तिथियों के अनुरूप चैत्र शुक्ल प्रतिपदा से ही नववर्ष शुरू होता हैं। पहले 1 जनवरी को नववर्ष नहीं होता था। अपनी बात प्रमाणित करने हेतु उन्होंने बताया कि अंग्रेजी कहावत में मार्च ऑन आगे बढ़ने का प्रतीक हैं।
सेप्टेंबर में सेप्टा याने सात, ऑक्टोबर में ओक्टा ओक्टोपस के आठ का प्रतीक हैं। नवेम्बर नौ तथा डिसेम्बर डेसीमल दस का प्रतीक इस बात का द्योतक हैं कि वास्तव में पहले ग्रेगोरियन कलेंडर भी मार्च से ही शुरू होता था। उन्होंने उदाहरण देते हुए बताया कि यदि आपको 365 सामग्री 12 लोंगो में वितरित करनी हो तो आखरी वाले को ही कम या ज्यादा सामग्री मिलेगी। फरवरी माह 28 या 29 का होने से स्पष्ट होता हैं कि पहले व 12 महीना होता होगा। तभी उसे बचे कूचे शेष दिन मिलते हैं। भारतीय तिथियों को अंको में लिखने की नई विधि की जानकारी देते हुए उन्होंने बताया कि आज युगाब्द 5127 के छठवें माह के पहले पक्ष की 10 वीं तिथि दिन मंगलवार को अंको के 5127/06-01-10/03 लिखा जाता हैं।
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