

- कार्यक्रम में रश्मि अग्रवाल व नेहा राजपूत ने काव्य पाठ किया। बांसुरी शुक्ला ने नाम के अनुकूल बांसुरी बजाकर मन मोहित कर लिया। अनेकों बच्चों ने नृत्य व गायन से अपनी अपनी प्रतिभा का परिचय दिया।
बिलासपुर , 15 अगस्त , शुभमविहार स्थित जे पी हाईट्स में 79वां स्वाधीनता दिवस हर्षोल्लाष के साथ मनाया गया। जे पी हाईट्स विकास समिति के अध्यक्ष ललित अग्रवाल ने सचिव मोहन अग्रवाल, कोषाध्यक्ष संतोष अग्रवाल, एडवोकेट राजेश वर्मा, संजय सिंह राजपूत, अमित पोरवाल, आर के पांडेय,वरुण राजपूत, निशा अग्रवाल, भावना ठाकुर, रश्मि अग्रवाल, अर्चना पांडेय, करिश्मा अग्रवाल, दीपिका शुक्ला, सुषमा अग्रवाल, पिंकी छाबड़ा, मोनिका अग्रवाल, नेहा राजपूत, दिव्या पटेल, आकांक्षा राजपूत व अनेकों निवासियों की उपस्थिति में ध्वजारोहण किया .
इस अवसर पर बताया कि स्वाधीन वह व्यक्ति, समाज या देश है जिसे अपने निर्णय स्वयं लेने का अधिकार है। स्वतंत्र वह तंत्र है जो अपने स्वयं के तन्त्र से संचालित होता है। अर्थात 15 अगस्त 1947 को भारत स्वाधीन हो गया। किन्तु स्वाधीनता के 78 वर्षों पश्चात भी क्या हम स्वतन्त्र अर्थात् अपने स्वयं के तन्त्र से संचालित हो पाए? नहीं ना। तो हमें अब इसी पर कार्य करने की आवश्यकता है। सबसे पहले तो देश को ईसाई कालगणना से बाहर निकाल कर स्वदेशी कालगणना पर लाना होगा। कुछ नहीं तो हम ईस्वी सन् का त्याग कर शक संवत् को अपना सकते हैं। किन्तु इसकी सफलता शासन के द्वारा ऐसा निर्णय करने पर निर्भर है। एक व्यक्ति के रूप हम अपनी भाषा में से अंग्रेजी और अरबी पारसी के शब्दों का प्रयोग घटा कर स्वतन्त्रता की दृष्टि से योगदान कर सकते हैं ।
अपना स्वाधीनता दिवस स्मरण कराता है कि हम कभी पराधीन भी थे। ध्यान से देखें तो भारत कभी 82 लाख वर्ग किलोमीटर का हुआ करता था, आज केवल 32.50 लाख वर्ग किलोमीटर का बचा है। अर्थात् अपने देश का 50 लाख वर्ग किलोमीटर क्षेत्र आज भी पराधीन है। और हाँ, महत्वपूर्ण बात है कि हमें स्मरण रहना चाहिए कि हमारी वर्तमान पराधीनता 1192 में मुहम्मद गोरी की हम पर विजय के समय से चली आ रही है। हमें अभी अपना बड़ा भूभाग स्वाधीन करवाना शेष है। भले ही खण्डित हो, प्राप्त स्वाधीनता भी उत्तम है। स्वाधीनता दिवस की शुभकामनाएं ।
कार्यक्रम में रश्मि अग्रवाल व नेहा राजपूत ने काव्य पाठ किया। बांसुरी शुक्ला ने नाम के अनुकूल बांसुरी बजाकर मन मोहित कर लिया। अनेकों बच्चों ने नृत्य व गायन से अपनी अपनी प्रतिभा का परिचय दिया।
