
बिलासपुर, 19 मार्च Happy New Year बोलते ही लोगों को 31 दिसंबर की शराबी रात के 12 बजे का हुल्लड़ करता दृश्य चाहे अनचाहे मानस पटल पर आ जाता है, और ऐसा अचानक नहीं हुआ 31 दिसंबर कि मध्यरात्रि अंग्रेजों ने वो हुल्लड़ भरा भद्दा New Year Celebration पूरी दुनिया को अपनी वैचारिक गुलामी के हस्ताक्षर के रूप में परोसा और बेवकूफी में पूरी दुनिया ने उसे हुल्लड़ कि चकाचौंध में मदहोशी में सहर्ष स्वीकार भी किया।
#campussamachar, : हम भारतीय भी इस बेवकूफी भरे हुल्लड़बाजी से न बच पाए और पिछले कई दशक से इस मध्यरात्रि कि हुल्लड़बाजी के दूसरे दिन एक दूसरे को नये साल कि बधाइयाँ देने लगे, जबकि ये सदियों से पता था कि नववर्ष चैत्र माह के शुक्ल पक्ष कि प्रतिपदा के दिन भोर कि पहली किरण के साथ आएगा और वही पूरी वसुंधरा का #नववर्ष होगा पूरी सृष्टि उस समय उत्सव मनाती दिखेगी, खैर ईश्वर भी कर्म के आधार पर यश अपयश देता है, ये अपयश हमें मिलना ही था क्यों कि हम बहुत कुछ अपना भुलाये बैठे थे। पर ईश्वर जहाँ सम्यक होकर अपनों को दंड देने का विधान नहीं भूलता वहीं ईश्वर अपनी सत्ता और अपने मूल स्वरुप को अपनी मूल रचना को भी बार बार मानव समाज से साक्षात्कार कराते जाता है,।
bilaspur news : इस भारतवर्ष में नववर्ष को पुनः वैश्विक रूप से स्थापित करने बिलासपुर के #शुभमविहार से गतवर्ष से एक उत्सव स्वरुप दिया, शुरुवात में सब एक वर्षीय कार्यक्रम लगता था पर अब समझ आने लगा की ये कार्यक्रम केवल कार्यक्रम न होकर हिन्दू समाज में वैचारिक क्रांति की तरह स्वीकार किया गया , इसीलिए हम इसे ईश्वर द्वारा निर्देशित कार्य मानते हैँ और अपने जैसे सभी नगरवासियों को उसका निमित्त मानकर खुश हो लेते हैँ। इस वर्ष की चैत्र शुक्ल प्रतिपदा (अंग्रेजी तिथि 22 मार्च 2023) को सबसे पहले शुभमविहार से ही नववर्ष की भव्य #शोभायात्रा निकाली जाएगी आप सभी इस आयोजन में सम्मिलित होकर अपना मौलिक नववर्ष उत्साह से मनाएं।
